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कांग्रेस के पास ज्यादा पार्षद, फिर भी भाजपा के मेयर: पाली-अजमेर में कैसे पलटा पूरा खेल? समझें आंकड़ों का गणित
Mon, 21 Sep 2026 02:51 PM IST
हिमांशु सिंह बघेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पाली/बीकानेर/उदयपुर/अलवर/अजमेर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पाली/बीकानेर/उदयपुर/अलवर/अजमेर
Published by: हिमांशु सिंह बघेल
Updated Mon, 21 Sep 2026 02:51 PM IST
सार
राजस्थान के पांच नगर निगमों में हुए मेयर चुनाव के नतीजों में वार्ड चुनाव से अलग तस्वीर देखने को मिली। उदयपुर, पाली, अजमेर और अलवर में भाजपा के मेयर चुने गए, जबकि बीकानेर में कांग्रेस ने मेयर पद पर कब्जा किया।
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राजस्थान निकाय चुनाव
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
राजस्थान के नगर निगमों में सोमवार को हुए मेयर चुनाव के नतीजों ने निकाय चुनाव की पूरी तस्वीर बदलकर रख दी। पांच नगर निगमों, उदयपुर, पाली, अजमेर, अलवर और बीकानेर में मेयर पद के चुनाव हुए। आज परिणाम जारी होने के बाद इनमें से चार निगमों में भाजपा के मेयर निर्वाचित हो गए, जबकि बीकानेर में कांग्रेस ने बाजी मारी। सबसे दिलचस्प नतीजे पाली और अजमेर के रहे, जहां वार्ड चुनाव में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी थी, लेकिन मेयर की कुर्सी भाजपा के खाते में चली गई।
पाली में कांग्रेस के 29 पार्षद, फिर भी भाजपा का मेयर
65 सदस्यीय पाली नगर निगम में कांग्रेस ने 29 वार्ड जीते थे, जबकि भाजपा के 21 और निर्दलीयों के 15 पार्षद थे। बहुमत के लिए 33 वोट जरूरी थे। इसके बावजूद मतदान में भाजपा की नमिता बुबकिया को 33 वोट मिले और वह मेयर चुनी गईं। निर्दलीय राजबाला हिंगड़ को 29 और कांग्रेस की सुमित्रा जैन को सिर्फ 3 वोट मिले। यानी कांग्रेस की सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद उसके पार्षदों का पूरा समर्थन मेयर उम्मीदवार को नहीं मिल सका।
अजमेर में भी बदला पूरा समीकरण
अजमेर में कांग्रेस 37 वार्ड जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। भाजपा के 32 पार्षद और 11 निर्दलीय थे। बहुमत का आंकड़ा 41 था। चुनाव से पहले कांग्रेस को चार अतिरिक्त वोटों की जरूरत थी, जबकि भाजपा को बहुमत तक पहुंचने के लिए निर्दलीयों के समर्थन पर निर्भर रहना था।मेयर चुनाव में भाजपा की अनामिका शर्मा ने बाजी मार ली। उन्हें 43 वोट मिले जबकि कांग्रेस 37 वोटों पर ही सिमट गई। पार्षदों के चुनाव में बढ़त बनाने के बावजूद कांग्रेस अंतिम नतीजों में पिछड़ गई।
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उदयपुर में भाजपा का स्पष्ट बहुमत
उदयपुर में तस्वीर पहले से ही साफ थी। 80 सदस्यीय निगम में भाजपा ने 53 वार्ड जीते, जबकि कांग्रेस के 23, तीन निर्दलीय और एक माकपा पार्षद है। बहुमत का आंकड़ा 41 है। ऐसे में भाजपा के पास अपने दम पर स्पष्ट बहुमत था। भाजपा केपारस सिंघवी मेयर चुने गए।
अलवर में भी भाजपा ने निर्दलीयों के सहारे बनाई सरकार
65 सदस्यीय अलवर नगर निगम में भाजपा 28 पार्षदों के साथ सबसे बड़ा दल था। कांग्रेस के 23, 13 निर्दलीय और एक बसपा पार्षद था। बहुमत के लिए 33 वोट चाहिए थे। भाजपा ने निर्दलीयों का समर्थन जुटाकर सुमनलता अग्रवाल को मेयर बनाने में सफलता हासिल की।
ये भी पढ़ें- राजस्थान के 5 निगमों में मेयर का फैसला आज: 370 पार्षद करेंगे मतदान; क्रॉस वोटिंग पर नजर
बीकानेर में कांग्रेस का बहुमत काम आया
बीकानेर इस तस्वीर में अलग रहा। 80 सदस्यीय निगम में कांग्रेस ने 42 वार्ड जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया था। भाजपा के 27, निर्दलीयों के 10 और आरएलपी का एक पार्षद था। इस संख्या के साथ कांग्रेस के अनिल कल्ला मेयर चुने गए।
पांच शहरों का नतीजा क्या बताता है?
