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BJP: अल्पसंख्यक मोर्चा कल जयपुर में सरकार के खिलाफ निकालेगा विरोध मार्च, पूनिया होंगे शामिल, 25 मांगें गिनाईं
Wed, 08 Feb 2023 11:06 PM IST
उदित दीक्षित
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: उदित दीक्षित
Updated Wed, 08 Feb 2023 11:06 PM IST
सार
भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा राजस्थान प्रदेशाध्यक्ष एम. सादिक़ खान ने सीएम अशोक गहलोत पर 4 साल के कार्यकाल में अल्पसंख्यकों की उपेक्षा करने के आरोप लगाए हैं। साथ ही 9 फरवरी को जयपुर में विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है।
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बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा प्रदेशाध्यक्ष एम. सादिक खान ने जयपुर में प्रेसवार्ता की।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा प्रदेशाध्यक्ष एम. सादिक खान ने बुधवार को जयपुर में प्रेसवार्ता कर कहा- मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अल्पसंख्यक समाज का ध्यान ना भटकाएं, बल्कि मुद्दों पर बात करें। गहलोत कहते हैं कि प्रदेश का अल्पसंख्यक समाज 95 प्रतिशत वोट कांग्रेस को देता है और कांग्रेस ही अल्पसंख्यक समाज की सबसे बड़ा हिमायती और फिक्र करने वाली पार्टी है। गहलोत बताएं कि उन्होंने अपने 4 साल के शासनकाल में अल्पसंख्यक समाज को दरकिनार क्यों किया और उनके हितों के लिए क्या काम किया ?
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सादिक खान ने कहा- 4 सालों में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अल्पसंख्यक समाज से वादाखिलाफी की है और अपने चुनावी घोषणा पत्र में किए वादों पर भी कांग्रेस सरकार खरी नहीं उतर पाई है। अल्पसंख्यक समाज से जुड़े कई मुद्दों को लेकर भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा गुरुवार 9 फरवरी को बीजेपी मुख्यालय से 22 गोदाम सर्किल तक विरोध मार्च निकालेगा। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया के नेतृत्व में यह विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
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इन मुद्दों पर बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा कर रहा कांग्रेस सरकार का विरोध
1. जयपुर शहर में अल्पसंख्यक बालक छात्रावास भवन निर्माण का उद्घाटन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की ओर से करने के बावजूद दो बार भू-आवंटन रद्द कर दिया गया और आज तक छात्रावास नहीं बन पाया।
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2. भीलवाड़ा की पूर वाली मस्जिद के मामले में राज्य सरकार कोर्ट में रिव्यू पिटिसन में नहीं जा पाई और वक्फ बोर्ड यह केस हार गया।
3. भरतपुर जिले में कामां और नगर विधानसभा में स्थानीय विधायकों की तरफ से भाजपा कार्यकर्ताओं पर झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं, जिन्हें रोका जाए।
4. चुनावी घोषणा पत्र में वादे के बावजूद भी बेरोजगारों के साथ एक बार फिर धोखा किया गया। जबकि चिकित्सा निदेशालय ने 582 यूनानी चिकित्सकों की भर्ती की आवश्यकता राज्य सरकार को बताई।
