राजस्थान: निकाय चुनाव में तीन विधायकों की साख पर लगा झटका, चुनाव में गृह क्षेत्र का बोर्ड बचाने की चुनौती
बांसवाड़ा जिले के तीन निकाय क्षेत्रों में हुए चुनाव के नतीजों ने संबंधित विधायकों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। अब आगामी पंचायतीराज चुनाव में उन्हें अपने गृह क्षेत्र की पंचायत समितियों में अपनी पार्टी का प्रधान बनवाने के लिए राजनीतिक ताकत और रणनीति दिखानी होगी।
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बांसवाड़ा जिले में बांसवाड़ा नगर परिषद और कुशलगढ़ में भाजपा ने, जबकि परतापुर-गढ़ी में कांग्रेस ने बोर्ड बनाया है। किंतु इन तीनों निकाय क्षेत्रों के विधायकों की साख पर हार के तमगे ने बट्टा लगाया है। अब इन विधायकों के सामने आने वाले दिनों में होने वाले पंचायतीराज चुनाव एक चुनौती के रूप में दिखाई पड़ रहे हैं।
बांसवाड़ा नगर परिषद में कांग्रेस 22 सीटों पर सिमटी
बांसवाड़ा नगर परिषद बांसवाड़ा विधानसभा क्षेत्र में है। यहां वर्तमान में कांग्रेस से विधायक अर्जुनसिंह बामनिया हैं, जो पार्टी के जिलाध्यक्ष भी हैं। नगर परिषद में पिछला बोर्ड कांग्रेस का था, किंतु इस बार 60 वार्डों वाली नगर परिषद में कांग्रेस महज 22 सीटों पर सिमट गई। अपने विधानसभा क्षेत्र की नगर परिषद का बोर्ड नहीं बचा पाने के बाद विधायक व जिलाध्यक्ष पर सीधे आरोपों से बचा जा रहा है, किंतु वरिष्ठ नेता यह जरूर कह रहे हैं कि अग्रिम पंक्ति में बैठने वालों की जिम्मेदारी कब तय होगी?
दो बार विधायक, किंतु पालिका नहीं
कुशलगढ़ विधानसभा सीट से कांग्रेस की रमीला खड़िया विधायक हैं, किंतु विधानसभा मुख्यालय की नगरपालिका में भाजपा ने लगातार तीसरी बार जीत हासिल कर बोर्ड बनाया। कांग्रेस के पार्षदों की संख्या जरूर बढ़ी, किंतु यहां भी विधायक बोर्ड बनाने की जिम्मेदारी पर खरी नहीं उतर पाईं।
भाजपा को भी झटका
परतापुर-गढ़ी नगरपालिका गढ़ी विधानसभा के अंतर्गत है और यहां से भाजपा के विधायक कैलाशचंद्र मीणा हैं। पालिका में दूसरी बार चुनाव हुए हैं। पिछली बार भाजपा का बोर्ड बना था, किंतु इस बार विधायक अपने गृह क्षेत्र का बोर्ड नहीं बचा पाए। कांग्रेस ने पूर्व मंत्री महेंद्रजीतसिंह मालवीया को जिम्मा सौंपा और रणनीतिक कुशलता से वे अपनी पार्टी का बोर्ड बनाने में सफल रहे।
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पंचायतीराज में यह स्थिति
बांसवाड़ा विधानसभा क्षेत्र में बांसवाड़ा और छोटी सरवन पंचायत समिति क्षेत्र हैं, जिसमें बांसवाड़ा में भाजपा और छोटी सरवन में कांग्रेस के प्रधान रहे। कुशलगढ़ विधानसभा क्षेत्र में कुशलगढ़ पंचायत समिति में भाजपा और सज्जनगढ़ पंचायत समिति में कांग्रेस के प्रधान रहे। वहीं, गढ़ी विधानसभा में गढ़ी और अरथूना पंचायत समितियां हैं, जिसमें गढ़ी में कांग्रेस और अरथूना में बीएपी का प्रधान है। अब आगामी पंचायतीराज चुनाव में निकाय क्षेत्रों से जुड़े तीनों विधायकों के सामने अपने गृह क्षेत्र की पंचायत समितियों में अपनी पार्टी का प्रधान बनाने की चुनौती है। यह देखना दिलचस्प होगा कि वे निकाय चुनाव की तरह अपनी प्रतिष्ठा नहीं बचा पाते हैं या सफलता का परचम लहराते हैं।