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यूजीसी रोलबैक: मकराना का बीजेपी को अल्टीमेटम, बोले- मांग नहीं मानी तो चुनाव में करेंगे विरोध
Fri, 28 Aug 2026 06:31 PM IST
जयपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: जयपुर ब्यूरो
Updated Fri, 28 Aug 2026 06:31 PM IST
सार
Rajasthan News: यूजीसी रोलबैक की मांग को लेकर महिपाल मकराना ने भाजपा के खिलाफ आगामी नगर निकाय चुनाव में प्रचार करने की चेतावनी दी है। उन्होंने प्रत्याशियों से लिखित शपथ पत्र की मांग की और सीजेपी पर भाजपा की ‘बी पार्टी’ होने का आरोप लगाया।
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करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल मकराना
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
यूजीसी रोलबैक की मांग को लेकर श्री राजपूत करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल मकराना ने भाजपा और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। जयपुर में अमर उजाला से बातचीत के दौरान मकराना ने कॉकरेज जनता पार्टी को भाजपा की ‘स्लीपर सेल’ करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सीजेपी के जरिए यूजीसी रोलबैक जैसे मूल मुद्दे से लोगों का ध्यान भटकाने का प्रयास किया जा रहा है।
मांग नहीं मानी तो भाजपा के खिलाफ मोर्चा
मकराना ने कहा कि करणी सेना यूजीसी रोलबैक की मांग को लेकर अपने रुख पर कायम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि यूजीसी का रोलबैक नहीं होता है तो संगठन आगामी नगर निकाय चुनाव में भाजपा के खिलाफ प्रचार अभियान चलाएगा। करणी सेना गांव, शहर और कस्बों में घर-घर जाकर लोगों से संपर्क करेगी और भाजपा प्रत्याशियों के खिलाफ माहौल बनाने का काम करेगी।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का भी उठाया मुद्दा
इसी क्रम में मकराना ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वर्णों के मान-मर्दन से जुड़ा विषय है। मकराना के इस बयान के बाद यूजीसी विवाद को लेकर चल रही राजनीतिक बहस में सामाजिक सम्मान और प्रतिनिधित्व का मुद्दा भी प्रमुखता से सामने आया है।
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कांग्रेस को भी समर्थन देने से इनकार
मकराना ने दोहराया कि करणी सेना भाजपा के साथ नहीं जाएगी। हालांकि, उन्होंने कांग्रेस को भी स्वतः समर्थन देने से इनकार किया। उनका कहना है कि कांग्रेस समेत सभी राजनीतिक दलों को यूजीसी रोलबैक के मुद्दे पर अपना स्पष्ट रुख सामने रखना होगा। संगठन यह देखेगा कि कौन-सा दल और कौन-सा प्रत्याशी इस मांग के समर्थन में खड़ा होता है।
समर्थन चाहिए तो देना होगा लिखित शपथ पत्र
उन्होंने कहा कि जो प्रत्याशी करणी सेना का समर्थन चाहते हैं, उन्हें केवल मौखिक आश्वासन देने के बजाय लिखित शपथ पत्र देना होगा। शपथ पत्र के माध्यम से यूजीसी रोलबैक की मांग पर अपनी प्रतिबद्धता स्पष्ट करनी होगी। इसके बाद ही संगठन ऐसे प्रत्याशियों के समर्थन पर विचार करेगा।
‘कमल का फूल, स्वर्ण की भूल’ का नारा दोहराया
करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने आगामी नगर निकाय चुनावों को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह चुनाव राजनीतिक रूप से भाजपा को जवाब देने की दिशा में पहली सीढ़ी साबित होंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री और भाजपा विधायकों से भी मांग की कि वे केंद्र सरकार के समक्ष यूजीसी रोलबैक को लेकर अपना पक्ष स्पष्ट रूप से रखें।
यह भी पढ़ें: जयपुर में दर्दनाक हादसा: बारिश के पानी से भरे निर्माणाधीन मकान के गड्ढे में डूबे दो मासूम भाई-बहन
