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Satta Ka Sangram: अलवर पहुंचा सत्ता का संग्राम, चाय पर चर्चा में बोले मतदाता- विकास बड़ा मुद्दा
Wed, 27 Mar 2024 10:52 AM IST
दिनेश शर्मा
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, अलवर
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, अलवर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Wed, 27 Mar 2024 10:52 AM IST
सार
अमर उजाला का चुनावी रथ राजस्थान के अलवर में है। बुधवार सुबह चाय पर चर्चा के साथ इसकी शुरुआत हो गई। चर्चा में मतदाता के मन का मिजाज जाना। इसके बाद दोपहर 1 बजे युवाओं से चर्चा की जाएगी। फिर शाम पांच बजे राजनीतिक दलों के बीच हम पहुंचेंगे।
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अलवर में अधिवक्ताओं के बीच पहुंचा चुनावी रथ सत्ता का संग्राम
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
अमर उजाला का चुनावी रथ 'सत्ता का संग्राम' 27 मार्च को राजस्थान के अलवर में पहुंच चुका है। इसमें हम आप तक लोकसभा क्षेत्र की असल तस्वीर सामने रखेंगे। यहां के मतदाताओं की उम्मीदें क्या हैं और प्रत्याशी किन मुद्दों को लेकर वोटरों के बीच जा रहे हैं। बुधवार सुबह चाय पर चर्चा की गई। वोटरों के मन की बात जानने की कोशिश की गई।
एडवोकेट संजीव कारकवाल ने कहा कि यहां का मुख्य मुद्दा विकास है। एनसीआर में होने के बाद भी यहां एनसीआर का फायदा मिल रहा है। वहां जैसे पेट्रोल-डीजल के भाव हैं, यहां वो नहीं हैं। यहां न इंडस्ट्री है, न सेंटर के ऑफिस हैं। न सुविधाएं हैं। दूसरी बात यहां जो पूर्वी नहर परियोजना थी, जो कांग्रेस के समय से अटकी थी वो आना चाहिए। लोगों को पानी नहीं मिलता। लोग भटकते हैं। लॉ एंड ऑर्डर भी यहां मुद्दा बनता है। यूपी से लगा हिस्सा है, कई तरह के अपराध हैं, उन पर रोक लगाने के लिए बहुत काम करने हैं। रेलवे को लेकर विस्तार भी जरूरत है।
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पिछड़ क्यों गया अलवर की बात पर अन्य वकील साहब कहते हैं, जहां तक बाबा बालकनाथ ने विकास के लिए कुछ नहीं किया। उनके समय में कोई खास परियोजना नहीं ला पाए। अपराध बढ़ रहे हैं। आज भूपेंद्र यादव को लाया गया है, जो बाहरी हैं। बाबा बालकनाथ भी बाहरी थे। रोजगार नहीं मिलना भी बड़ी समस्या है। वकीलों के लिए भी कोई खास सुविधा नहीं है।
युवा वकील ने कहा कि अलवर से भाजपा के बड़े नेता को उतारा है। उनका राजनीतिक बड़ा कद है। वे कई सौगातें लेकर आ रहे हैं। भूपेंद्र यादव सुप्रीम कोर्ट के वकील भी हैं, राम मंदिर की सुनवाई में अहम योगदान दिया है। राजस्थान और मप्र में जल को लेकर परियोजना को लेकर भूपेंद्र यादव ने मध्यस्थता की है। ये पांच सालों से पेंडिंग थी। इससे राजस्थान के 21 जिलों को पानी के संकट से राहत मिलेगी। भारत सरकार की ओर से 90 प्रतिशत राशि मिलेगी। पहले भी विकास हुआ है।
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एडवोकेट संजीव कारकवाल ने कहा कि यहां का मुख्य मुद्दा विकास है। एनसीआर में होने के बाद भी यहां एनसीआर का फायदा मिल रहा है। वहां जैसे पेट्रोल-डीजल के भाव हैं, यहां वो नहीं हैं। यहां न इंडस्ट्री है, न सेंटर के ऑफिस हैं। न सुविधाएं हैं। दूसरी बात यहां जो पूर्वी नहर परियोजना थी, जो कांग्रेस के समय से अटकी थी वो आना चाहिए। लोगों को पानी नहीं मिलता। लोग भटकते हैं। लॉ एंड ऑर्डर भी यहां मुद्दा बनता है। यूपी से लगा हिस्सा है, कई तरह के अपराध हैं, उन पर रोक लगाने के लिए बहुत काम करने हैं। रेलवे को लेकर विस्तार भी जरूरत है।
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पिछड़ क्यों गया अलवर की बात पर अन्य वकील साहब कहते हैं, जहां तक बाबा बालकनाथ ने विकास के लिए कुछ नहीं किया। उनके समय में कोई खास परियोजना नहीं ला पाए। अपराध बढ़ रहे हैं। आज भूपेंद्र यादव को लाया गया है, जो बाहरी हैं। बाबा बालकनाथ भी बाहरी थे। रोजगार नहीं मिलना भी बड़ी समस्या है। वकीलों के लिए भी कोई खास सुविधा नहीं है।
युवा वकील ने कहा कि अलवर से भाजपा के बड़े नेता को उतारा है। उनका राजनीतिक बड़ा कद है। वे कई सौगातें लेकर आ रहे हैं। भूपेंद्र यादव सुप्रीम कोर्ट के वकील भी हैं, राम मंदिर की सुनवाई में अहम योगदान दिया है। राजस्थान और मप्र में जल को लेकर परियोजना को लेकर भूपेंद्र यादव ने मध्यस्थता की है। ये पांच सालों से पेंडिंग थी। इससे राजस्थान के 21 जिलों को पानी के संकट से राहत मिलेगी। भारत सरकार की ओर से 90 प्रतिशत राशि मिलेगी। पहले भी विकास हुआ है।
अमर उजाला का चुनावी रथ 27 मार्च को अलवर में रहेगा
- फोटो : अमर उजाला
बता दें कि राजस्थान में 25 लोकसभा सीटें हैं। राजधानी से 150 किमी दूर अलवर लोकसभा सीट पर जातिगत समीकरण हावी है। 2019 के चुनावों में यहां से भाजपा के महंत बालक नाथ ने जीत दर्ज की थी। भाजपा ने भूपेंद्र यादव पर दाव लगाया तो कांग्रेस ने ललित यादव पर। अलवर में दोपहर 1 बजे युवाओं से चर्चा की जाएगी। जानेंगे कि लोकसभा चुनावों को लेकर युवा क्या सोच रहे हैं फिर शाम पांच बजे राजनीतिक दलों के बीच हम पहुंचेंगे और जानेंगे कि वे किन मुद्दों पर वोटरों के बीच जाने वाले हैं।