5. राज्यभर में असिस्टेंट प्रोफेसर उर्दू के कुल 28 पद रिक्त हैं, लेकिन 18 दिसम्बर, 2020 को जारी होने वाले भर्ती विज्ञापन में महज 5 पदों को शामिल किया गया,जो कतई न्यायोचित नहीं है। पिछली सरकार में कॉलेज व्याख्याता भर्ती 2014-15 में कॉलेज व्याख्याता उर्दू के कुल 22 पद रिक्त थे और सभी 22 पदों पर भर्ती हुई थी।
6. आर.पी.एस.सी. के गठन और नियुक्तियों के समय में भी अल्पसंख्यक समाज की अनदेखी की गई।
7. मुख्यधारा की नियुक्तियों में अल्पसंख्यक समाज को पूरी तरह दरकिनार किया गया।
8.मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने 14 साल के शासनकाल में अन्य प्रशासनिक सेवाओं से भारतीय प्रशासनिक सेवाओं में अधिकारी बनाए जाने को लेकर अल्पसंख्यक समाज को बिल्कुल दरकिनार किया।
9. 2013-14 बजट के बिन्दु संख्या 92 के अनुसार प्रदेश के प्रत्येक जिला मुख्यालय और अल्पसंख्यक बाहुल्य 23 विकास खण्डों में अल्पसंख्यक समुदाय के बालक-बालिकाओं के लिए अलग अलग छात्रावास खोले जाने थे। जिसके लिए साल 2013-14 में 56 करोड़ रुपए का प्रावधान प्रस्तावित था। इसके एलेव अल्पसंख्यक बाहुल्य क्षेत्रों में 20 उच्च माध्यमिक आवासीय विद्यालय खोलना भी प्रस्तावित है, जिन पर लगभग 150 करोड़ रुपए की लागत आएगी, यह घोषणा की गई, लेकिन इसका पूरा इम्प्लीमेंटेशन नहीं हुआ।
10.2 अक्टूबर, 2013 को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मौलाना आजाद यूनिवर्सिटी, जोधपुर के फाउंडेशन के समय 10 करोड़ रुपए देने की बात कही थी, लेकिन वह राशि अभी तक नहीं मिली है।
11.मदरसा पैराटीचर को नियमित करने की मांग को लेकर कोई समाधान नहीं निकाला गया। जबकि 6000 टीचर हैं, लेकिन ना तो इनका पेमेंट समय पर मिल रहा है, ना कोई ट्रांसफर हो रहा है, ना नियमित होने के लिए कुछ भी हो रहा है।
12.सरकारी विद्यालयों में उर्दू अध्यापकों की नियुक्ति नहीं हुई। अभी तक किसी भी सरकारी विद्यालय में उर्दू का सिलेबस नहीं पहुंचा है, जिससे अल्पसंख्यक वर्ग नाराज है और मदरसों में भी अभी तक यूनिफार्म की व्यवस्था नहीं है।
13.राजस्थान विधानसभा चुनाव-2018 के कांग्रेस जन घोषणा पत्र में अल्पसंख्यक कल्याण के बिन्दु संख्या 22.2 अल्पसंख्यक मामलात और अल्पसंख्यक समुदाय विभाग से सम्बन्धित योजनाओं के क्रियान्वयन से सम्बन्धित विभागों के बीच समन्वय और योजनाओं की बेहतर मॉनिटरिंग के लिए राज्य स्तर पर एक विशेष प्रकोष्ठ बनाने की घोषणा की गई थी, लेकिन प्रदेश में अभी तक विशेष प्रकोष्ठ का गठन नहीं किया गया है, जिससे अल्पसंख्यकों की योजनाओं की प्रभावी ढंग से माॅनिटरिंग नहीं हो पा रही है।
14.जन घोषणा पत्र 2018 के बिन्दु संख्या 22.3 के अनुसार अल्पसंख्यक समुदाय के विकास में रह गई कमियों का पता लगाने और उनके समाधान के लिए प्रत्येक जिला स्तर और पंचायत समिति स्तर पर निर्वाचित जनप्रतिनिधियों, अल्पसंख्यक समुदाय के प्रतिनिधियों, सरकारी एजेंसियों को मिलाकर समितियां बनाना और समिति के चिन्ह्ति मुद्दों पर विशेष कार्यवाही की घोषणा की गई थी, लेकिन अभी तक इस बिन्दु की भी क्रियान्विति प्रदेश में नहीं हुई है।
15.जन घोषणा पत्र 2018 के बिन्दु संख्या 22.4 के अनुसार सभी मदरसों में कम्प्यूटरों की संख्या बढ़ाते हुए इंटरनेट कनेक्शन लगाने की घोषणा की थी, लेकिन प्रदेश के कुल 3240 मदरसों में से 296 मदरसों को ही कम्प्यूटर उपलब्ध करवाए गए।जिनमें भी इंटरनेट कनेक्शन नहीं लगाया गया है। इस घोषणा की भी पूर्ण क्रियान्विति नहीं हुई है।
