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Bharat Jodo Yatra: ये गाड़िया लोहार, खुद बेघर हैं...लेकिन इंदिरा के पोते का माला और फेटा बांधकर करेंगे स्वागत
Mon, 12 Dec 2022 09:37 PM IST
अरविंद कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सवाई माधोपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सवाई माधोपुर
Published by: अरविंद कुमार
Updated Mon, 12 Dec 2022 09:37 PM IST
सार
राजस्थान में राहुल गांधी के नेतृत्व में भारत जोड़ो यात्रा 14 दिसंबर को सुबह 6:30 बजे यात्रा भाड़ौती से शुरू होगी और लंच दस बजे बाढ़ श्यामपुरा टोंड बामनवास में होगा। इसके बाद दोपहर 3:30 बजे यात्रा दोबारा शुरू होकर शाम 6:30 बजे बगड़ी चौक लालसोट दौसा जिले में प्रवेश करेगी, यहां राहुल का शानदार स्वागत होगा।
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गाड़िया लोहार
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
30 साल से भी ज्यादा समय से उपेक्षित और खुले आसमान के नीचे बसी गाड़िया लोहार की बस्ती, जिसको 30 साल बाद भी बिजली और पानी जैसी आम सुविधा नहीं मिल पाई है। यह बस्ती सवाई माधोपुर जिले होकर गुजरने वाले लालसोट हाइवे से बिल्कुल सटी है।
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बता दें कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा लालसोट हाइवे से होकर गुजरेगी। हालांकि, प्रशासन की ओर से बस्ती को हटाने या दबाने के प्रयास नहीं किए गए। लेकिन राहुल गांधी की पैदल यात्रा के चलते एक आशा जरूर इनके मन में उठी है कि अगर राहुल की इनके साथ मुलाकात हो जाए तो यह भी अपनी व्यथा और स्थिति से उनको अवगत करवा सकेंगे।
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बिजली-पानी की मांग...
इनकी मांग सिर्फ बिजली और पानी के साथ इनको भी एक छत मिल जाए, जिसके चलते ये लोग भी अपना जीवन-यापन और अपने बच्चों का भविष्य निखार सकेंष। बस्ती में 30 परिवार रहते हैं, जिनके बच्चे और उनके भी बच्चे हैं जो यहां रह रहे हैं। इनके पास न तो आज तक बिजली मिली है और न ही पीने का पानी है। गांव वाले भी इनको अपनाने को तैयार नहीं हैं। डिजिटल युग में जब एक ट्वीट पर चलती हुई रेल गाड़ी में सुविधा उपलब्ध हो जाती है, तो यहां क्यों नहीं।
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राहुल गांधी कौन हैं, यह पता नहीं...
ये परिवार यहां पर 30 साल से रह रहे हैं, वो भी बिना किसी सुविधा और संसाधन के। ये लोग नहीं जानते राहुल गांधी कौन हैं। बस इतना पता है कि इंदिरा गांधी का पोता हैं, जो इनकी मदद कर सकते हैं। भारत जोड़ो यात्रा के माध्यम से राहुल गांधी लोगों से जुड़ रहे हैं और उनको एक उम्मीद की तरह भी नजर आने लगे हैं। यही कारण है कि इस बस्ती की पुष्पा का कहना है, राहुल गांधी को माला पहनाकर और फेटा बांधकर उनका स्वागत करेंगे और अपनी बात रखेंगे।
कौन हैं गाड़िया लोहार...
राजस्थान की घुमंतू जनजाति गाड़िया लोहार को उनके अनोखे और कठोर प्रण के लिए जाना जाता है। इस समुदाय का संबंध कभी राजस्थान की शाही भूमि से था। देश की राजधानी दिल्ली में गाड़िया लोहारों की कई बस्तियां हैं। ऐतिहासिक रूप से एक खानाबदोश जनजाति के रूप में चर्चित गाड़िया लोहारों ने राजस्थान के चित्तौड़गढ़ का किला छोड़ने के बाद भीषण यात्रा की है।
दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों में लगभग चालीस हजार गाड़िया लोहार रहते हैं। महाराणा प्रताप की प्रतिज्ञा से बंधे ये लोग अब चाहते हैं कि इनके बच्चे भी व्यवस्था में शामिल हों और अपना भविष्य संवारें। बच्चों के भविष्य की खातिर अगर पुरानी परंपराएं तोड़नी पड़ें, तो पुरखे नाराज नहीं होते, बल्कि आशीष बनकर बरसते हैं।
प्रतिज्ञा के मूल में एक लंबी कथा सांस लेती है। इसमें गहन दुख, आक्रोश, हिम्मत और भविष्य की सुखद आस एक साथ महसूस होती है। यह अपने वर्तमान का प्रतिरोध भी हो सकती है और एक सुंदर सपने की परिकल्पना भी। ऐसी ही एक प्रतिज्ञा गाड़िया लोहारों ने भी ली थी। जो समय के साथ और इस्पाती होती गई। पर अब लगता है कि महाराणा के वंशजों के लिए प्रतिज्ञा तोड़ने का सही समय आ गया है। वे पढ़ रहे हैं, बढ़ रहे हैं और अपने डेरे के स्थायी होने का सपना भी देख रहे हैं।
गाड़िया लोहार एक ऐसा समुदाय जिसकी गाड़ी ही उसका घर है। इनकी सजी-धजी गाडि़यां इनकी पहचान हैं। इन्हीं गाड़ी के चक्कों में इनके घर-परिवार के लगातार चलते रहने की कील लगी है। इसी कील में कहीं बरसों पुरानी प्रतिज्ञा आज भी बंधी है।