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Rajasthan: कोर्ट के बाहर ढूंढें मथुरा-काशी जैसे मसलों का समाधान, अजमेर दरगाह के दीवान सैयद जैनुल आबेदीन बोले
Fri, 23 Feb 2024 06:29 PM IST
अरविंद कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर
Published by: अरविंद कुमार
Updated Fri, 23 Feb 2024 06:29 PM IST
सार
अजमेर दरगाह के आध्यात्मिक प्रमुख और वंशानुगत सज्जादानशीन हजरत दीवान सैयद जैनुल आबेदीन अली खान ने कहा कि राजनीतिक दलों को मथुरा-काशी जैसे मसलों का समाधान अदालतों के बाहर ढूंढने का प्रयास करना चाहिए। अगर कोई भी मसला आपसी सहमति से सुलझाया जाता है तो यह समुदायों का दिल और विश्वास जीतेगा।
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सैयद जैनुल आबेदीन, अजमेर दरगाह दीवान
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अजमेर दरगाह के प्रमुख ख्वाजा साहब के वंशज एवं दरगाह दीवान हजरत सैयद जैनुल आबेदीन ने कहा, किसी भी विवाद का आपसी सहमति से हल निकलता है तो उसकी बात ही कुछ और होती है, जिसमें विवाद का हल निकलने के साथ-साथ दिल भी मिलते हैं। साथ ही एक दूसरे के प्रति सम्मान और विश्वास भी लौटता है। अजमेर दरगाह प्रमुख ऑल इंडिया सूफी सज्जादानशीन कौंसिल की राजस्थान यूनिट के द्वारा आयोजित कान्फ्रेंस 'पैगाम-ए-मोहब्बत हम सब का भारत' को संबोधित कर रहे थे, जिसमें राजस्थान की लगभग सभी दरगाहों के प्रमुख मौजूद थे।
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दरगाह दीवान साहब ने कहा कि हमारा देश आज वसुधैव कुटम्बकम की सभ्यता को निभाते हुए विश्व में शांति बहाली में सकारात्मक भूमिका निभा रहा है। आज भारत विश्व शांति में अपनी भूमिका निभा रहा है तो हम अपने देश के आंतरिक मसलों का अदालतों के बाहर शांति पूर्वक समाधान निकालने में सक्षम क्यों नहीं? उन्होंने कहा कि हम सक्षम हैं, बस एक मजबूत पहल की जरूरत है।
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उन्होंने कहा कि भारत ने आजादी के बाद भी कई चुनौतियों का सामना कर उन पर जीत हासिल की है। हमारी कई पीढ़ियों ने धार्मिक विवादों का भी सामना किया है, जिसमें सबसे पुराना विवाद अयोध्या का विवाद रहा। यह बड़ी बात है कि उच्चतम न्यायालय के निर्णय के बाद इस विवाद पर पूर्ण रूप से विराम लग गया, उससे भी बड़ी बात यह है कि इस देश के हर नागरिक ने उच्चतम न्यायालय के निर्णय का सम्मान किया और एक जिम्मेदार नागरिक होने का सबूत दिया। लेकिन हमें यह बात समझनी होगी कि अदालतों के निर्णय में एक पक्ष जीतता है और एक पक्ष हारता है, जिसमें कहीं न कहीं एक पक्ष निर्णय से असहमति के साथ-साथ अपने दिल में खटास और द्वेषता नहीं समाप्त कर पाता है। इसलिए मेरा मानना यह है कि दोनों पक्ष दोनों धर्मों के लोग मथुरा-काशी जैसे विवादों का हल अदालतों के बाहर तलाशने की कोशिश करें।
उन्होंने कहा कि हर मुसलमान सुलह के विधान पर यकीन रखता है। मगर शायद हर संस्था इस दुविधा में है कि कौन इसकी शुरुआत करे, कोई अपने समाज के सामने बुरा नहीं बनना चाहता है, पर किसी को तो पहल करनी ही होगी। इसलिए मैं इस कौंसिल की तरफ से मथुरा और काशी जैसे मसलों का शांति पूर्वक और सम्मानजनक हल निकालने की अपील करता हूं और साथ-साथ यह एलान करता हूं कि मेरे जानशीन सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती जो इस संस्था के चेयरमैन हैं, हर प्रदेश में जाएं और वहां कौंसिल से जुड़ी दरगाहों को लेकर दोनों पक्षों के प्रमुख लोगों या संस्थाओं से मिलकर एक सकारात्मक और खुशगवार माहौल बनाएं। वहां एक शांति पथ बनाकर दोनों पक्षों के लिए शांति वार्ता के लिए प्लेटफॉर्म उपलब्ध करवाएं।
