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नूरा कुश्ती बना चिंतन शिविर: बस में एक ही सीट पर बैठे राहुल और गहलोत, यह पायलट के लिए माना जा रहा झटका
Fri, 13 May 2022 09:49 PM IST
उदित दीक्षित
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, उदयपुर
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, उदयपुर
Published by: उदित दीक्षित
Updated Fri, 13 May 2022 09:49 PM IST
सार
मुख्यमंत्री गहलोत को तवज्जो मिलने का संदेश पायलट गुट के लिए काफी मायने रखता है। राहुल गांधी ने गहलोत के प्रति अपनापन दिखाया है, उससे साफ संकेत है कि राजस्थान कांग्रेस में वही होगा जो गहलोत चाहेंगे। उन्हें मिली तवज्जो को सियासी तौर पर पायलट गुट के लिए झटका माना जा रहा है।
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बस में इस तरह साथ नजर आए राहुल गांधी और अशोक गहलोत।
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
राजस्थान में शुक्रवार से कांग्रेस का तीन दिवसीय चिंतन शिविर शुरू हो गया है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी समेत सभी वरिष्ठ नेता उदयपुर पहुंच गए हैं। राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राहुल गांधी का भव्य स्वागत किया।
इस दौरान राहुल और सीएम गहलोत बस में एक ही सीट पर सवार होकर होटल के लिए रवाना भी हुए। इसी बीच दोनों नेताओं के बीच कई मुद्दों पर चर्चा भी हुई। इसी दौरान राहुल ने भी सीएम को अच्छी खासी तवज्जो दी। इससे संकेत मिलते है कि गहलोत सीएम की कुर्सी पर काबिज रहेंगे। 2023 का चुनाव उनके नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा।
दरअसल, गहलोत को तवज्जो मिलने का संदेश पायलट गुट के लिए काफी मायने रखता है। राहुल गांधी ने सीएम गहलोत के प्रति अपनापन दिखाया है, उससे साफ संकेत है कि राजस्थान कांग्रेस में वही होगा जो सीएम अशोक गहलोत चाहेंगे। सीएम गहलोत को मिली तवज्जो को पायलट गुट के लिए सियासी तौर पर झटका माना जा रहा है। कांग्रेस आलाकमान का सीएम गहलोत पर भरोसा बरकरार है।
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हालांकि, पायलट गुट को उम्मीद है कि राजनीति में अनिश्चितता रहती है, लेकिन संभावनाएं कभी खत्म नहीं होती है। सीएम गहलोत ने शिविर से पहले राहुल गांधी को अध्यक्ष बनाने की मांग को फिर से दोहराया है। उन्होंने कहा, राहुल गांधी को अध्यक्ष बनाने की मांग लंबे समय से हो रही है। हर वर्ग का नेता, कार्यकर्ता और कांग्रेस की हर कमेटी के लोग यही कह रहे हैं। मैं समझता हूं कि राहुल गांधी जी को खुद अध्यक्ष बन जाना चाहिए। ये मेरा मानना है।
अमर उजाला से चर्चा में वरिष्ठ पत्रकार रशीद किदवई कहते हैं, आज राजस्थान में कांग्रेस के चिंतन शिविर का पूरा जिम्मा अशोक गहलोत ने अपने हाथों में ले रखा है। वे इसके कार्यक्रम में मेजबान की भूमिका में हैं। इसके नाते और प्रदेश के मुखिया होने के चलते उन्होंने अपने मेहमान और पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी की अगवानी की है।
फिलहाल इससे ये नतीजा नहीं निकाला जा सकता है कि 2023 के चुनाव में गहलोत चेहरा होंगे या नहीं। हालांकि, भव्य स्वागत और अच्छी व्यवस्था के जरिए उन्होंने विरोधी गुट को कई तरह के संदेश देने की कोशिश जरूर की है। ताकि, विरोधियों को एहसास दिलाया जा सके कि राज्य की सत्ता और पार्टी में उनकी पकड़ और हाईकमान का उन पर भरोसा कायम है।
राज्य में अभी नहीं होगा नेतृत्व परिवर्तन
