साइबर क्राइम: सावधान! आपके नाम पर तो नहीं चल रही फर्जी सिम... कैसे पता चलेगा? जान लें ये आसान तरीका
क्या आपके नाम पर कोई फर्जी सिम चला रहा है? चोरी हुए दस्तावेज और बायोमेट्रिक से जारी कनेक्शन का पता लगाने का ये बेहद आसान तरीका आपको हजार मुसीबतों से बचा सकता है...
विस्तार
साइबर ठग चोरी कि क्या आपके नाम पर कोई ऐसा मोबाइल नंबर चल रहा है, जिसके बारे में आपको जानकारी ही नहीं है? अगर हां, तो यह सिर्फ एक अनजान नंबर का मामला नहीं है। राजस्थान पुलिस के मुताबिक, साइबर ठग चोरी किए गए पहचान दस्तावेज, फोटो या बायोमेट्रिक डेटा का दुरुपयोग कर किसी व्यक्ति के नाम पर फर्जी सिम जारी करा सकते हैं। बाद में इसी सिम का इस्तेमाल साइबर ठगी और दूसरे अपराधों में किया जा सकता है।
राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम आउटरीच, अनुसंधान एवं नवाचार शाखा (R4C) ने इसे लेकर आमजन के लिए एडवाइजरी जारी की है। पुलिस ने लोगों से समय-समय पर यह जांचने की अपील की है कि उनके नाम पर कितने मोबाइल कनेक्शन जारी हैं।
आपके नाम की सिम से कैसे हो सकता है साइबर अपराध?
पुलिस के अनुसार, साइबर ठग फर्जी ई-केवाईसी के जरिए किसी व्यक्ति के नाम पर अतिरिक्त सिम हासिल कर सकते हैं। इसके लिए चोरी किए गए पहचान दस्तावेज या बायोमेट्रिक जानकारी का इस्तेमाल किया जा सकता है।
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इसके बाद फर्जी सिम के जरिए ऑनलाइन पेमेंट एप्लीकेशन या बैंक खातों को संचालित किया जा सकता है। साइबर ठगी से हासिल रकम इन खातों में भेजकर आगे ट्रांसफर की जा सकती है। ऐसी स्थिति में सिम जिस व्यक्ति के नाम पर है, वह भी जांच के दायरे में आ सकता है, भले ही उसे इस पूरे मामले की जानकारी न हो।
ऐसे चेक करें आपके नाम पर कितने मोबाइल नंबर हैं
राजस्थान पुलिस ने लोगों को भारत सरकार के संचार साथी पोर्टल के जरिए अपने नाम पर जारी मोबाइल कनेक्शनों की जांच करने की सलाह दी है।
स्टेप-बाय-स्टेप तरीका:
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संचार साथी पोर्टल खोलें।
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“Know Mobile Connections in Your Name” (TAF-COP) विकल्प चुनें।
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अपना मोबाइल नंबर दर्ज करें और ओटीपी से सत्यापन करें।
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आपके नाम पर जारी सभी मोबाइल कनेक्शन स्क्रीन पर दिखाई देंगे।
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सूची में मौजूद प्रत्येक नंबर को ध्यान से जांचें।
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कोई ऐसा नंबर मिले जिसे आपने जारी नहीं कराया है या जिसकी अब जरूरत नहीं है, तो उसे पोर्टल के जरिए Report/Disconnect करें।
अनजान नंबर दिखे तो तुरंत क्या करें?
अगर सूची में ऐसा मोबाइल नंबर मिलता है, जिसका आपने कभी इस्तेमाल नहीं किया, तो उसकी जानकारी तुरंत संचार साथी पोर्टल पर रिपोर्ट करें। इसके साथ संबंधित टेलीकॉम कंपनी के ग्राहक सेवा केंद्र से भी संपर्क करें।
अगर आपको लगता है कि उस नंबर का इस्तेमाल साइबर अपराध में हुआ है तो एसएमएस, स्क्रीनशॉट, ई-मेल, चैट और लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड सुरक्षित रखें। पुलिस के मुताबिक, ये चीजें जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकती हैं।
फर्जी सिम से पहले ऐसे बरतें सावधानी
राजस्थान पुलिस ने सिम और केवाईसी से जुड़ी प्रक्रिया में कुछ सावधानियां बरतने की सलाह दी है।
- सिम कार्ड केवल अधिकृत टेलीकॉम आउटलेट से ही लें।
- केवाईसी के दौरान अपना मोबाइल फोन किसी अनजान व्यक्ति को न दें।
- बिना जरूरत बार-बार बायोमेट्रिक सत्यापन न कराएं।
- ओटीपी, पिन या अन्य गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें।
- आधार, पैन जैसे पहचान दस्तावेज अनजान लोगों को न दें।
- मोबाइल और एसएमएस अलर्ट नियमित रूप से चेक करते रहें।
- सिम से जुड़े दस्तावेज और रसीद सुरक्षित रखें।
- अपने नाम पर किसी दूसरे व्यक्ति के इस्तेमाल के लिए सिम जारी न करवाएं।
पहले भी सामने आ चुका है फर्जी सिम का नेटवर्क
जयपुर में फर्जी दस्तावेजों के जरिए सिम हासिल कर साइबर अपराधियों को बेचने का मामला पहले भी सामने आ चुका है। जुलाई 2025 में साइबर क्राइम थाना पुलिस ने 19 वर्षीय युवक को गिरफ्तार किया था। उसके पास से 7 सिम कार्ड, दो फर्जी आधार कार्ड, दो खाली सिम कवर और मोबाइल फोन बरामद हुए थे। पुलिस के अनुसार आरोपी दूसरे लोगों के आधार कार्ड डाउनलोड कर उनमें अपनी फोटो लगाकर फर्जी दस्तावेज तैयार करता था और इन्हीं के जरिए सिम लेकर दूसरे लोगों को बेचता था।
संदिग्ध सिम या साइबर ठगी की स्थिति में यहां करें शिकायत
अगर आपके नाम पर फर्जी सिम जारी होने या पहचान दस्तावेज के दुरुपयोग का संदेह है तो नजदीकी पुलिस थाने या साइबर पुलिस थाने में शिकायत करें। साइबर अपराध की शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर की जा सकती है। आर्थिक साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करने की सलाह दी गई है।
राजस्थान पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे समय-समय पर अपने नाम पर जारी मोबाइल कनेक्शनों की जांच करते रहें। कोई अनजान नंबर सामने आने पर उसे नजरअंदाज करने के बजाय तत्काल रिपोर्ट करें।