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कांग्रेस को नमो और अजहर से जीत की उम्मीद
समीर शर्मा/ अमर उजाला, जयपुर
Updated Tue, 22 Apr 2014 12:52 PM IST
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राजस्थान की बची पांच सीटों में से दो पर भाजपा की विशेष नजर है। परिसीमन के बाद से टोंक-सवाईमाधोपुर और दौसा सीट से भाजपा लगातार हार रही है।
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दौसा सीट से पिछली बार निर्दलीय प्रत्याशी जीता था और इससे पहले चुनाव में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट ने भाजपा को शिकस्त दी थी।
इधर, टोंक-सवाईमाधोपुर सीट से पिछले दोनों चुनावों में केंद्रीय मंत्री नमोनारायण मीणा ने जीत दर्ज की थी।
लेकिन कांग्रेस ने इस बार सीट बदलकर मीणा को दौसा भेजा है और टोंक-सवाईमाधोपुर सीट से भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन को मौका दिया है।
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राजस्थान की 25 में से बची पांच, टोंक-सवाईमाधोपुर, दौसा, अलवर, भरतपुर व धौलपुर-करौली लोकसभा सीटों पर मतदान 24 अप्रैल को होगा।
भाजपा ने टोंक-सवाईमाधोपुर से सुखवीर सिंह जोनापुरिया को और दौसा सीट से नमोनारायण मीणा के भाई पूर्व डीजीपी हरीश मीणा को उतारा है। भाजपा इन दोनों सीटों पर पिछली दो बार से हार का मुंह देखना पड़ रहा था।
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लेकिन इस बार मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने इन दोनों लोकसभा सीटों पर प्रभावी प्रचार अभियान छेड़ रखा है। उनकी इच्छा है कि परिसीमन के बाद से ही कमल नहीं खिला पाई भाजपा इन दोनों सीटों पर जीत का परचम फहराए।
प्रदेश वासियों के बीच इस बार के चुनाव में इन दोनों सीटों पर विशेष चर्चाएं चल रही हैं कि यहां भाजपा जीत का सिलसिला शुरू कर पाती है या नहीं।
ऐसे में ये दोनों ही सीटें कांग्रेस और भाजपा दोनों पार्टियों के लिए शक्ति परीक्षण का केंद्र बनी हुई हैं। दौसा सीट पर परिसीमन से पहले 1999 के चुनाव में कांग्रेस के दिग्गज नेता राजेश पायलट और 2004 के चुनाव में सचिन पायलट कांग्रेस के सिम्बल पर चुनाव जीते।
परिसीमन के बाद 2009 के चुनाव में यह सीट निर्दलीय के खाते में गई। भाजपा लंबे समय से इस सीट पर जीत दर्ज नहीं कर पाई है। इधर, टोंक-सवाईमाधोपुर संसदीय सीट का परिसीमन से पहले नाम सिर्फ सवाईमाधोपुर था।