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राजस्थान और तेलंगाना में थमा चुनाव प्रचार, अब मोदी, शाह, राहुल की अग्निपरीक्षा
शशिधर पाठक, अमर उजाला
Updated Wed, 05 Dec 2018 09:04 PM IST
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राजस्थान और तेलंगाना में चुनाव प्रचार खत्म
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राजस्थान और तेलंगाना में प्रचार का शोर थम गया है। यहां सात दिसंबर को मतदान होना है। पांच राज्यों का यह चुनाव 2019 के लोकसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना जा रहा है। हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले की तुलना में खुद को चुनाव प्रचार से दूर रखा है, लेकिन इसके बाद भी उनकी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की प्रतिष्ठा दांव पर है।
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मोदी ने किया कम प्रचार
बिहार, उत्तर प्रदेश , गुजरात, कर्नाटक जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की तुलना में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पांच राज्यों में अपेक्षाकृत काफी कम जोर लगाया। प्रधानमंत्री मोदी के मंत्रिमंडलीय सहयोगियों ने भी अपेक्षाकृत प्रचार में कम समय दिया। वहीं भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने न केवल पार्टी की पूरी ताकत झोंक दी, बल्कि चुनाव प्रचार, रोड शो, जनसभा के मामले में सब पर भारी पड़े। पांचों राज्यों में प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह के बाद योगी आदित्यनाथ भाजपा के सबसे प्रमुख स्टार प्रचारक बने रहे। शाह ने पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव प्रचार के क्रम में दो महीने में करीब 68 हजार किमी. की यात्रा, 68 जनसभा, एक दर्जन से अधिक रोड-शो, दर्जन भर से अधिक संवाद कांर्यक्रम किए।
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प्रधानमंत्री मोदी ने करीब 26 जनसभाएं कीं। इनमें सबसे अधिक 12 राजस्थान में ही कीं। इसके समानांतर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने करीब 73 जनसभा, एक दर्जन रोड शो और इसी के आसपास संवाद कार्यक्रम किया। राजस्थान में केन्द्र सरकार के करीब डेढ़ दर्जन से अधिक मंत्री भी प्रचार में सक्रिय दिखाई दिए। कमोबेश यही स्थिति मध्य प्रदेश में भी थी। भाजपा के बरअक्स कांग्रेस ने भी राज्यों में सत्ता परिवर्तन के लिए पूरी ताकत झोंक दी। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भाजपा के हिन्दुत्व का जवाब कांग्रेस के सॉफ्ट हिन्दुत्व की नीति से देना जारी रखा। वह लगातार मंदिर दर्शन के लिए भी जाते रहे और खुद की जाति ब्राह्मण (कश्मीरी कौल) और गोत्र दत्तात्रेय बताया। इतना ही नहीं पार्टी अपने सभी प्रभावशाली नेताओं को इसके बाबत बाकायदा जिम्मेदारी बांट रखी थी।
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अब बूथ प्रबंधन का समय
बृहस्पतिवार छह दिसंबर का दिन भाजपा के लिए अहम है। छह दिसंबर 1992 को ही अयोध्या में विवादित ढांचा जमीदोंज हुआ था। इसको लेकर भी एक संदेश देने की तैयारी हो रही है। भाजपा ने राजस्थान में अपने सभी जिलाध्यक्षों को बूथ कोआर्डिनेटर के साथ तालमेल बनाकर मतदान प्रक्रिया में जी जान से जुट जाने के लिए कहा है। पांच दिसंबर से छह दिसंबर देर रात तक का समय पार्टी के नेता बूथ प्रबंधकों, बूथ संचालकों, पन्ना प्रमुखों के लिए दे रहे हैं। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की हमेशा से कोशिश रही है कि मतदान के पहले की बूथ स्तरीय सक्रियता, मतदाताओं के घर-घर तक पर्ची पहुंचाने, उनसे बार-बार के संपर्क के जरिए काफी कुछ पक्ष में किया जा सकता है।
ईवीएम की रखवाली में जुटे कांग्रेस कार्यकर्ता
कांग्रेस पार्टी ने भी काफी सतर्कता दिखाई है। बूथ स्तर पर तैयारी को इस बार कफी दुरुस्त किया है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, तेलंगाना और मिजोरम में इसको लेकर काफी कोशिश हुई है। माना जा रहा है कि राजस्थान और तेलंगाना में सात दिसंबर को होने वाले मतदान में यह सक्रियता साफ नजर आएगी। मध्य प्रदेश में कांग्रेस के कार्यकर्ता ईवीएम की रखवाली तक कर रहे हैं और पहले की तुलना में काफी सतर्क और आक्रामक हैं।
