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Rajasthan: बाड़मेर में 9 साल से अलग रह रहे पति-पत्नी ने फिर आए साथ, राष्ट्रीय लोक अदालत में रजामंदी
Sat, 13 May 2023 09:44 PM IST
उदित दीक्षित
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, बाड़मेर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, बाड़मेर
Published by: उदित दीक्षित
Updated Sat, 13 May 2023 09:44 PM IST
सार
बाड़मेर में लगी राष्ट्रीय लोक अदालत लोगों के लिए खासी उपयोगी साबित हो रही है। इस लोक अदालत के जरिए कई पुराने मामले खत्म हो रहे हैं और वर्षों से कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाकर परेशान हो चुके लोगों को राहत मिल रही है। राष्ट्रीय लोक अदालत की भावना से प्रेरित होकर बाड़मेर में 9 साल से अलग रह रहे पति पत्नी ने विवाद खत्म कर फिर से एक दूसरे के साथ रहने का निर्णय किया।
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एक बार फिर साथ आए पति-पत्नी।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मामला जिले के चौहटन का है भाई-बहन की आटे-साटे में 10 साल पहले शादी हुई थी शादी के एक साल बाद बहन ने ससुराल में सुसाइड कर लिया था। इसके बाद भाई व मां बाप ने ससुराल पक्ष पर हत्या का आरोप लगाकर मामला दर्ज करवाया। इसके बाद गर्भवती पत्नी वापस पीहर चली गई। वहां पुत्र को जन्म दिया। इसके बाद पीहर पक्ष के साथ अपने पति और ससुराल पक्ष के विरुद्ध दहेज का मुकदमा दर्ज करवाया।
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मामला न्यायालय में पहुंचा तो पत्नी ने बेटे व खुद के भरण पोषण का दावा कर दिया इसके बाद काफी समय तक भरण पोषण देने जे बाद पति ने तलाक प्रार्थना पेश किया। साल 2022 में कोर्ट में डिक्री पारित हो गई, लेकिन आज लोक अदालत में सामाजिक स्तर के बाद मजिस्ट्रेट और वकीलों के समझाने पर पति-पत्नी मान गए। दोनों ने एक-दूसरे को माला पहनाकर 9 साल बाद एक-दूसरे का हाथ थाम कर नई जिंदगी की शुरुआत की।
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दरअसल, चौहटन बांकलसर बस्ती निवासी जसराज (30) पुत्र कानाराम की शादी साल 2013 में हुआ उर्फ हऊवा (27) पुत्री माणकाराम के साथ आटे-साटे में हुई थी। इसके एक साल बाद जसराज की बहन ने सुसाइड कर लिया है। इसके बाद दोनों परिवारों के बीच अनबन व मुकदबाजी हो गई। इससे जसराज व हऊवा का भी रिश्ता टूट गया। उस समय हऊवा प्रेग्नेंट थी।
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सामाजिक व न्यायिक स्तर पर समझाने के बाद दोनों परिवार माने
सामाजिक व न्यायिक स्तर पर समझाने के बाद दोनों परिवार माने। साल 2014 में गोद भरवाई के बाद हऊवा को पीहर भेजा। इसके बाद पीहर से वापस नहीं आई। दहेज का मामला दर्ज करवा दिया था, लेकिन मामले में एफआर लग गई। इसके बाद से भरण-पोषण का मामला दर्ज करवाया।पति जसराज भरण-पोषण की राशि दे रहा था 9 साल से घर नहीं आने पर पति जसराज ने तलाक के लिए कोर्ट में प्रार्थना पेश कर दिया।सामाजिक स्तर पर पंचायती के बाद आज 9 साल दोनों ने सभी विवाद बुलाकर एक दूसरे के साथ रहने का फैसला कर लिया।
जसराज के मुताबिक आटे-साटे में शादी हुई थी। बहन का ससुराल ने मर्डर कर दिया। पत्नी पीहर चली गई। दहेज का मामला दर्ज करवाया। इसमें एफआर लग गई। भरण-पोषण का केस किया। कोर्ट के आदेश के बाद भरण-पोषण दे रहा था। इसके बावजूद पत्नी वापस आना नहीं चाह रही थी। तब तलाक का केस किया। तब कोर्ट से डिक्री भी पारित हो गई।
इसके बाद सामाजिक स्तर पर पंचायती हुई और लोगों के कहने पर हम दोनों मान गए।पति ने कहा कि नए सिरे जिंदगी शुरू की। पति जसराज का कहना है कि आज एक बार फिर से 10 साल बाद कोर्ट में एक-दूसरे को माला पहनाई। अब नए सिरे एक बार फिर से जिंदगी शुरू की है। आज बहुत खुश है। मेरा 9 साल का बेटा भी है।
जज ने कहा- राष्ट्रीय लोक अदालत में की मंशा राजीनामा करवाया जाए
न्यायधीश आशा कुमारी के मुताबिक राष्ट्रीय लोक अदालत में एक कंपल ने राजीनामा किया है। धारा 13 मुकदमा तलाक लेने के लिए आए होते है। आज सभी के प्रयासों से एक घर वापस बसा है। घर टूटने से जो भी मामले बने थे, वो सभी विड्रॉल होने जा रहे है। हमारे यहां पर राजीनामा कर प्रकरण खत्म हो गया है। घर टूटना सबसे दुखद और पीड़ा देता है।