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बांसवाड़ा जिला परिषद चुनाव में बदले समीकरण: 43 सीटों पर होगा मुकाबला; कांग्रेस-भाजपा के सामने बीएपी की चुनौती
Thu, 08 Oct 2026 09:52 PM IST
बांसवाड़ा ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांसवाड़ा
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Published by: बांसवाड़ा ब्यूरो
Updated Thu, 08 Oct 2026 09:52 PM IST
सार
बांसवाड़ा जिला परिषद में नए परिसीमन के बाद सीटें 31 से बढ़कर 43 हो गई हैं। कांग्रेस और भाजपा के बीच मुकाबले में इस बार भारत आदिवासी पार्टी की एंट्री से जिले के पंचायतीराज चुनाव के समीकरण बदल गए हैं।
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जिला परिषद बांसवाड़ा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
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राज्य में पंचायतीराज चुनाव की तारीखों की घोषणा हो चुकी है और राजनीतिक सरगर्मियां भी बढ़ने लगी हैं। राज्य के दक्षिण में स्थित बांसवाड़ा जिले में तीन चरणों में होने वाले चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों की ओर से बैठकों और जीत की रणनीति बनाने का दौर शुरू हो गया है। इस बार जिला परिषद चुनाव में नए परिसीमन के बाद सीटों की संख्या बढ़ी है। साथ ही कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के सामने भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) की चुनौती भी है।
43 सदस्यों का होगा जिला परिषद सदन
बांसवाड़ा में पिछले पंचायतीराज चुनाव के दौरान जिला परिषद की 31 सीटें थीं। नए परिसीमन के बाद 12 सीटें बढ़ाई गई हैं। अब जिला परिषद के सदन में 43 सदस्य होंगे। दिसंबर 2020 में हुए चुनाव में कुल 31 सीटों में से कांग्रेस ने 20 और भाजपा ने 10 सीटें जीती थीं। वहीं एक सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी ने जीत दर्ज की थी।
पांच साल में बदल गया राजनीतिक परिदृश्य
जिले में पिछले पांच साल के दौरान राजनीतिक परिदृश्य में बदलाव आया है। 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने चार और भाजपा ने एक सीट जीती थी। बागीदौरा से विधायक बने महेंद्रजीत सिंह मालवीया ने बाद में विधायक पद से इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थाम लिया था। इसके बाद उन्होंने लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन भारत आदिवासी पार्टी के राजकुमार रोत ने उन्हें करीब ढाई लाख वोटों के अंतर से हराया।
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उपचुनाव में भी बीएपी ने दर्ज की जीत
बागीदौरा विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भी भारत आदिवासी पार्टी के जयकृष्ण पटेल ने जीत दर्ज की। लोकसभा और एक विधानसभा सीट पर जीत के साथ बीएपी ने जिले की तीन अन्य सीटों पर भी अपना जनाधार बढ़ाया। दूसरी ओर महेंद्रजीत सिंह मालवीया दोबारा कांग्रेस में लौट चुके हैं। इन बदलावों का असर अब पंचायतीराज चुनाव में भी देखने को मिल सकता है।
पहली बार पंचायतीराज चुनाव में उतरेगी बीएपी
बांसवाड़ा जिले में दूसरे, तीसरे और चौथे चरण में पंचायतीराज चुनाव होंगे। भारत आदिवासी पार्टी पहली बार पंचायतीराज चुनाव में उतरने की तैयारी में है। लोकसभा और बागीदौरा विधानसभा सीट पर जीत के बाद बीएपी ने जिला प्रमुख पद के लिए भी दावेदारी पेश करने की तैयारी शुरू कर दी है। कांग्रेस के सामने जिला प्रमुख पद पर अपना कब्जा बरकरार रखने की चुनौती है, जबकि भाजपा भी पिछली स्थिति से आगे बढ़ने की कोशिश करेगी। दोनों दलों के सामने बीएपी के बढ़ते प्रभाव से निपटने की चुनौती भी होगी।
66 साल में कांग्रेस के 10 जिला प्रमुख
