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सीएम के चेहरे पर टिका राजस्थान में सत्ता का खेल
शशिधर पाठक, जयपुर
Updated Thu, 23 Aug 2018 10:36 PM IST
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Sachin Pilot, Ashok Gehlot
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परंपराओं वाले स्विंग स्टेट राजस्थान में कुछ महीने बाद राज्य विधान सभा चुनाव प्रस्तावित है। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे अपनी सरकार का इकबाल बनाने और सत्ता में लौटने की हर कोशिश कर रही हैं। प्रधानमंत्री मोदी का राजस्थान में क्रेज है, लेकिन विधानसभा चुनाव का पूरा आभामंडल सीएम के फेस पर जाकर टिक गया है। भाजपा ने भले ही मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के चेहरे पर चुनाव लड़ने का एलान कर दिया है, लेकिन टीम वसुंधरा और जनता दोनों में इसका संशय बना हुआ है। लोगों को लग रहा है कि आखिरी समय में इसमें बदलाव की संभावना है।
इसी तरह से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट कड़ी मेहनत कर रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी 2019 के पहले राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, मिजोरम के विधानसभा चुनाव के नतीजे की अहमियत भी समझ रहे हैं। इसी को केंद्र में रखकर राहुल गांधी ने वरिष्ठ नेता सीपी जोशी, गिरजा व्यास, अशोक गहलोत, भँवर जितेंद्र सिंह समेत अन्य को जमीनी तैयारी में जुटने का निर्देश दे दिया है। लेकिन आम जन के बीच में सीएम फेस को लेकर सचिन पायलट और अशोक गहलोत में भ्रम बना हुआ है। लोगों के बीच में सचिन पायलट की तुलना में अशोक गहलोत की छवि अधिक भारी है, लेकिन कांग्रेस ने फिलहाल मुख्यमंत्री के चेहरे को घोषित न करके चुनाव में उतरने का मन बनाया है।
मोदी के साथ, वसुंधरा के खिलाफ
राज्य में वसुंधरा राजे की सरकार के खिलाफ सरकार विरोधी लहर है, लेकिन जनता प्रधानमंत्री मोदी के साथ खड़ी है। वहीं वसुंधरा के सामने राजनीतिक अस्तित्व का संकट है। इसलिए वसुंधरा अपने अस्तित्व से कोई समझौता न करने के मूड में हैं। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री का मानना है कि इसके चलते लड़ाई काफी चुनौतीभरी है। भाजपा नेताओं को उम्मीद है कि चुनाव तक इस स्थिति में। बदलाव हो सकता है। वहीं टीम वसुंधरा राज्य में भावी सीएम के चेहरे में कोई बदलाव न होने के लिए अडिग है।
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इसी तरह से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट कड़ी मेहनत कर रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी 2019 के पहले राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, मिजोरम के विधानसभा चुनाव के नतीजे की अहमियत भी समझ रहे हैं। इसी को केंद्र में रखकर राहुल गांधी ने वरिष्ठ नेता सीपी जोशी, गिरजा व्यास, अशोक गहलोत, भँवर जितेंद्र सिंह समेत अन्य को जमीनी तैयारी में जुटने का निर्देश दे दिया है। लेकिन आम जन के बीच में सीएम फेस को लेकर सचिन पायलट और अशोक गहलोत में भ्रम बना हुआ है। लोगों के बीच में सचिन पायलट की तुलना में अशोक गहलोत की छवि अधिक भारी है, लेकिन कांग्रेस ने फिलहाल मुख्यमंत्री के चेहरे को घोषित न करके चुनाव में उतरने का मन बनाया है।
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मोदी के साथ, वसुंधरा के खिलाफ