तेलंगाना में कांग्रेस पार्टी वामदल और टीडीपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है। भाजपा ने भी पूरा जोर लगाया है। असदुद्दीन ओवैसी और तेलंगाना राष्ट्रसमिति (टीआरएस)के प्रमुख के चंद्रशेखर राव के लिए भी यह चुनाव काफी अहम है। यहां मुख्य मुकाबला टीआरएस बनाम कांग्रेस का है।
भाजपा बनाम कांग्रेस का अनुशासन
पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा और कांग्रेस का अनुशासन भी चौकाने वाला तथ्य लेकर आया। कांग्रेस ने पार्टी में भितरघात और बागियों पर काफी हद तक पकड़ बनाने में सफलता पाई। नाराज नेताओं को मनाने में काफी हद तक सफल रही। मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में उसे इसमें बड़ी कामयाबी मिली। इसके समानांतर अनुशासन और पार्टी पर पकड़ के मामले में मजबूती के साथ चल रही भाजपा को बागियों ने तंग किया है। यह स्थिति करीब-करीब हर राज्य में रही, लेकिन भाजपा के नेताओं का आपसी तालमेल कांग्रेस पार्टी के नेताओं से कहीं बेहतर दिखाई दिया।
जो जीता वहीं सिकंदर
पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव प्रचार में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सीधा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राज्यों की भाजपा सरकार पर हमला बोला है। राहुल के सामने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का चुनावी चक्रव्यूह भेदना सबसे बड़ी चुनौती है। वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले चुनावों के मुकाबले इस बार काफी कम सक्रियता दिखाई है। भाजपा के नेता प्रधानमंत्री द्वारा कम समय देने को भी रणनीति के तहत लिया गया निर्णय बता रहे हैं। भाजपा ने पांच राज्यों का विधानसभा चुनाव प्रधानमंत्री मोदी को आगे करके लड़ने की बजाय इस बार अपने क्षेत्रीय क्षत्रपों के सहारे लड़ने की रणनीति को आगे बढ़ाया है। कमोबेश यही स्थिति कांग्रेस की भी रही, लेकिन फिर भी 2019 के लोकसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री मोदी की साख दांव पर है।
तेलंगाना में कांग्रेस पार्टी वामदल और टीडीपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है। भाजपा ने भी पूरा जोर लगाया है। असदुद्दीन ओवैसी और तेलंगाना राष्ट्रसमिति (टीआरएस)के प्रमुख के चंद्रशेखर राव के लिए भी यह चुनाव काफी अहम है। यहां मुख्य मुकाबला टीआरएस बनाम कांग्रेस का है।
भाजपा बनाम कांग्रेस का अनुशासन
पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा और कांग्रेस का अनुशासन भी चौकाने वाला तथ्य लेकर आया। कांग्रेस ने पार्टी में भितरघात और बागियों पर काफी हद तक पकड़ बनाने में सफलता पाई। नाराज नेताओं को मनाने में काफी हद तक सफल रही। मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में उसे इसमें बड़ी कामयाबी मिली। इसके समानांतर अनुशासन और पार्टी पर पकड़ के मामले में मजबूती के साथ चल रही भाजपा को बागियों ने तंग किया है। यह स्थिति करीब-करीब हर राज्य में रही, लेकिन भाजपा के नेताओं का आपसी तालमेल कांग्रेस पार्टी के नेताओं से कहीं बेहतर दिखाई दिया।
जो जीता वहीं सिकंदर
पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव प्रचार में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सीधा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राज्यों की भाजपा सरकार पर हमला बोला है। राहुल के सामने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का चुनावी चक्रव्यूह भेदना सबसे बड़ी चुनौती है। वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले चुनावों के मुकाबले इस बार काफी कम सक्रियता दिखाई है। भाजपा के नेता प्रधानमंत्री द्वारा कम समय देने को भी रणनीति के तहत लिया गया निर्णय बता रहे हैं। भाजपा ने पांच राज्यों का विधानसभा चुनाव प्रधानमंत्री मोदी को आगे करके लड़ने की बजाय इस बार अपने क्षेत्रीय क्षत्रपों के सहारे लड़ने की रणनीति को आगे बढ़ाया है। कमोबेश यही स्थिति कांग्रेस की भी रही, लेकिन फिर भी 2019 के लोकसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री मोदी की साख दांव पर है।