{"_id":"69250b16831b02f0da05fa1c","slug":"sdm-and-blo-are-doing-sir-work-sitting-on-camel-in-the-sandy-dunes-barmer-news-c-1-1-noi1403-3666936-2025-11-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Barmer News: रेतीले धोरों में घर-घर पहुंचना बना चुनौती, एसडीएम और बीएलओ ऊंट पर बैठकर कर रहे एसआईआर का कार्य","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Barmer News: रेतीले धोरों में घर-घर पहुंचना बना चुनौती, एसडीएम और बीएलओ ऊंट पर बैठकर कर रहे एसआईआर का कार्य
Wed, 26 Nov 2025 09:47 PM IST
बाड़मेर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बाड़मेर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बाड़मेर
Published by: बाड़मेर ब्यूरो
Updated Wed, 26 Nov 2025 09:47 PM IST
सार
रेतीले धोरों के बीच एसआईआर का काम करना बीएलओ और अधिकारियों के लिए अपने आप में चुनौती बना हुआ है लेकिन इसका सामना करते हुए निर्वाचन की टीम ऊंट पर बैठकर घर-घर पहुंच रही है।
विज्ञापन
एसडीएम और बीएलओ ऊंट पर बैठकर कर रहे एसआईआर का कार्य
विस्तार
बाड़मेर जिला राजस्थान का वह दुर्गम इलाका है, जहां छितराई हुई आबादी है। लोग ढाणियों में दूर-दूर रहते हैं। एक बूथ के मतदाता कई किलोमीटर तक में फैले हुए हैं। जब भारत निर्वाचन आयोग ने एसआईआर कार्यक्रम शुरू किया, तो प्रशासन के लिए इसे समय पर पूरा करना चुनौती थी। इसलिए यहां निर्वाचन की टीम ने विशेष रणनीति बनाई, जिसके तहत समय से मतदाताओं के घर तक पहुंचकर गणना प्रपत्र पहुंचाया जा सके और उसे वापस लेकर डिजिटिलाइज्ड किया जा सके। इसके लिए धोरों में रहे रहे लोगों तक पहुंचने के ऊंटों का सहारा लिया गया।
ये भी पढ़ें: Udaipur News: सिर पर पत्थर गिरने से मजदूरी कर रही महिला की मौत, मुआवजे की मांग को लेकर परिजनों ने किया हंगामा
भारत-पाक बॉर्डर का सीमांत गांव बावरवाला में एसडीएम सेड़वा बद्रीनारायण विश्नोई और उनकी टीम ने 2 किमी रेत के टीले पर टीम के साथ पैदल चलकर कोली, भील और देवासी जातियों के मतदाताओं का घर-घर जाकर भौतिक सत्यापन किया। इसके साथ ही सीमांत क्षेत्र के मतदाताओं से बीएलओ को गणना प्रपत्र भरवाने में सहयोग करने और सही जानकारी उपलब्ध करवाने की अपील की। इसके साथ ही चौहटन और शिव के क्षेत्रों के दूरस्थ इलाकों में भी बीएलओ ने गांव में ही कैम्प किया। यहां एक ढाणी से दूसरी ढाणी की दूरी 5 से 7 किलीमीटर तक होना सामान्य है।
विज्ञापन
इसके लिए बीएलओ यहां के स्थानीय परिवहन का भी उपयोग कर रहे हैं। यहां तक कि मतदाताओं के घर पर ही खाना खाकर सो जाते हैं। फिर दूसरे दिन दूसरे स्थान पर जाते हैं। इसके साथ ही एक चुनौती इंटरनेट कनेक्टिविटी की भी आई, इसके लिए उन्होंने ऐसे प्वाइंट खोजे, जहां से इंटरनेट सुगमता से मिल सके, ताकि फॉर्म को डिजिटिलाइज्ड किया जा सके। एसआर्इआर के लिए आ रही इन दुर्गम परिस्थितियों में भी बीएलओ का हौसला कम नहीं हो रहा और इस कार्य को करने में अपनी पूरी क्षमता से लगे हुए हैं, जिसका परिणाम है कि बाड़मेर जिला एसआईआर के कार्य में अग्रणी बना हुआ है।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें: Udaipur News: सिर पर पत्थर गिरने से मजदूरी कर रही महिला की मौत, मुआवजे की मांग को लेकर परिजनों ने किया हंगामा
विज्ञापन
भारत-पाक बॉर्डर का सीमांत गांव बावरवाला में एसडीएम सेड़वा बद्रीनारायण विश्नोई और उनकी टीम ने 2 किमी रेत के टीले पर टीम के साथ पैदल चलकर कोली, भील और देवासी जातियों के मतदाताओं का घर-घर जाकर भौतिक सत्यापन किया। इसके साथ ही सीमांत क्षेत्र के मतदाताओं से बीएलओ को गणना प्रपत्र भरवाने में सहयोग करने और सही जानकारी उपलब्ध करवाने की अपील की। इसके साथ ही चौहटन और शिव के क्षेत्रों के दूरस्थ इलाकों में भी बीएलओ ने गांव में ही कैम्प किया। यहां एक ढाणी से दूसरी ढाणी की दूरी 5 से 7 किलीमीटर तक होना सामान्य है।
विज्ञापन
इसके लिए बीएलओ यहां के स्थानीय परिवहन का भी उपयोग कर रहे हैं। यहां तक कि मतदाताओं के घर पर ही खाना खाकर सो जाते हैं। फिर दूसरे दिन दूसरे स्थान पर जाते हैं। इसके साथ ही एक चुनौती इंटरनेट कनेक्टिविटी की भी आई, इसके लिए उन्होंने ऐसे प्वाइंट खोजे, जहां से इंटरनेट सुगमता से मिल सके, ताकि फॉर्म को डिजिटिलाइज्ड किया जा सके। एसआर्इआर के लिए आ रही इन दुर्गम परिस्थितियों में भी बीएलओ का हौसला कम नहीं हो रहा और इस कार्य को करने में अपनी पूरी क्षमता से लगे हुए हैं, जिसका परिणाम है कि बाड़मेर जिला एसआईआर के कार्य में अग्रणी बना हुआ है।

एसडीएम और बीएलओ ऊंट पर बैठकर कर रहे एसआईआर का कार्य