राज्य में वसुंधरा राजे की सरकार के खिलाफ सरकार विरोधी लहर है, लेकिन जनता प्रधानमंत्री मोदी के साथ खड़ी है। वहीं वसुंधरा के सामने राजनीतिक अस्तित्व का संकट है। इसलिए वसुंधरा अपने अस्तित्व से कोई समझौता न करने के मूड में हैं। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री का मानना है कि इसके चलते लड़ाई काफी चुनौतीभरी है। भाजपा नेताओं को उम्मीद है कि चुनाव तक इस स्थिति में। बदलाव हो सकता है। वहीं टीम वसुंधरा राज्य में भावी सीएम के चेहरे में कोई बदलाव न होने के लिए अडिग है।
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क्या हो तो बदले राजस्थान
Vasundhara Raje
कौन है सीएम का सर्वोत्तम चेहरा
राजस्थान के बाड़मेर, बीकानेर, जैसलमेर, उदयपुर, जोधपुर, जयपुर, अलवर, भरतपुर तक की यात्रा के दौरान अशोक गहलोत जनता और राज्य सरकार के अधिकारियों की पहली पसंद बने हैं। वहीं, वसुंधरा के मुकाबले में आम लोगों और अधिकारियों को भाजपा में कोई चेहरा नहीं दिखता। केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, गजेंद्र सिंह शेखावत समेत अन्य को वसुंधरा के मुकाबले स्थानीय चेहरा मानती है। भाजपा अध्यक्ष मदन लाल सानी, भूपेंद्र यादव, ओम माथुर की इमेज भी वसुंधरा के आगे कोई ठोस आधार नहीं बना रही है। दिलचस्प यह भी है कि प्रधानमंत्री मोदी, भाजपा अध्यक्ष शाह की वसुंधरा से अच्छा तालमेल न होने की जानकारी से जनता, अधिकारी, टीचर, प्रोफेशनल्स परिचित हैं।
क्या हो तो बदले राजस्थान
कांग्रेस अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित कर दे। या फिर राजस्थान में भाजपा एक नेता छवि पर स्टैंड करने का भरोसा बनाए। हालांकि कांग्रेस और भाजपा सत्ता में वापसी के लिए अपने एजेंडे पर काम कर रही है। कांग्रेस ने प्रदेश सचिन पायलट के साथ साथ क्षेत्रवार नेताओं को जिम्मेदारी देकर राजनीतिक अभियान तेज कर दिया है। इसके सामानांतर भाजपा वसुंधरा के नेतृत्व में गौरव सुराज यात्रा आरंभ कर चुकी है। क्षेत्रवार अपने नेताओं को इसे सफल बनाने, प्रचार अभियान को तेज करने की जिम्मेदारी सौंप दी है। यात्रा चल रही है और पन्ना प्रमुख, बूथ प्रबंधकों की तैयारी, मीटिंग, ट्रेनिंग सब चल रही है।
राजस्थान के बाड़मेर, बीकानेर, जैसलमेर, उदयपुर, जोधपुर, जयपुर, अलवर, भरतपुर तक की यात्रा के दौरान अशोक गहलोत जनता और राज्य सरकार के अधिकारियों की पहली पसंद बने हैं। वहीं, वसुंधरा के मुकाबले में आम लोगों और अधिकारियों को भाजपा में कोई चेहरा नहीं दिखता। केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, गजेंद्र सिंह शेखावत समेत अन्य को वसुंधरा के मुकाबले स्थानीय चेहरा मानती है। भाजपा अध्यक्ष मदन लाल सानी, भूपेंद्र यादव, ओम माथुर की इमेज भी वसुंधरा के आगे कोई ठोस आधार नहीं बना रही है। दिलचस्प यह भी है कि प्रधानमंत्री मोदी, भाजपा अध्यक्ष शाह की वसुंधरा से अच्छा तालमेल न होने की जानकारी से जनता, अधिकारी, टीचर, प्रोफेशनल्स परिचित हैं।
क्या हो तो बदले राजस्थान
कांग्रेस अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित कर दे। या फिर राजस्थान में भाजपा एक नेता छवि पर स्टैंड करने का भरोसा बनाए। हालांकि कांग्रेस और भाजपा सत्ता में वापसी के लिए अपने एजेंडे पर काम कर रही है। कांग्रेस ने प्रदेश सचिन पायलट के साथ साथ क्षेत्रवार नेताओं को जिम्मेदारी देकर राजनीतिक अभियान तेज कर दिया है। इसके सामानांतर भाजपा वसुंधरा के नेतृत्व में गौरव सुराज यात्रा आरंभ कर चुकी है। क्षेत्रवार अपने नेताओं को इसे सफल बनाने, प्रचार अभियान को तेज करने की जिम्मेदारी सौंप दी है। यात्रा चल रही है और पन्ना प्रमुख, बूथ प्रबंधकों की तैयारी, मीटिंग, ट्रेनिंग सब चल रही है।