पंच-सरपंच चुनाव में बड़ी राहत: शैक्षणिक योग्यता की बाध्यता खत्म, नामांकन में गलती सुधारने का भी मिलेगा मौका
राजस्थान में पंचायतीराज चुनाव के तहत पंच और सरपंच पदों के उम्मीदवारों के लिए शैक्षणिक योग्यता की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है। अब प्रत्याशी न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता का प्रमाणपत्र दिए बिना भी नामांकन दाखिल कर सकेंगे। इसके अलावा, नामांकन पत्र में कोई जानकारी अधूरी रहने या गलती होने पर उम्मीदवार को सुधार का अवसर मिलेगा।
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राजस्थान में पंचायतीराज चुनाव की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए नामांकन प्रक्रिया से जुड़े अहम प्रावधान लागू किए गए हैं। अब पंच और सरपंच पद के प्रत्याशियों के लिए शैक्षणिक योग्यता की अनिवार्यता नहीं होगी। इसके साथ ही नामांकन पत्र में कोई जानकारी अधूरी रहने या गलती होने पर उम्मीदवार को उसमें सुधार करने का अवसर भी दिया जाएगा। हालांकि, इसके लिए तय समयसीमा का पालन करना जरूरी होगा। निर्धारित समय में कमियां दूर नहीं करने पर नामांकन पत्र खारिज किया जा सकता है।
पंच-सरपंच चुनाव लड़ने के लिए शैक्षणिक योग्यता जरूरी नहीं
पंचायतीराज चुनाव में अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पंच और सरपंच पद के उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता की शर्त अनिवार्य नहीं रखी गई है। इसके तहत उम्मीदवार किसी न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता का प्रमाणपत्र दिए बिना भी नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगे।
इस व्यवस्था का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के योग्य नागरिकों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने का समान अवसर देना है। शैक्षणिक योग्यता की बाध्यता खत्म होने से ग्रामीण क्षेत्रों के विभिन्न वर्गों के लोग आसानी से चुनाव में अपनी उम्मीदवारी पेश कर सकेंगे। साथ ही, शैक्षणिक दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने के कारण किसी उम्मीदवार को नामांकन प्रक्रिया से बाहर होने की परेशानी नहीं उठानी पड़ेगी।
नामांकन पत्र में कमी मिलने पर जारी होगा मेमो
नामांकन पत्र भरते समय यदि किसी उम्मीदवार से कोई जानकारी छूट जाती है या फॉर्म अधूरा रह जाता है तो उसे तुरंत खारिज नहीं किया जाएगा। ऐसी स्थिति में निर्वाचन अधिकारी संबंधित उम्मीदवार को गलती सुधारने का अवसर देंगे। इसके लिए उम्मीदवार को एक औपचारिक मेमो जारी किया जाएगा। इसमें नामांकन पत्र में पाई गई कमियों और अधूरी जानकारियों का स्पष्ट उल्लेख होगा, ताकि उम्मीदवार को पता चल सके कि किन बिंदुओं पर सुधार करना जरूरी है। इस व्यवस्था का उद्देश्य प्रत्याशियों को नामांकन पत्र की गलतियां दूर करने का उचित अवसर देना और प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना है।
तय समयसीमा में सुधार करना जरूरी
नामांकन पत्र में कमियां दूर करने के लिए उम्मीदवारों को निर्वाचन अधिकारियों की ओर से निर्धारित समयसीमा का पालन करना होगा। मेमो मिलने के बाद संबंधित प्रत्याशी को उसमें बताई गई सभी कमियों को तय समय के भीतर ठीक करना अनिवार्य होगा। यदि उम्मीदवार निर्धारित अवधि में जरूरी सुधार नहीं करता है तो उसका नामांकन पत्र अस्वीकृत किया जा सकता है। इसलिए प्रत्याशियों को सलाह दी जाती है कि मेमो मिलते ही उसमें बताई गई कमियों की जांच करें और समय रहते सभी जरूरी जानकारियां सही तरीके से दर्ज कराएं। निर्धारित समयसीमा समाप्त होने के बाद सुधार स्वीकार नहीं किया जाएगा। ऐसे में समय पर कमियां दूर नहीं करने वाले उम्मीदवार का पर्चा खारिज हो सकता है।