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राजस्थान चुनाव 2018: भारत-पाक बॉर्डर पर राजनीतिक उथल-पुथल, भाजपा को हो सकता है बड़ा नुकसान

Tue, 16 Oct 2018 04:44 PM IST
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, बाड़मेर
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, बाड़मेर Updated Tue, 16 Oct 2018 04:44 PM IST
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assembly election 2018: BJP may suffer due to revolt of Manvendra Singh, Jaswant Singh in rajasthan
Manvendra Singh and Jaswant Singh
राजस्थान से लगते भारत-पाक के रेगिस्तानी बॉर्डर पर भी जोरदार उथल-पुथल मची हुई है। ये पाकिस्तानी सेना नहीं, बल्कि भाजपा के दिग्गज नेता जसवंत सिंह के पार्टी से बागी हुए पुत्र विधायक मानवेंद्र सिंह मचा रहे हैं। भाजपा-कांग्रेस की दिल्ली में बैठी आलाकमान ही नहीं, बल्कि पूरे देश के राजनीतिक विश्लेषक भी मारवाड़ क्षेत्र में हो रहे इस राजनीतिक उथल-पुथल पर निगाहें जमाए हुए हैं। 
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राजस्थान में भाजपा के इस विधानसभा चुनाव के लिए 180 सीटें जीतने वाले लक्ष्य 'मिशन 180' को मारवाड़ क्षेत्र से खासी चुनौती मिलने वाली है। मानवेंद्र कह चुके हैं कि कमल का फूल, हमारी भूल। जसवंत सिंह को पिछले लोकसभा चुनाव में टिकट नहीं दिए जाने की घटना याद दिलाते हुए उन्होंने यह भी कहा कि अब उसी अंदाज में बदला लिया जाएगा।
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इधर, मानवेंद्र की पत्नी चित्रा सिंह ने कहा था कि सरकार को उखाड़ फेंको। इस परिवार के साथ यहां के लोगों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं, ऐसे में ये बगावती तेवर भाजपा को अच्छा खासा नुकसान पहुंचा सकते हैं।
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मुट्ठी से फिसल सकती हैं ये रेतीली सीटें 

राजस्थान में थार रेगिस्तान के बॉर्डर पर दशकों से भाजपा की राजनीति करने वाले जसवंत सिंह के परिवार ने भाजपा के खिलाफ बगावत का बिगुल बजा दिया है। मारवाड़ में मानवेंद्र सिंह के पिता एनडीए सरकार में पूर्व विदेश मंत्री रहे जसवंत सिंह का जबदस्त प्रभाव रहा है। यदि मारवाड़ के मतदाताओं की भावनाएं जोर मार गईं, तो ये सीटें भाजपा की मुट्ठी से फिसल सकती हैं। 

राजस्थन की 200 विधानसभा सीटों में अकेले मारवाड़ क्षेत्र के जोधपुर संभाग में 33 सीटें आती हैं और नागौर जिले को भी शामिल कर दिया जाए तो यह संख्या 43 हो जाती है। ये कहना गलत नहीं होगा कि वर्ष 2013 में हुए विधानसभा चुनाव में इन सीटों पर भाजपा ने एक तरफा जीत हासिल की।

यहां जसवंत सिंह के गृह जिले बाड़मेर में 7 विधानसभा सीटों में से भाजपा को 6 सीटें मिली थीं। वहीं जोधपुर में 5 में से 4 सीटों पर भाजपा ने कब्जा जमाया था। कांग्रेस को यहां से एक सीट दिग्गज नेता अशोक गहलोत ही दिलवा पाए थे। 

साथ ही, जैसलमेर की दोनों सीटें, पाली की सभी 6 सीटें, सिरोही की तीनों सीटें और जालौर की दोनों सीटें भाजपा ने जीतीं। नागौर में भी भाजपा का तूफान रहा और 10 में से 9 सीटें जीतीं और एक सीट भाजपा के बागी निर्दलीय चुनाव लड़े हनुमान बेनीवाल ने जीती। यहां भी कांग्रेस के हाथ खाली रहे। 

इस घटना की टीस बनी बगावत की वजह 

लेकिन अब अगले विधानसभा चुनाव में गणित पलट सकता है। मानवेंद्र द्वारा भाजपा के खिलाफ फूंका गया बिगुल और राजपूत समाज का साथ, भाजपा के लिए अच्छे संकेत नहीं है। वहीं, मारवाड़ क्षेत्र की हर विधासभा सीट पर हजारों की तादाद में मुस्लिम परिवारों में भी जसवंत परिवार के प्रति काफी गहरी भावनाएं हैं। 

यही नहीं, राजस्थान की वसुंधरा राजे सरकार के खिलाफ पनपी सत्ता विरोधी लहर, कर्मचारियों-बेरोजगारों और समाजों की नाराजगी तथा महंगाई के चलते भाजपा सरकारों के प्रति लोगों की बेरुखी के बीच जसवंत सिंह परिवार की बगावत ने भाजपा को सोचने पर मजबूर कर दिया है। 

इस घटना की टीस बनी बगावत की वजह 

बता दें कि पिछले लोकसभा चुनाव में घटी एक घटना के कारण जसवंत सिंह परिवार, इस विधानसभा चुनाव और नजदीक आते लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा से बगावत पर उतर आया है। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद के लिए प्रत्याशी घोषित कर दिया गया था और जसवंत सिंह को चुनाव मैदान से बाहर करते हुए टिकट नहीं दिया गया था। 

इस घटना के बाद जसवंत सिंह निर्दलीय चुनाव लड़े और मोदी लहर के कारण हारे भी। वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में बाड़मेर जिले की शिव सीट पर भाजपा से जीतकर मानवेंद्र सिंह विधायक बन चुके थे। लेकिन पार्टी द्वारा पिता को टिकट नहीं दिए जाने और उनके चुनाव हारने के बाद विधायक मानवेंद्र सिंह ने भाजपा की राजनीति में सक्रिय होना लगभग बंद कर दिया। (ब्यूरो)
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