ईआरसीपी पर सियासत: सीएम गहलोत ने क्यों कहा वचन निभाकर राजनीति से संन्यास लें केंद्रीय मंत्री शेखावत? यहां जानें
सीएम गहलोत ने कहा कि जलशक्ति मंत्री का कहना है कि पीएम ने अजमेर की रैली में ईआरसीपी पर एक शब्द नहीं कहा, यदि कहा है तो वो राजनीति से संन्यास ले लेंगे। प्रदेश के दो जिलों में रैली करने के दौरान पीएम मोदी ने ईआरसीपी को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा देने पर सकारात्मक रुख रखने की बात की है।
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ईस्टर्न राजस्थान कैनाल प्रोजेक्ट (ईआरसीपी) को लेकर प्रदेश में राजनीति गरमाई हुई है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से राजनीति से संन्यास लेने की मांग कर दी है। सोशल मीडिया पर दोनों नेता एक दूसरे के आमने-सामने आ गए हैं।
सीएम गहलोत ने सात जुलाई 2018 को जयपुर और छह अक्टूबर 2018 को अजमेर रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण का वक्तव्य सोशल मीडिया पर शेयर किया है। इसमें पीएम मोदी ईस्टर्न राजस्थान कैनाल प्रोजेक्ट के बारे में बात कर रहे हैं।
ये भी झूठ और झांसा था?
सीएम ने प्रदेश कांग्रेस कमेटी के ट्वीट को रिट्वीट कर केंद्रीय मंत्री पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा कि गजेंद्र सिंह शेखावत जी आपकी तस्सली के लिए... इसे ठीक से सुनिए 2018 में "पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना" (ईआरसीपी) पर प्रधानमंत्री मोदी के क्या शब्द थे! "पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना से 13 जिलों में सिंचाई और 40% आबादी को मीठा पानी मिलेगा" क्या ये भी झूठ और झांसा था?
गहलोत बोले- केंद्रीय मंत्री शेखावत वादा पूरा कराना चाहिए था
सीएम गहलोत ने ट्वीट कर कहा कि जलशक्ति मंत्री का कहना है कि पीएम ने अजमेर की रैली में ईआरसीपी पर एक शब्द नहीं कहा, यदि कहा है तो वो राजनीति से संन्यास ले लेंगे। सात जुलाई 2018 को जयपुर की रैली में प्रधानमंत्री जी ने अपने भाषण में स्पष्ट तौर पर ईआरसीपी को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा देने पर सकारात्मक रुख रखने की बात की है और छह अक्टूबर 2018 को अजमेर रैली में जयपुर का नाम लेकर अपने इस वादे को दोहराया है।
गहलोत ने कहा कि होना ये चाहिए था कि उन्हें पहले से चल रहे 16 नेशनल प्रोजेक्ट के साथ ईआरसीपी को भी 17वें नेशनल प्रोजेक्ट का दर्जा दिलवाकर पीएम के वादे को पूरा करवाना चाहिए था। वे राजस्थान से सांसद भी हैं और केंद्र में जलशक्ति मंत्री बनकर बैठे हैं। उनकी राजस्थान की अन्य परियोजनाओं में तो कोई रुचि नहीं है परंतु उनके अपने विभाग की महत्वपूर्ण परियोजना ईआरसीपी को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा दिलाने के प्रति भी कोई रुचि नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि मैं लगातार तीन वर्षों से प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी के जयपुर और अजमेर में चुनाव से पहले 13 जिलों की पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना ईआरसीपी को राष्ट्रीय परियोजना (नेशनल प्रोजेक्ट) का दर्जा देने के वादे की याद दिला रहा हूं, लेकिन अब जाकर राजस्थान से आने वाले केंद्रीय जलशक्ति मंत्री को असत्य बोलकर प्रधानमंत्री के वादे का खंडन करना याद आया। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
शेखावत का पलटवार- राजनीति करने की आदत छोड़े कांग्रेस
केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने सीएम गहलोत पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना पर राजनीति करने के लक्ष्य से गहलोत सरकार के मंत्री और स्वयं मुख्यमंत्री जी का जो व्यवहार है उसे किसी भी सूरत में सामान्य नहीं कहा जा सकता।
आम जन की भावनाओं का इस्तेमाल कर, सिर्फ राजनैतिक फायदों के लिए मांग उठाने वाले ये याद रखें कि ये मोदी सरकार है। हम जो कहते हैं वो करते हैं। ईआरसीपी पर काम होगा और केंद्र सरकार उसे पूरा करने के लिए कटिबद्ध है, लेकिन राजस्थान की गहलोत सरकार को अपनी भूमिका निभानी पड़ेगी। अपनी विफलता को छुपाने के लिए हर योजना पर राजनीति करने की आदत कांग्रेस को छोड़नी पड़ेगी, नहीं तो राजनीति उन्हें छोड़ देगी!
दरअसल, शुक्रवार को जलजीवन मिशन पर जयपुर में नौ राज्यों की रीजनल कॉन्फ्रेंस हो रही थी। केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और राजस्थान के जलदाय मंत्री महेश जोशी ईआरसीपी के मुद्दे पर भिड़ गए। मंत्री जोशी ने मोदी के वादे का जिक्र कर ईआरसीपी को राष्ट्रीय परियोजना घोषित करने की मांग की। इस पर केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि पीएम मोदी ने अजमेर में ईआरपीसी को राष्ट्रीय परियोजना घोषित करने के लिए एक शब्द भी बोला हो तो मैं राजनीति से संन्यास ले लूंगा। अगर नहीं तो मुख्यमंत्री सन्यास ले लें।