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Bikaner News: कड़े पहरे के बीच निकलती है गणगौर की सवारी, करोड़ों के आभूषणों से सजी माता में है गहरी आस्था
Tue, 01 Apr 2025 11:57 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बीकानेर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बीकानेर
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 01 Apr 2025 11:57 AM IST
सार
बीकानेर के ढड्ढा चौक में स्थित चांदमल ढड्ढा की गणगौर की सवारी साल में केवल दो दिन के लिए सार्वजनिक रूप से बाहर निकाली जाती है। इस दौरान गणगौर माता को करोड़ों रुपये के सोने-चांदी और हीरे-जवाहरात से सजाया जाता है, जिनकी सुरक्षा के लिए पुलिस की कड़ी निगरानी रखी जाती है।
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पुलिस के पहरे में निकलती है करोड़ों के गहनों से लदी गणगौर
विस्तार
होलिका दहन के दूसरे दिन से चैत्र शुक्ल तृतीया तक मनाया जाने वाला गणगौर पर्व भगवान शिव (गण) और माता पार्वती (गौर) के प्रति श्रद्धा का प्रतीक है। इस अवसर पर कुंवारी कन्याएं मनचाहा वर पाने और विवाहित महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए पूजन करती हैं। लेकिन बीकानेर की गणगौर अन्य गणगौर से अलग और खास मानी जाती है, क्योंकि इसे पुत्र प्राप्ति की कामना के लिए पूजा जाता है। इस गणगौर की एक विशेषता यह भी है कि यह दुनिया की सबसे अधिक आभूषणों से सजी गणगौर मानी जाती है।
रियासतकाल से चली आ रही परंपरा के अनुसार बीकानेर के ढड्ढा चौक में स्थित चांदमल ढड्ढा की गणगौर हर साल सिर्फ दो दिन, चैत्र शुक्ल तृतीया और चतुर्थी को सार्वजनिक रूप से बाहर निकाली जाती है। इस दौरान गणगौर माता को करोड़ों रुपये के सोने-चांदी और हीरे-जवाहरात से सजाया जाता है, जिनकी सुरक्षा के लिए पुलिस की कड़ी निगरानी रखी जाती है।
ये भी पढ़ें: Udaipur News: मेवाड़ महोत्सव में गणगौर सवारी का भव्य स्वागत, दिखा लोक संस्कृति का अनूठा संगम
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150 साल पुरानी परंपरा, पुत्र प्राप्ति की मान्यता
जानकारी के अनुसार बीकानेर के रियासतकाल में सेठ उदयमल और उनकी पत्नी को संतान सुख नहीं था। उन्होंने राजपरिवार की गणगौर की पूजा कर पुत्र प्राप्ति की कामना की। उनकी मनोकामना पूर्ण हुई और उनके घर चांदमल नामक पुत्र का जन्म हुआ। बाद में उदयमल और उनकी पत्नी ने आम लोगों को भी गणगौर पूजा का अवसर देने के साथ ही सार्वजनिक रूप से गणगौर का पूजन शुरू करवाया।
करीब 150 साल पुरानी इस परंपरा में आज भी वही आभूषण गणगौर को पहनाए जाते हैं, जो सेठ उदयमल के समय से संरक्षित हैं। आज उनकी कीमत करोड़ों रुपये में आंकी जाती है। सुरक्षा के लिहाज से गणगौर की सवारी के दौरान पुलिस के हथियारबंद जवानों की तैनाती की जाती है, ताकि गणगौर माता के बहुमूल्य आभूषणों को सुरक्षित रखा जा सके।
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रियासतकाल से चली आ रही परंपरा के अनुसार बीकानेर के ढड्ढा चौक में स्थित चांदमल ढड्ढा की गणगौर हर साल सिर्फ दो दिन, चैत्र शुक्ल तृतीया और चतुर्थी को सार्वजनिक रूप से बाहर निकाली जाती है। इस दौरान गणगौर माता को करोड़ों रुपये के सोने-चांदी और हीरे-जवाहरात से सजाया जाता है, जिनकी सुरक्षा के लिए पुलिस की कड़ी निगरानी रखी जाती है।
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150 साल पुरानी परंपरा, पुत्र प्राप्ति की मान्यता
जानकारी के अनुसार बीकानेर के रियासतकाल में सेठ उदयमल और उनकी पत्नी को संतान सुख नहीं था। उन्होंने राजपरिवार की गणगौर की पूजा कर पुत्र प्राप्ति की कामना की। उनकी मनोकामना पूर्ण हुई और उनके घर चांदमल नामक पुत्र का जन्म हुआ। बाद में उदयमल और उनकी पत्नी ने आम लोगों को भी गणगौर पूजा का अवसर देने के साथ ही सार्वजनिक रूप से गणगौर का पूजन शुरू करवाया।
करीब 150 साल पुरानी इस परंपरा में आज भी वही आभूषण गणगौर को पहनाए जाते हैं, जो सेठ उदयमल के समय से संरक्षित हैं। आज उनकी कीमत करोड़ों रुपये में आंकी जाती है। सुरक्षा के लिहाज से गणगौर की सवारी के दौरान पुलिस के हथियारबंद जवानों की तैनाती की जाती है, ताकि गणगौर माता के बहुमूल्य आभूषणों को सुरक्षित रखा जा सके।

करोड़ों रुपए के कीमती गहनों से लदी गणगौर

करोड़ों रुपए के कीमती गहनों से लदी गणगौर