बांसवाड़ा जिला परिषद के 66 साल के इतिहास में अब तक 13 जिला प्रमुख बने हैं। इनमें सबसे ज्यादा 10 बार जिला प्रमुख की कुर्सी कांग्रेस के पास रही है। भाजपा वर्ष 1995 से 2000 तक केवल एक बार अपना जिला प्रमुख बना पाई। वहीं जनता दल ने 1961 और 1988 में जिला प्रमुख बनाया था।
पिछले पांच चुनावों से कांग्रेस का कब्जा
बीते पांच पंचायतीराज चुनावों में कांग्रेस लगातार जिला प्रमुख बनाने में सफल रही है। इस बार भाजपा और बीएपी ने भी जिला परिषद चुनाव को लेकर अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। ऐसे में 43 सदस्यीय नई जिला परिषद में किस दल का प्रभाव कितना रहता है और जिला प्रमुख पद पर कौन काबिज होता है, यह चुनाव परिणाम के बाद स्पष्ट होगा।
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43 सदस्यों का होगा जिला परिषद सदन
बांसवाड़ा में पिछले पंचायतीराज चुनाव के दौरान जिला परिषद की 31 सीटें थीं। नए परिसीमन के बाद 12 सीटें बढ़ाई गई हैं। अब जिला परिषद के सदन में 43 सदस्य होंगे। दिसंबर 2020 में हुए चुनाव में कुल 31 सीटों में से कांग्रेस ने 20 और भाजपा ने 10 सीटें जीती थीं। वहीं एक सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी ने जीत दर्ज की थी।
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पांच साल में बदल गया राजनीतिक परिदृश्य
जिले में पिछले पांच साल के दौरान राजनीतिक परिदृश्य में बदलाव आया है। 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने चार और भाजपा ने एक सीट जीती थी। बागीदौरा से विधायक बने महेंद्रजीत सिंह मालवीया ने बाद में विधायक पद से इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थाम लिया था। इसके बाद उन्होंने लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन भारत आदिवासी पार्टी के राजकुमार रोत ने उन्हें करीब ढाई लाख वोटों के अंतर से हराया।
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उपचुनाव में भी बीएपी ने दर्ज की जीत
बागीदौरा विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भी भारत आदिवासी पार्टी के जयकृष्ण पटेल ने जीत दर्ज की। लोकसभा और एक विधानसभा सीट पर जीत के साथ बीएपी ने जिले की तीन अन्य सीटों पर भी अपना जनाधार बढ़ाया। दूसरी ओर महेंद्रजीत सिंह मालवीया दोबारा कांग्रेस में लौट चुके हैं। इन बदलावों का असर अब पंचायतीराज चुनाव में भी देखने को मिल सकता है।
पहली बार पंचायतीराज चुनाव में उतरेगी बीएपी
बांसवाड़ा जिले में दूसरे, तीसरे और चौथे चरण में पंचायतीराज चुनाव होंगे। भारत आदिवासी पार्टी पहली बार पंचायतीराज चुनाव में उतरने की तैयारी में है। लोकसभा और बागीदौरा विधानसभा सीट पर जीत के बाद बीएपी ने जिला प्रमुख पद के लिए भी दावेदारी पेश करने की तैयारी शुरू कर दी है। कांग्रेस के सामने जिला प्रमुख पद पर अपना कब्जा बरकरार रखने की चुनौती है, जबकि भाजपा भी पिछली स्थिति से आगे बढ़ने की कोशिश करेगी। दोनों दलों के सामने बीएपी के बढ़ते प्रभाव से निपटने की चुनौती भी होगी।
66 साल में कांग्रेस के 10 जिला प्रमुख
बांसवाड़ा जिला परिषद के 66 साल के इतिहास में अब तक 13 जिला प्रमुख बने हैं। इनमें सबसे ज्यादा 10 बार जिला प्रमुख की कुर्सी कांग्रेस के पास रही है। भाजपा वर्ष 1995 से 2000 तक केवल एक बार अपना जिला प्रमुख बना पाई। वहीं जनता दल ने 1961 और 1988 में जिला प्रमुख बनाया था।
पिछले पांच चुनावों से कांग्रेस का कब्जा
बीते पांच पंचायतीराज चुनावों में कांग्रेस लगातार जिला प्रमुख बनाने में सफल रही है। इस बार भाजपा और बीएपी ने भी जिला परिषद चुनाव को लेकर अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। ऐसे में 43 सदस्यीय नई जिला परिषद में किस दल का प्रभाव कितना रहता है और जिला प्रमुख पद पर कौन काबिज होता है, यह चुनाव परिणाम के बाद स्पष्ट होगा।