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सरकार ने नहीं दी 35 हजार बच्चों की फीस
जयपुर/इंटरनेट डेस्क
Updated Tue, 08 Jan 2013 02:18 PM IST
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निजी स्कूलों में अति गरीब बच्चों की शिक्षा के लिये फीस अभी स्कूलों तक नहीं पहुंची है। फीस के बिना स्कूलों पर भार बढ़ता जा रहा है। इस संबंध में कुछ करने की बजाये केंद्र और राज्य सरकार इसकी जिम्मेदारी एक-दूसरी पर डाल रहे हैं। इससे स्कूल संचालक गहरी नाराजगी में हैं।
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केंद्र सरकार के शिक्षा के अधिकार कानून के तहत अति गरीब बच्चों को निजी स्कूलों में दाखिला दिया जाता है। पिछले तीन सालों में 35 हजार से ज्यादा बच्चों को शहर के स्कूलों में प्रवेश दिया जा चुका है। इन बच्चों की फीस भी राज्य सरकार ने नहीं चुकाई है।
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सरकार ने इस साल फीस की पहली किश्त देने की बात की थी लेकिन अब वह भी नहीं मिलती दिख रही है। पिछले साल सरकार ने 13000 से भी ज्यादा प्रवेशों को नियमों के अनुसार नहीं होना कहकर रद्द कर दिया था। बाद में इनका प्रवेश जारी रखा। उन प्रवेशों के बदले में एक पैसा भी स्कूलों को नहीं दिया था। इस बार शहर के स्कूलों में 23000 से ज्यादा प्रवेश हो चुके हैं लेकिन अभी तक सरकार ने फीस नहीं दी है। जबकि इनकी फीस करीब नौ हजार रूपए तय कर दी गई थी। फीस की पहली किश्त दीपावली के आसपास दी जानी थी।
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ऐसे में नाराज निजी स्कूल संचालकों ने आरटीई के तहत प्रवेश नहीं देने का मन बना लिया है। वे अब विरोध करने की तैयारी में हैं। स्वंयसेवी शिक्षक संस्था संघ के प्रवक्ता किशन मित्तल ने बताया कि हर साल निजी स्कूलों पर भार बढ़ रहा है। एक-एक स्कूल पर साठ हजार रूपए से लेकर तीन-तीन लाख रूपए तक का सालाना भार पड़ रहा है। अब संचालक भी परेशान हो गए हैं। अब सरकार या ता फीस दे नहीं तो किसी को प्रवेश नहीं देगें। साथ ही पहले भर्ती किये गये विद्यार्थियों से भी फीस लेगें।