फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Rajasthan ›   'Bal Hatha' beats Corona in Rajasthan's tribal district, read the story of 20 brave children

राजस्थान के जनजाति जिले में 'बाल हठ' ने दी कोरोना को मात, पढ़ें 20 बहादुर बच्चों की कहानी

Sat, 06 Jun 2020 04:07 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 06 Jun 2020 04:07 PM IST
सार

चुनौती थी कि नन्हें बच्चों को कोरोना से कैसे जीत दिलाई जाए। क्वारंटीन सेंटर पर तीन साल से लेकर दस साल तक की आयु के बच्चों के मन में जीवन के प्रति ऐसा उत्साह भरा कि उनकी बाल हठ के आगे कोरोना को भी हार माननी पड़ी...

विज्ञापन
'Bal Hatha' beats Corona in Rajasthan's tribal district, read the story of 20 brave children
Quarentine centre Dungurpur, Rajasthan - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

राजस्थान के दक्षिण में स्थित जनजाति जिले डूंगरपुर (गुजरात की सीमा से लगते) के क्वारंटीन सेंटर में बाल हठ ने कोरोना को मात दी है। ये कहानी प्रवासी श्रमिकों के उन 20 बहादुर बच्चों की हैं, जिनके मां-बाप कोरोना संक्रमण के हॉटस्पॉट से यहां पहुंचे थे।
विज्ञापन


जब प्रवासी श्रमिकों का टेस्ट किया गया, तो वे उनकी रिपोर्ट नेगेटिव आई, जबकि उनके बच्चों की रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई। खास बात है कि बच्चों में कोरोना का कोई लक्षण भी नहीं था। यही वो समय था जब श्रमिकों, क्वारंटीन सेंटर के स्टाफ और जिला प्रशासन की आंखें भर आईं।

विज्ञापन


चुनौती थी कि नन्हें बच्चों को कोरोना से कैसे जीत दिलाई जाए। क्वारंटीन सेंटर पर तीन साल से लेकर दस साल तक की आयु के बच्चों के मन में जीवन के प्रति ऐसा उत्साह भरा कि उनकी बाल हठ के आगे कोरोना को भी हार माननी पड़ी।

विज्ञापन
विज्ञापन

अगर जीतने की जिद हो तो फिर पूरी कायनात भी साथ देती है

सहायक निदेशक सूचना एवं जनसंपर्क छाया चौबीसा के अनुसार, कहते है कि अगर जीतने की जिद हो तो फिर पूरी कायनात भी साथ देती है। ऐसा ही कुछ डूंगरपुर में देखा गया है। जनजाति बाहुल्य डूंगरपुर कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए प्रारंभ से ही एक यौद्धा की तरह कार्य कर रहा है।


यही कारण है कि प्रथम लॉकडाउन से लेकर 49 दिन तक सवा लाख प्रवासियों के जिले में से गुजरने के बावजूद कोरोना को आगे नहीं बढ़ने दिया गया। केवल 15 पॉजिटिव केस आए, जिसमें से छह निगेटिव हो गए थे। वहीं 16 मई के बाद हॉटस्पॉट इलाकों से प्रवासियों का आवागमन बढ़ गया।

सैंपलिंग बढ़ने से एकाएक पॉजिटिव केसों का आंकड़ा भी बढ़ने लगा। कई प्रवासियों के साथ आए नन्हें बच्चों की टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर एक बारगी तो माता-पिता और परिजनों के साथ वहां मौजूद हर शख्स की आंखें भर आईं।

कोविड केयर सेंटर, प्रशासनिक अधिकारियों, कर्मचारियों एवं चिकित्सकों ने ऐसे अनूठे सकारात्मक प्रयास किए, जिससे न केवल बच्चों में, बल्कि उनके अभिभावकों में भी आशा का नया संचार हो गया।

बच्चों को ऐसा खुशनुमा माहौल दिया गया कि उन्हें गंभीर हालत में भी भय का अहसास नहीं हुआ। बच्चों के हाथों में कभी रंग भरती तुलिका देखी गई, तो कभी उन्हें संगीत पर उछलते-कूदते देखा गया।

