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Baran News: BJP विधायक कंवरलाल मीणा की विधायकी पर संकट, सुप्रीम कोर्ट ने SLP खारिज की, समर्पण करने के निर्देश
Wed, 07 May 2025 03:02 PM IST
अर्पित याज्ञनिक
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बारां
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बारां
Published by: अर्पित याज्ञनिक
Updated Wed, 07 May 2025 03:02 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने 2005 के एक आपराधिक मामले में उनकी विशेष अनुमति याचिका (SLP) को खारिज कर दिया है और उन्हें दो सप्ताह के भीतर ट्रायल कोर्ट में आत्मसमर्पण करने के निर्देश दिए हैं।
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भाजपा विधायक कंवरलाल मीणा।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बारां जिले के अंता से भाजपा विधायक कंवरलाल मीणा की विधायकी खतरे में पड़ गई है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को उनके द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP) को खारिज कर दिया है। अदालत ने उन्हें दो सप्ताह के भीतर ट्रायल कोर्ट के समक्ष समर्पण करने के निर्देश दिए हैं। विधायक मीणा को करीब 20 साल पुराने मामले में ट्रायल कोर्ट ने तीन साल की सजा सुनाई थी, जिसे बाद में अपीलीय अदालत और राजस्थान हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखा। मामला वर्ष 2005 का है, जब मीणा पर एसडीएम पर पिस्टल तानने, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और राजकार्य में बाधा डालने के गंभीर आरोप लगे थे।
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सुप्रीम कोर्ट ने दलीलों को किया खारिज
मीणा की ओर से पेश वकील नमित सक्सेना ने सुप्रीम कोर्ट में तर्क दिया कि घटना स्थल से कोई हथियार बरामद नहीं हुआ और वीडियोग्राफी की कैसेट भी पुलिस के पास नहीं है। इसके चलते ‘क्रिमिनल फोर्स’ और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का मामला नहीं बनता। लेकिन जस्टिस विक्रमनाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस संजय करोल की बेंच ने सभी दलीलों को खारिज कर दिया।
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विधायकी जाना लगभग तय
1951 के जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत यदि किसी जनप्रतिनिधि को दो साल या उससे अधिक की सजा होती है, तो उसकी सदस्यता स्वतः समाप्त हो जाती है। हाईकोर्ट से सजा बरकरार रहने और अब सुप्रीम कोर्ट से भी राहत न मिलने के चलते मीणा की विधानसभा सदस्यता समाप्त होना लगभग तय माना जा रहा है।
विवादित घटना का विवरण
3 फरवरी 2005 को झालावाड़ जिले के दांगीपुरा-राजगढ़ मोड़ पर खाताखेड़ी उपसरपंच चुनाव को लेकर गांव वालों ने सड़क जाम कर रखी थी। मौके पर पहुंचे तत्कालीन एसडीएम रामनिवास मेहता, प्रोबेशनर आईएएस डॉ. प्रीतम बी. यशवंत और तहसीलदार को समझाने के दौरान विधायक कंवरलाल मीणा अपने समर्थकों के साथ पहुंचे। उन्होंने एसडीएम की कनपटी पर पिस्टल तान दी और दोबारा वोटों की गिनती नहीं कराने पर जान से मारने की धमकी दी। विधायक ने विभागीय फोटोग्राफर के कैमरे से कैसेट निकालकर तोड़ दी और जला दिया। डॉ. प्रीतम का डिजिटल कैमरा भी छीना, हालांकि बाद में लौटा दिया।
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राजनीतिक घमासान
हाईकोर्ट के फैसले के बाद कांग्रेस ने विधानसभा सचिवालय से मीणा की सदस्यता समाप्त करने की मांग की थी। सचिवालय ने विधायक को नोटिस जारी कर सुप्रीम कोर्ट से स्टे ऑर्डर प्रस्तुत करने को कहा था। अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा SLP खारिज होने के बाद कानूनी और राजनीतिक तौर पर उनकी स्थिति और कमजोर हो गई है।