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होली महोत्सव: पुष्कर में साकार हुई ब्रज की लट्ठमार और फूलों की होली, हरिहरन के गीतों पर झूमे श्रोता

Tue, 07 Mar 2023 04:27 PM IST
अर्पित याज्ञनिक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुष्कर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुष्कर Published by: अर्पित याज्ञनिक Updated Tue, 07 Mar 2023 04:27 PM IST
सार

अंतरराष्ट्रीय होली महोत्सव में सोमवार को ब्रज की लट्ठमार और फूलों की होली साकार हुई। साथ ही पद्म श्री हरिहरन के भजनों पर श्रद्धालु भाव प्रवणता के साथ झूमे।

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Braj's Lathmar and Holi of flowers came true in Pushkar
अंतरराष्ट्रीय होली महोत्सव - फोटो : Amar Ujala Digital

विस्तार

अंतरराष्ट्रीय होली महोत्सव में सोमवार को ब्रज की लट्ठमार और फूलों की होली साकार हुई। राजस्थान पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष धर्मेन्द्र राठौड़ ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय होली महोत्सव को विश्व प्रसिद्ध बनाने और इसमें चार चांद लगाने में जिला प्रशासन, गणमान्य नागरिकों, जनप्रतिनिधियों एवं प्रसिद्ध कलाकारों ने अपना अमूल्य योगदान दिया।

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उन्होंने कहा कि होलिका दहन पर आज हमने सारे पापों की होली पुष्कर में जला दी है। झूठ, कपट, द्वेष, क्रोध, धोखाधड़ी जैसे पापों की होली जलाकर जिस तरह भक्तराज प्रहलाद की अच्छाई प्रकट हुई। आज हममें भी प्यार,अमन, चैन, सौहार्द की भावनाएं प्रकट हुई हैं। पुष्कर के स्थानीय विधायक सुरेश सिंह रावत ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय पुष्कर होली महोत्सव को विख्यात करने में विभिन्न लोगों ने अपना अमूल्य समय एवं योगदान दिया है। हमें राजनीति से ऊपर उठकर तीर्थराज पुष्कर के विकास के लिए हर संभव प्रयास करने चाहिए।
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पद्मश्री हरिहरन ने भजनों के माध्यम से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। गणेश वंदना विघ्नेश्वराय के साथ उन्होंने अपना म्यूजिक कंसर्ट आरंभ किया। ओम नमः शिवाय, इस धरती,  सुबह-सुबह ले शिव, राधे गोविंद गोपाला जैसे भजनों से समां बांध दिया। केसरिया बालम आवो नी पधारो म्हारे देश सुनाकर राजस्थानी परंपरा को जीवंत कर दिया। म्यूजिक कंसर्ट में दौड़ा दौड़ा, धीमे-धीमे, रोजा जानेमन, बाहों के दरमियां, चप्पा चप्पा तथा  तू ही रे गीत गाए। इसमें चंद्रैया भट्टाचार्य, लावण्या पद्मनाभ और अक्षय ने साथ दिया।

Braj's Lathmar and Holi of flowers came true in Pushkar
अंतरराष्ट्रीय होली महोत्सव - फोटो : Amar Ujala Digital
ब्रज की होली को रंग रसिया के रूप में प्रस्तुत किया
ब्रज की संस्कृति और विरासत पर कार्य कर रहे भारतीय कला संस्थान से संबंधित ब्रज लोक कला मंच के कलाकारों ने अशोक शर्मा के निर्देशन में ब्रज की होली को रंग रसिया के रूप में प्रस्तुत किया। ब्रज के प्रभु श्री कृष्ण का जैसे आगमन पुष्कर में हो गया हो। मंगलाचरण आरती में राधा और कृष्ण के स्वरूप को प्रत्यक्ष किया गया। धाम वंदना पर भक्ति का सैलाब आ गया। ब्रज की प्रसिद्ध लट्ठमार होली में गोपियों ने ग्वालों और श्री कृष्ण के साथ होली खेली। फूलों की होली में पुष्प वर्षा हुई। श्री कृष्ण रूप ने दर्शक दीर्घा में फूलों की होली खेली गई। बेहतरीन नृत्य संयोजन तृप्ति द्विवेदी का था। भारतीय कला संस्थान ब्रज की लुप्त होती 34 विधाओं के संरक्षण और संवर्धन का कार्य कर रहा है। इनके 300 से अधिक कलाकारों ने देश-विदेश में ब्रज कलाओं को नया आयाम दिया है। वहीं कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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