गौरतलब है कि, कुछ दिनों पहले मीडिया के एक हिस्से में खबरें आई थी कि पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने कांग्रेस आलाकमान से समय रहते राजस्थान सरकार में नेतृत्व परिवर्तन करने की मांग की है। हालांकि, कांग्रेस ने ऐसी खबरों को आधिकारिक तौर पर मनगढ़ंत बताया था। गहलोत और पायलट राजस्थान में दो विपरीत ध्रुव के तौर पर देखे जा रहे हैं। पायलट के समर्थक नेता और विधायक समय-समय पर यह मांग करते रहे हैं कि राजस्थान सरकार की कमान सचिन पायलट को सौंपी जाए। इसे लेकर कुछ दिनों पहले पायलट ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से भी मुलाकात की थी।
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इस दौरान राहुल और सीएम गहलोत बस में एक ही सीट पर सवार होकर होटल के लिए रवाना भी हुए। इसी बीच दोनों नेताओं के बीच कई मुद्दों पर चर्चा भी हुई। इसी दौरान राहुल ने भी सीएम को अच्छी खासी तवज्जो दी। इससे संकेत मिलते है कि गहलोत सीएम की कुर्सी पर काबिज रहेंगे। 2023 का चुनाव उनके नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा।
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दरअसल, गहलोत को तवज्जो मिलने का संदेश पायलट गुट के लिए काफी मायने रखता है। राहुल गांधी ने सीएम गहलोत के प्रति अपनापन दिखाया है, उससे साफ संकेत है कि राजस्थान कांग्रेस में वही होगा जो सीएम अशोक गहलोत चाहेंगे। सीएम गहलोत को मिली तवज्जो को पायलट गुट के लिए सियासी तौर पर झटका माना जा रहा है। कांग्रेस आलाकमान का सीएम गहलोत पर भरोसा बरकरार है।
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हालांकि, पायलट गुट को उम्मीद है कि राजनीति में अनिश्चितता रहती है, लेकिन संभावनाएं कभी खत्म नहीं होती है। सीएम गहलोत ने शिविर से पहले राहुल गांधी को अध्यक्ष बनाने की मांग को फिर से दोहराया है। उन्होंने कहा, राहुल गांधी को अध्यक्ष बनाने की मांग लंबे समय से हो रही है। हर वर्ग का नेता, कार्यकर्ता और कांग्रेस की हर कमेटी के लोग यही कह रहे हैं। मैं समझता हूं कि राहुल गांधी जी को खुद अध्यक्ष बन जाना चाहिए। ये मेरा मानना है।
अमर उजाला से चर्चा में वरिष्ठ पत्रकार रशीद किदवई कहते हैं, आज राजस्थान में कांग्रेस के चिंतन शिविर का पूरा जिम्मा अशोक गहलोत ने अपने हाथों में ले रखा है। वे इसके कार्यक्रम में मेजबान की भूमिका में हैं। इसके नाते और प्रदेश के मुखिया होने के चलते उन्होंने अपने मेहमान और पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी की अगवानी की है।
फिलहाल इससे ये नतीजा नहीं निकाला जा सकता है कि 2023 के चुनाव में गहलोत चेहरा होंगे या नहीं। हालांकि, भव्य स्वागत और अच्छी व्यवस्था के जरिए उन्होंने विरोधी गुट को कई तरह के संदेश देने की कोशिश जरूर की है। ताकि, विरोधियों को एहसास दिलाया जा सके कि राज्य की सत्ता और पार्टी में उनकी पकड़ और हाईकमान का उन पर भरोसा कायम है।
राज्य में अभी नहीं होगा नेतृत्व परिवर्तन
गौरतलब है कि, कुछ दिनों पहले मीडिया के एक हिस्से में खबरें आई थी कि पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने कांग्रेस आलाकमान से समय रहते राजस्थान सरकार में नेतृत्व परिवर्तन करने की मांग की है। हालांकि, कांग्रेस ने ऐसी खबरों को आधिकारिक तौर पर मनगढ़ंत बताया था। गहलोत और पायलट राजस्थान में दो विपरीत ध्रुव के तौर पर देखे जा रहे हैं। पायलट के समर्थक नेता और विधायक समय-समय पर यह मांग करते रहे हैं कि राजस्थान सरकार की कमान सचिन पायलट को सौंपी जाए। इसे लेकर कुछ दिनों पहले पायलट ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से भी मुलाकात की थी।