आसाराम को लगा एक और तगड़ा झटका
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नाबालिग लड़की के यौन उत्पीड़न के आरोप में गिरफ्तार किए गए कथावाचक आसाराम को सुप्रीम कोर्ट से सोमवार को निराशा हाथ लगी। अदालत ने उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई को टालते हुए अगली तारीख 3 जुलाई तय की है।
आसाराम ने जमानत के लिए सर्वोच्च अदालत का दरवाजा खटखटाया है। इसके अलावा उन्होंने पोस्को कानून के तहत तय किए गए आरोपों को भी खारिज करने की मांग की है।
खारिज हुई जमानत याचिका
जस्टिस बीएस चौहान व जस्टिस एके सीकरी की पीठ ने आसाराम की ओर से दायर जमानत याचिका पर प्रतिपक्षों को नोटिस नहीं जारी करते हुए कहा कि अदालत इस मसले पर 3 जुलाई को सुनवाई करेगी।
आसाराम के अधिवक्ता ने जमानत दिए जाने की मांग की लेकिन पीठ ने सुनवाई को टालते हुए कोई भी आदेश जारी नहीं किया। 72 वर्षीय आसाराम को अगस्त में एक नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
नाबालिग होने पर आसाराम की चुनौती
फिलहाल वह राजस्थान की जोधपुर स्थित जेल में बंद हैं। आसाराम ने पीड़िता के नाबालिग होने के दावे को भी चुनौती दी है और उनका कहना है कि दुष्कर्म का आरोप लगाने वाली युवती का जन्म 1995 में हुआ था।
जबकि पीड़िता के पिता का दावा है कि उनकी बेटी का जन्म 1997 में हुआ था। आसाराम 2 सितंबर, 2013 से जोधपुर की सेंट्रल जेल में कैद हैं। इससे पहले मीडिया की ओर से चलाई जा रही खबरों पर आसाराम ने रोक लगाए जाने की मांग की थी।
तब उन्होंने दावा किया था कि मीडिया ट्रायल पर रोक नहीं लगाने की सूरत में अदालत में चलने वाला ट्रायल सही नहीं हो पाएगा। हालांकि शीर्षस्थ अदालत ने उस याचिका पर कोई आदेश नहीं जारी किया था।