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Bikaner News: सेप्टिक टैंक बना मौत का कुआं, सफाई करते वक्त तीन मजदूरों की गई जान
Thu, 22 May 2025 03:06 PM IST
आशुतोष प्रताप सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बीकानेर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बीकानेर
Published by: आशुतोष प्रताप सिंह
Updated Thu, 22 May 2025 03:06 PM IST
सार
बीकानेर शहर के बीछवाल थाना इलाके में, करणी नगर औद्योगिक क्षेत्र में फिर एक दुखद हादसा हुआ। यहां एक वूलन मिल के सेप्टिक टैंक की सफाई करते समय तीन मजदूरों की दम घुटने से मौत हो गई।
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मौके पर मौजूद लोग
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बीकानेर शहर के बीछवाल थाना इलाके के करणी नगर औद्योगिक क्षेत्र में फिर से एक दुखद हादसा हुआ। यहां एक वूलन मिल के सेप्टिक टैंक की सफाई करते हुए तीन मजदूरों की दम घुटने से मौत हो गई। मृतक मजदूरों के नाम हैं: शिवबाड़ी के अनिल (पिता कैलाश), प्रताप बस्ती के सागर (पिता धनराज) और गोगागेट के गणेश (पिता देवाराम)।
मिली जानकारी के अनुसार, वूलन मिल में धागे धोने के लिए कई केमिकल्स का इस्तेमाल होता है। यह केमिकल युक्त पानी सेप्टिक टैंक में जमा हो जाता है। सफाई के लिए तीन मजदूर बुलाए गए थे। जब पहला मजदूर टैंक के अंदर गया, तो वह बेहोश हो गया। उसकी मदद करने उसके दो साथी अंदर गए, लेकिन जहरीली गैस के कारण तीनों की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे की खबर मिलते ही मजदूरों को पीबीएम अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस हादसे में एक मजदूर ओमप्रकाश बच गया।
यह भी पढ़ें: तीन बहनों समेत चार बच्चियों की डूबने से मौत, बकुलाही नदी से मिट्टी लेने गई थीं चारों
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पुराना दर्द फिर ताजा हो गया
बीछवाल थाना इलाके में यह पहली बार नहीं है जब ऐसा हादसा हुआ है। 27 मार्च 2022 को भी इसी तरह ऊन फैक्ट्री के सेप्टिक टैंक की सफाई करते वक्त चार मजदूर लालचंद, चोरूलाल नायक, कालूराम वाल्मीकी और किशन बिहारी की दम घुटने से मौत हो गई थी। बार बार ऐसे हादसों से औद्योगिक सुरक्षा और सफाई करने वाले मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल उठ रहे हैं। अब सवाल ये है कि मजदूरों की जान कब तक इस लापरवाही की वजह से जाती रहेगी?
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मिली जानकारी के अनुसार, वूलन मिल में धागे धोने के लिए कई केमिकल्स का इस्तेमाल होता है। यह केमिकल युक्त पानी सेप्टिक टैंक में जमा हो जाता है। सफाई के लिए तीन मजदूर बुलाए गए थे। जब पहला मजदूर टैंक के अंदर गया, तो वह बेहोश हो गया। उसकी मदद करने उसके दो साथी अंदर गए, लेकिन जहरीली गैस के कारण तीनों की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे की खबर मिलते ही मजदूरों को पीबीएम अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस हादसे में एक मजदूर ओमप्रकाश बच गया।
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पुराना दर्द फिर ताजा हो गया
बीछवाल थाना इलाके में यह पहली बार नहीं है जब ऐसा हादसा हुआ है। 27 मार्च 2022 को भी इसी तरह ऊन फैक्ट्री के सेप्टिक टैंक की सफाई करते वक्त चार मजदूर लालचंद, चोरूलाल नायक, कालूराम वाल्मीकी और किशन बिहारी की दम घुटने से मौत हो गई थी। बार बार ऐसे हादसों से औद्योगिक सुरक्षा और सफाई करने वाले मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल उठ रहे हैं। अब सवाल ये है कि मजदूरों की जान कब तक इस लापरवाही की वजह से जाती रहेगी?