मकराना ने कहा कि यदि भाजपा नेतृत्व इस मुद्दे पर कार्रवाई करता है तो परिस्थितियां अलग हो सकती हैं, लेकिन मांग की अनदेखी जारी रहने पर करणी सेना अपने राजनीतिक अभियान को आगे बढ़ाएगी। उन्होंने “कमल का फूल, स्वर्ण की भूल” का नारा भी दोहराया और कार्यकर्ताओं से चुनावी स्तर पर सक्रिय होने का आह्वान किया।
यूजीसी पर ‘स्लीपर सेल’ होने का आरोप
सीजेपी को लेकर मकराना के आरोपों ने भी राजनीतिक विवाद को और तेज कर दिया है। उन्होंने सीजेपी को भाजपा की ‘बी पार्टी’ और ‘स्लीपर सेल’ बताते हुए दावा किया कि उसके जरिए मुख्य मुद्दे से ध्यान हटाने की कोशिश की जा रही है।
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मांग नहीं मानी तो भाजपा के खिलाफ मोर्चा
मकराना ने कहा कि करणी सेना यूजीसी रोलबैक की मांग को लेकर अपने रुख पर कायम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि यूजीसी का रोलबैक नहीं होता है तो संगठन आगामी नगर निकाय चुनाव में भाजपा के खिलाफ प्रचार अभियान चलाएगा। करणी सेना गांव, शहर और कस्बों में घर-घर जाकर लोगों से संपर्क करेगी और भाजपा प्रत्याशियों के खिलाफ माहौल बनाने का काम करेगी।
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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का भी उठाया मुद्दा
इसी क्रम में मकराना ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वर्णों के मान-मर्दन से जुड़ा विषय है। मकराना के इस बयान के बाद यूजीसी विवाद को लेकर चल रही राजनीतिक बहस में सामाजिक सम्मान और प्रतिनिधित्व का मुद्दा भी प्रमुखता से सामने आया है।
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कांग्रेस को भी समर्थन देने से इनकार
मकराना ने दोहराया कि करणी सेना भाजपा के साथ नहीं जाएगी। हालांकि, उन्होंने कांग्रेस को भी स्वतः समर्थन देने से इनकार किया। उनका कहना है कि कांग्रेस समेत सभी राजनीतिक दलों को यूजीसी रोलबैक के मुद्दे पर अपना स्पष्ट रुख सामने रखना होगा। संगठन यह देखेगा कि कौन-सा दल और कौन-सा प्रत्याशी इस मांग के समर्थन में खड़ा होता है।
समर्थन चाहिए तो देना होगा लिखित शपथ पत्र
उन्होंने कहा कि जो प्रत्याशी करणी सेना का समर्थन चाहते हैं, उन्हें केवल मौखिक आश्वासन देने के बजाय लिखित शपथ पत्र देना होगा। शपथ पत्र के माध्यम से यूजीसी रोलबैक की मांग पर अपनी प्रतिबद्धता स्पष्ट करनी होगी। इसके बाद ही संगठन ऐसे प्रत्याशियों के समर्थन पर विचार करेगा।
‘कमल का फूल, स्वर्ण की भूल’ का नारा दोहराया
करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने आगामी नगर निकाय चुनावों को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह चुनाव राजनीतिक रूप से भाजपा को जवाब देने की दिशा में पहली सीढ़ी साबित होंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री और भाजपा विधायकों से भी मांग की कि वे केंद्र सरकार के समक्ष यूजीसी रोलबैक को लेकर अपना पक्ष स्पष्ट रूप से रखें।
यह भी पढ़ें: जयपुर में दर्दनाक हादसा: बारिश के पानी से भरे निर्माणाधीन मकान के गड्ढे में डूबे दो मासूम भाई-बहन
मकराना ने कहा कि यदि भाजपा नेतृत्व इस मुद्दे पर कार्रवाई करता है तो परिस्थितियां अलग हो सकती हैं, लेकिन मांग की अनदेखी जारी रहने पर करणी सेना अपने राजनीतिक अभियान को आगे बढ़ाएगी। उन्होंने “कमल का फूल, स्वर्ण की भूल” का नारा भी दोहराया और कार्यकर्ताओं से चुनावी स्तर पर सक्रिय होने का आह्वान किया।
यूजीसी पर ‘स्लीपर सेल’ होने का आरोप
सीजेपी को लेकर मकराना के आरोपों ने भी राजनीतिक विवाद को और तेज कर दिया है। उन्होंने सीजेपी को भाजपा की ‘बी पार्टी’ और ‘स्लीपर सेल’ बताते हुए दावा किया कि उसके जरिए मुख्य मुद्दे से ध्यान हटाने की कोशिश की जा रही है।