इन पांच मेयर चुनावों ने निकाय चुनाव की राजनीति में निर्दलीयों और क्रॉस वोटिंग की भूमिका को सामने ला दिया। उदयपुर और बीकानेर में स्पष्ट बहुमत ने मेयर का रास्ता आसान किया, लेकिन पाली, अजमेर और अलवर में किसी दल के पास बहुमत नहीं था। ऐसे में पार्षदों का व्यक्तिगत समर्थन और निर्दलीयों का रुख निर्णायक बना। वार्ड चुनाव में भाजपा ने 4,179 वार्ड जीते थे, जबकि कांग्रेस के खाते में 3,613 और निर्दलीयों के खाते में 2,273 वार्ड आए।
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पाली में कांग्रेस के 29 पार्षद, फिर भी भाजपा का मेयर
65 सदस्यीय पाली नगर निगम में कांग्रेस ने 29 वार्ड जीते थे, जबकि भाजपा के 21 और निर्दलीयों के 15 पार्षद थे। बहुमत के लिए 33 वोट जरूरी थे। इसके बावजूद मतदान में भाजपा की नमिता बुबकिया को 33 वोट मिले और वह मेयर चुनी गईं। निर्दलीय राजबाला हिंगड़ को 29 और कांग्रेस की सुमित्रा जैन को सिर्फ 3 वोट मिले। यानी कांग्रेस की सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद उसके पार्षदों का पूरा समर्थन मेयर उम्मीदवार को नहीं मिल सका।
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अजमेर में भी बदला पूरा समीकरण
अजमेर में कांग्रेस 37 वार्ड जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। भाजपा के 32 पार्षद और 11 निर्दलीय थे। बहुमत का आंकड़ा 41 था। चुनाव से पहले कांग्रेस को चार अतिरिक्त वोटों की जरूरत थी, जबकि भाजपा को बहुमत तक पहुंचने के लिए निर्दलीयों के समर्थन पर निर्भर रहना था।मेयर चुनाव में भाजपा की अनामिका शर्मा ने बाजी मार ली। उन्हें 43 वोट मिले जबकि कांग्रेस 37 वोटों पर ही सिमट गई। पार्षदों के चुनाव में बढ़त बनाने के बावजूद कांग्रेस अंतिम नतीजों में पिछड़ गई।
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उदयपुर में भाजपा का स्पष्ट बहुमत
उदयपुर में तस्वीर पहले से ही साफ थी। 80 सदस्यीय निगम में भाजपा ने 53 वार्ड जीते, जबकि कांग्रेस के 23, तीन निर्दलीय और एक माकपा पार्षद है। बहुमत का आंकड़ा 41 है। ऐसे में भाजपा के पास अपने दम पर स्पष्ट बहुमत था। भाजपा केपारस सिंघवी मेयर चुने गए।
अलवर में भी भाजपा ने निर्दलीयों के सहारे बनाई सरकार
65 सदस्यीय अलवर नगर निगम में भाजपा 28 पार्षदों के साथ सबसे बड़ा दल था। कांग्रेस के 23, 13 निर्दलीय और एक बसपा पार्षद था। बहुमत के लिए 33 वोट चाहिए थे। भाजपा ने निर्दलीयों का समर्थन जुटाकर सुमनलता अग्रवाल को मेयर बनाने में सफलता हासिल की।
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बीकानेर में कांग्रेस का बहुमत काम आया
बीकानेर इस तस्वीर में अलग रहा। 80 सदस्यीय निगम में कांग्रेस ने 42 वार्ड जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया था। भाजपा के 27, निर्दलीयों के 10 और आरएलपी का एक पार्षद था। इस संख्या के साथ कांग्रेस के अनिल कल्ला मेयर चुने गए।
पांच शहरों का नतीजा क्या बताता है?
इन पांच मेयर चुनावों ने निकाय चुनाव की राजनीति में निर्दलीयों और क्रॉस वोटिंग की भूमिका को सामने ला दिया। उदयपुर और बीकानेर में स्पष्ट बहुमत ने मेयर का रास्ता आसान किया, लेकिन पाली, अजमेर और अलवर में किसी दल के पास बहुमत नहीं था। ऐसे में पार्षदों का व्यक्तिगत समर्थन और निर्दलीयों का रुख निर्णायक बना। वार्ड चुनाव में भाजपा ने 4,179 वार्ड जीते थे, जबकि कांग्रेस के खाते में 3,613 और निर्दलीयों के खाते में 2,273 वार्ड आए।