उन्होंने कहा कि मैं अजमेर दरगाह के सज्जादानशीन और ख़्वाजा गरीब नवाज के वंशज होने के नाते तमाम हिंदू और मुस्लिम समाज की संस्थाओं से अपील करता हूं कि काशी और मथुरा जैसे मसलों का हल अदालतों के बाहर मिल जुलकर निकालने का प्रयास करें। इस धार्मिक और अतिसंवेदनशील मसले का हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्ष एक सम्मान पूर्वक हल निकालें और हमेशा के लिए भारत से धार्मिक विवादों का अंत कर इस देश की उन्नति में अपना योगदान दें। हम सब एक सकारात्मक सोच के साथ सुलह की नीयत से कम से कम मिलकर शांति पूर्वक सम्मानजनक हल निकालने की कोशिश तो करें। आखिर कब तक हम दोनों धर्मों के लोग आपस में इन धार्मिक विवादों में उलझे रहेंगे। हमारे देश ने पिछले सात दशकों से भी ज्यादा इन धार्मिक विवादों को देखा है, हमारी दो तीन पीढ़िया तो बूढ़़ी हो गईं। अब नई हमारी आने वाली पीढ़ियां इस तरहे के विवाद से दूर रहें। इसलिए हमें इस देश में धार्मिक विवादों को पूर्ण विराम देने की जरूरत है और देश के विकास में बांधा बनने वाले हर विवाद को समाप्त कर अपनी आने वाली पीढ़ियों को एक मजबूत मुल्क, मोहब्बतों से भरा महान भारत देना ही होगा।
दरगाह प्रमुख ने CAA पर भी बोलते हुए कहा कि हम आज एक बात और साफ करना चाहते हैं कि पिछले कुछ साल में मुसलमानों को गुमराह किया गया और डराया गया कि CAA कानून से भारत के मुसलमानों की नागरिकता छीनने की कोशिश हो रही है। जबकि वास्तविकता कुछ और है, अधिनियम के प्रावधानों के विस्तृत विश्लेषण के बाद हमने पाया कि कानून का भारतीय मुसलमानों से कोई लेना-देना नहीं है और यह कानून उन पर कोई प्रभाव नहीं डालेगा। बल्कि अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश में पीड़ित और सताए हुए अल्पसंख्यक अप्रवासियों को लाभ पहुंचाएगा, जो भारतीय नागरिकता चाहते हैं। यह किसी की भी भारतीय नागरिकता छीनने के लिए नहीं है। किसी भी भारतीय की नागरिकता नहीं छीनी जा सकती, क्योंकि कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।
उन्होंने कहा कि मैं इस देश के मुसलमानों को यह वादा करता हूं कि यदि इस कानून के अंर्तगत किसी की भी नागरिकता छिनी जाएगी तो मैं सबसे पहले इस कानून के विरोध में अपनी आवाज बुलंद करूंगा। बस आप किसी भी स्वार्थी लोगों के बहकावे में न आएं और अपने देश की सरकार पर यकीन रखें और देश की तरक्की में सरकार का साथ दें।
अंत में दरगाह प्रमुख ने कॉन्फ़्रेंस में आए सभी सूफ़ियों और दरगाहों के प्रमुखों का कॉन्फ़्रेंस में आने पर धन्यवाद दिया और कहा कि भारत का इतिहास गवाह है कि इस देश के सभी सूफ़ियों के दरगाहों ने हमेशा इस मुल्क की सलामती और अमन के लिए काम किया है। आज जब वक्त की ज़रूरत है तो हमें फिर एक बार इस मुल्क की सलामती और अमन के लिए आगे आना होगा।
इससे पहले कॉन्फ़्रेंस की शुरुआत में दीवान साहब का और कौंसिल के चेयरमैन साहब के दरगाह हजरत मौलाना जियाउद्दीन साहब के जानशीन सैयद जियाउद्दीन जियाई ने उनका इस्तकबाल किया और अपने इस्तकबालिया तकरीर में कहा कि आज हम अल्लाह के नेक बंदे के आस्ताने पर हैं और यहां से हमेशा मोहब्बत और क़ौमी येक्ज़हदी का पैगाम जाता रहा है। हमारी काउंसिल यह काम बखूबी कर रही है। दीवान साहब की सरपरस्ती में और हज़रत सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती की सदारत में हम आगे भी देश में अमन के लिए मिलजुलकर सूफियों की तालिमातो को आम करते रहेंगे।
अजमेर दरगाह दीवान साहब के द्वारा दिए गए संदेश और पैगाम के बाद काउंसिल के राष्ट्रीय महासचिव और राजस्थान स्टेट इंचार्ज जनाब हबीबुर्रहमान नियाजी साहब ने दीवान साहब के द्वारा सुलह की पहल का समर्थन करते हुए कहा कि सूफी संतों ने हमेशा हर मसले का हल आपसी समझौते से ही किया है। हम सब सूफ़ियों के वंशज हैं और हर सुलह की पहल का समर्थन करते हैं। दीवान साहब द्वारा हम सभी को और काउंसिल को जो दिशा दिखाई है, हमारा मार्गदर्शन किया है इस जिम्मेदारी को हम काउंसिल के राष्ट्रीय चेयरमैन हज़रत सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती की क़यादत में हर राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ाएंगे और इस मुल्क से नफरत को हमेशा के लिए खत्म करके ही चेन से बैठेंगे।
दरगाह के नायब सज्जादानशीन सैयद अजीजुद्दीन बादशाह मिया ने अंत में दीवान साहब के बयान का समर्थन करते हुए सभी राजस्थान के सज्जादगान का शुक्रिया अदा किया और कहा कि दीवान साहब और उनके जानशीन सैयद नाहिरुद्दीन साहब के साथ मिल कर इस देश से नफ़रतों को ख़त्म करने में हम सब मिल कर काम करेंगे।