बूंदी: गुडला स्टेशन पर हादसे का सायरन बजा तो मचा हड़कंप, दौड़ीं SDRF की टीमें; फिर सामने आया पूरा मामला
बूंदी के गुडला रेलवे स्टेशन के पास मालगाड़ी और यात्री ट्रेन की टक्कर की सूचना से अचानक हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही प्रशासन, पुलिस, चिकित्सा विभाग, एसडीआरएफ और सिविल डिफेंस की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत-बचाव अभियान शुरू किया।
विस्तार
गुडला रेलवे स्टेशन के पास अचानक आपातकालीन सायरन बजने और मालगाड़ी व यात्री ट्रेन की टक्कर की सूचना से कुछ देर के लिए हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही प्रशासन, पुलिस, चिकित्सा विभाग और आपदा राहत से जुड़ी टीमें सक्रिय हो गईं। कुछ ही समय में अलग-अलग विभागों के दल मौके पर पहुंचे और राहत एवं बचाव अभियान शुरू कर दिया। हालांकि, यह कोई वास्तविक रेल हादसा नहीं था। रेलवे की ओर से बड़े रेल हादसे की स्थिति में तैयारियों को परखने के लिए यहां मॉकड्रिल आयोजित की गई थी।
अभ्यास के दौरान ट्रेन दुर्घटना का काल्पनिक दृश्य तैयार किया गया। इसमें मालगाड़ी और यात्री ट्रेन की टक्कर के बाद कई यात्रियों के घायल होने और कुछ के कोच में फंसे होने की स्थिति बनाई गई, ताकि वास्तविक आपात स्थिति में राहत और बचाव व्यवस्था की तैयारियों को जांचा जा सके।
हादसे की सूचना मिलते ही सक्रिय हुआ प्रशासन
आपदा प्रबंधन एवं बाढ़ नियंत्रण केंद्र प्रभारी सत्यवान शर्मा के अनुसार, मॉकड्रिल के तहत मालगाड़ी और यात्री ट्रेन के बीच टक्कर होने की सूचना प्रसारित की गई थी। सूचना मिलते ही जिला कलेक्टर हरफुल सिंह यादव के निर्देश पर संबंधित विभागों को अलर्ट किया गया।
केशोरायपाटन क्षेत्र के प्रशासनिक अधिकारी, तालेड़ा और बूंदी से बचाव दल, पुलिस, चिकित्सा विभाग, एसडीआरएफ और सिविल डिफेंस की टीमें गुडला रेलवे स्टेशन के पास पहुंचीं। सभी टीमों ने मौके पर पहुंचते ही अपनी जिम्मेदारियों के अनुसार राहत और बचाव की कार्रवाई शुरू कर दी।
फंसे यात्रियों को बाहर निकालने का किया अभ्यास
मॉकड्रिल के दौरान दुर्घटनाग्रस्त कोच में यात्रियों के फंसे होने की स्थिति बनाई गई। बचाव दल ने विभिन्न उपकरणों की मदद से घायलों को बाहर निकालने की प्रक्रिया का अभ्यास किया। इसके बाद घायलों को प्राथमिक उपचार देने और जरूरत पड़ने पर अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था भी परखी गई।
अभ्यास के दौरान यह भी देखा गया कि हादसे की सूचना मिलने के बाद अलग-अलग विभागों के बीच किस तरह तेजी से सूचना का आदान-प्रदान होता है और राहत कार्य के दौरान आपसी समन्वय कितना प्रभावी रहता है।
वास्तविक हादसे की स्थिति में तैयारियों की जांच
मॉकड्रिल का मुख्य उद्देश्य किसी वास्तविक रेल दुर्घटना की स्थिति में प्रशासन और बचाव एजेंसियों की तत्काल प्रतिक्रिया को परखना था। इसके साथ ही उपलब्ध संसाधनों, उपकरणों, कर्मचारियों और विभिन्न विभागों के बीच तालमेल की भी जांच की गई।
अभ्यास के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की गई कि आपात स्थिति में राहत और बचाव अभियान कितनी तेजी से शुरू किया जा सकता है। साथ ही संभावित कमियों को चिन्हित कर भविष्य में व्यवस्था को और बेहतर बनाने पर जोर दिया गया।
समय-समय पर होती है ऐसी कवायद
रेलवे की ओर से आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की तैयारियों को मजबूत करने के लिए समय-समय पर इस तरह की मॉकड्रिल आयोजित की जाती है। इसका उद्देश्य संबंधित विभागों और बचाव एजेंसियों को वास्तविक हादसे के दौरान तुरंत सक्रिय करने तथा बिना देरी के प्रभावी राहत एवं बचाव अभियान चलाने के लिए तैयार रखना है।