16.साल 2013-14 की बजट घोषणा में प्रत्येक जिला मुख्यालय पर बालक और बालिकाओं के अलग-अलग छात्रावास खोले जाने का प्रावधान किया था, लेकिन कुछ जिलों को छोड़कर अधिकांश जिलों में छात्रावासों का निर्माण नहीं हो पाया है। इसलिए वंचित जिलों में छात्रावास निर्माण का बजट उपलब्ध करवाया जाए।
17. राजस्थान अल्पसंख्यक वित्त और विकास सहकारी निगम की तरफ से अल्पसंख्यकों को कारोबारी और शिक्षा लोन उपलब्ध करवाया जाता है, लेकिन एन.एम.डी.एफ.सी. निगम को बहुत ही कम राशि उपलब्ध करवाती है, जिससे प्रदेश के अल्पसंख्यकों को इस योजना का लाभ पर्याप्त नहीं मिल रहा है।
18. 2020-21 में कांग्रेस सरकार की लागू की गई मुख्यमंत्री लघु उद्योग प्रोत्साहन योजना में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की गाइड लाइन अनुसार 15 प्रतिशत लक्ष्य अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षित किए जाने चाहिए, जिससे अल्पसंख्यक इस योजना का लाभ उठाकर अपने आर्थिक स्तर को बढ़ा सके।
19. अल्पसंख्यक विभाग में मदरसा बोर्ड सचिव, निदेशालय में उपनिदेशक, हज कमेटी, वक्फ बोर्ड में मुख्य कार्यकारी अधिकारी , अल्पसंख्यक आयोग के सचिव के पद भरने के लिए राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अधिकारी का केडर लागू किया गया है, इन अधिकारियों को अल्पसंख्यक समुदाय की योजनाओं की पर्याप्त जानकारी नहीं होने और बार-बार ट्रांसफर होने से योजनाओं का इम्प्लीमेंटेशन और मॉनिटरिंग प्रभावी ढंग से नहीं हो पाते। इसलिए इन पदों को समकक्ष राज्य सेवा के अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति से भरा जाए और अल्पसंख्यक अधिकारियों को प्राथमिकता दी जाए।
20. साल 2013-14 बजट के बिन्दु संख्या 97 के अनुसार अल्पसंख्यक समुदाय के व्यक्तियों को निवास और हस्तशिल्प उत्पादों के निर्माण-मार्केटिंग की सुविधा देने के उद्देश्य से जयपुर की तर्ज पर, जोधपुर में भी अगले साल दस्तकार नगर बनाना प्रस्तावित था, लेकिन अभी तक जोधपुर में दस्तकार नगर स्थापित नहीं हुआ है।
21. साल 2013-14 बजट के बिन्दु संख्या 98 के अनुसार अल्पसंख्यक वर्गों और अल्पसंख्यक क्षेत्रों के विकास के लिए विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए साल 2013-14 में 200 करोड़ रुपए के अंशदान से अल्पसंख्यक विभाग कोष के गठन की घोषणा की थी। इस घोषणा की भी क्रियान्विति अभी तक अपेक्षित है।
22. प्रदेश में 3240 मदरसे मदरसा बोर्ड से पंजीकृत हैं, इन मदरसों में अधिकांश मदरसा शिक्षा सहयोगी नहीं होने से बन्द पड़े हैं और जो मदरसे संचालित है, उनमें अधिकांश मदरसों में एक शिक्षा सहयोगी ही कार्यरत है, जिससे अल्पसंख्यक छात्र-छात्राओं को गुणवतापूर्ण शिक्षा प्राप्त नहीं हो रही है। प्रत्येक मदरसे में कम्प्यूटर शिक्षक और मदरसा शिक्षा सहयोगी की नियुक्ति की जाए।
23.केन्द्र सरकार की घुमन्तु सूची में कलंदर, मीरासी, फकीर जातियां भी घूमन्तु श्रेणी में आती हैं, लेकिन राजस्थान सरकार की घुमन्तु श्रेणी में उनका नाम नहीं है। सरकार उनका नाम भी सूची में जोड़े।
24. राज्य सरकार की विभिन्न ऋण योजनाओं में से अल्पसंख्यक वर्ग के कितने जरूरतमंदों को आपने स्वालम्बी बनाने के लिए ऋण दिलवाए, सीएम बताएं।
25. कांग्रेस विधायक यह बताएं कि उनके विधानसभा क्षेत्रों में कितने श्रम कार्ड बनावाये गए, चिरंजीवी कार्ड और अन्य सरकारी योजनाओं के कार्ड बनवाने के लिए कितने कैम्प उन्होंने लगवाए।