बच्चों के लिए मुश्किल लड़ाई थी: जिला कलेक्टर 

जिला कलेक्टर काना राम के मुताबिक, कोरोना संक्रमण के दौरान सैंपलिंग में कई बार ऐसी भी स्थिति आई जब माता-पिता और परिजन तो निगेटिव आए, परंतु चार वर्ष के नन्हे बच्चे पॉजिटिव आ गए।

यह चुनौतीपूर्ण स्थिति थी, बच्चों ने इसका मुकाबला किया और वे जीत गए। जिले के हर कोविड केयर सेंटर और क्वारंटीन सेंटर पर सबसे अधिक ध्यान खुशनुमा माहौल पर रहा।

म्यूजिक थेरेपी, योग, बच्चों के लिए चित्रकारी, अंताक्षरी व स्पेलिंग जैसे गेम शुरू किए गए। माता-पिता की मौजूदगी से बच्चों को घर जैसा वातावरण देने का प्रयास किया गया। इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिले।

आयुष विभाग नोडल अधिकारी डॉ अभय मालिवाड ने बताया कि इन सभी बच्चों को आयुष मंत्रालय के निर्देशानुसार इम्यूनिटी बूस्टर एवं आयुर्वेदिक काढ़ा के साथ-साथ हल्के व्यायाम एवं योग भी कराए गए।

दस वर्ष की आयु के कुल 20 बच्चे अलाक्षणिक पॉजिटिव आए थे

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ महेन्द्र परमार ने बताया कि जिले में दस वर्ष की आयु के कुल 20 बच्चे अलाक्षणिक पॉजिटिव आए हैं। ये सभी बच्चे अपने माता-पिता एवं परिजनों के साथ मुंबई, अहमदाबाद एवं दूसरे राज्यों से आए थे।

5 वर्ष तक की आयु वर्ग के 4 बालक एवं 04 बालिकाएं तथा 6 से 10 आयु वर्ग के 07 बालक एवं 05 बालिकाएं थीं। इनमें से 14 बालक-बालिकाएं निगेटिव होकर डिस्चार्ज हो चुके हैं।

मूक-बधिर बच्ची से लेकर तीन वर्षीय बच्चों ने भी जीती जंग... 

ब्लॉक सीएमओ आसपूर, डॉ अलंकार गुप्ता बताते है कि करकोली निवासी मूक-बधिर आठ वर्षीय बच्ची अपने माता-पिता के साथ अहमदाबाद से आई थी। सैंपलिंग में पिता एवं पुत्री के पॉजिटिव आने पर उन्हें कोविड केयर सेंटर पर रखा गया।

बच्ची की विशेष परिस्थितियों एवं मानसिक संबंल के लिए मां का रहना भी अनिवार्य था। एक नई विकट परिस्थिति यह थी कि मां गर्भवती थी। ऐसे में उनका पूरा ध्यान रखने के लिए उन्हें कोविड डेडिकेटेड सेंटर पर अलग से रखा गया।

पिता-पुत्री के साथ-साथ मां का भी एडवायजरी के अनुरूप पूरा ध्यान रखा गया। ब्लॉक सीएमओ सीमलवाड़ा डॉ नरेन्द्र प्रजापत बताते है कि मुंबई से अपने प्रवासी माता-पिता के साथ आए दो अलग-अलग परिवारों के चार वर्षीय दो नन्हे बालक पॉजिटिव आए गए।

उनके माता-पिता की रिपोर्ट निगेटिव थी। बालकों की अल्प आयु को देखते हुए उनकी माताओं के लिए अलग कक्ष की व्यवस्था की गई।

इसी प्रकार साबला के वरवासा निवासी पांच वर्षीय बच्ची, दामडी निवासी तीन वर्षीय बालक से लेकर सभी नन्हें बच्चों के बाल मन का विशेष ख्याल रखते हुए उन्हें उत्साहित एवं पारिवारिक वातावरण प्रदान किया गया।



इन सभी बच्चों की रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद उन्हें 14 दिन तक क्वारंटीन में रखने के बाद उन्हें डिस्चार्ज किया गया। अपने परिजनों के साथ जब वे बच्चे अपने घर जाने के लिए तैयार हुए तो वहां डॉक्टर एवं जिला प्रशासन के अधिकारी मौजूद रहे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed