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Banswara News : आदिवासी विकास की उम्मीदों को लगा बड़ा झटका, संभाग का दर्जा समाप्त होने से फैला आक्रोश
Sun, 29 Dec 2024 08:01 PM IST
प्रिया वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांसवाड़ा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांसवाड़ा
Published by: प्रिया वर्मा
Updated Sun, 29 Dec 2024 08:01 PM IST
सार
सरकार ने शनिवार को हुई कैबिनेट की बैठक में तीन संभागों का दर्जा समाप्त कर दिया, जिनमें बांसवाड़ा भी शामिल है। दरअसल ये प्रदेश का पहला आदिवासी बहुल संभाग था, जिससे क्षेत्र के विकास की उम्मीदें जगी थीं लेकिन सरकार के इस फैसले से इन उम्मीदों पर पानी फिर गया है।
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राजस्थान
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राज्य सरकार के ताजा फैसले में बांसवाड़ा, पाली और सीकर संभागों का दर्जा समाप्त कर दिया गया है। इससे आदिवासी बहुल वागड़-कांठल क्षेत्र के समग्र विकास की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। बांसवाड़ा संभाग, जो राजस्थान का पहला ट्राइबल संभाग था, अब उदयपुर संभाग में शामिल कर दिया गया है।
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4 अगस्त 2023 को गहलोत सरकार ने तीन नए संभागों और 17 जिलों की घोषणा की थी, जिसमें बांसवाड़ा, डूंगरपुर और प्रतापगढ़ जिलों को मिलाकर बनाए गए इस संभाग से क्षेत्रीय विकास की संभावनाएं बलवती हुई थीं। करीब 45 लाख की जनसंख्या वाले इस संभाग में 25 तहसीलें और 1005 ग्राम पंचायतें शामिल थीं। संभाग बनने के बाद यहां शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और औद्योगिक विकास की योजनाओं को गति मिलने की उम्मीद थी।
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सरकार के इस फैसले से स्थानीय जनता और जनप्रतिनिधियों में निराशा है। बांसवाड़ा नगर परिषद के नगर निगम बनने और नगर विकास प्रन्यास की स्थापना जैसी संभावनाएं अब समाप्त हो गई हैं। इसके अलावा बजट आवंटन में वृद्धि और प्रशासनिक स्वायत्तता की उम्मीदें भी खत्म हो गई हैं।
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संभाग का दर्जा हटने से क्षेत्र में जनजाति विकास आयुक्तालय, शिक्षा निदेशालय, चिकित्सा निदेशालय और अतिरिक्त मुख्य अभियंता जैसे कार्यालयों के खुलने की योजनाएं अब ठप हो गई हैं और इनसे जुड़े नए पदों का सृजन भी रुक गया है।
संभाग बनने के बाद पहली बार आयुक्त नीरज के. पवन को नियुक्त किया गया था और उनके स्थानांतरण के बाद नई नियुक्ति नहीं किए जाने से रिव्यू कमेटी की रिपोर्ट और तीन जिलों के आधार पर संभाग का दर्जा हटाने के संकेत पहले ही मिलने लगे थे।
संभाग बनने के बाद जो प्रशासनिक सुविधाएं बांसवाड़ा में मिलने की संभावना थी, अब वह उदयपुर में ही सीमित रह जाएंगी। इससे बांसवाड़ा, डूंगरपुर और प्रतापगढ़ जिलों की जनता को पुनः उदयपुर जाकर कार्य करवाने होंगे, जिससे समय और संसाधनों की बर्बादी होगी।
राज्य सरकार के इस फैसले से आदिवासी बहुल क्षेत्र में विकास की रफ्तार धीमी हो सकती है। बांसवाड़ा के संभाग बनने से जो विकास की योजनाएं आकार ले रही थीं, वह अब अधर में लटक गई हैं। क्षेत्रीय नेताओं और आम जनता ने इस निर्णय पर नाराजगी व्यक्त करते हुए इसे वापस लेने की मांग की है।