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अजमेर: नाम वापसी के बाद चुनावी तस्वीर साफ, 340 उम्मीदवार मैदान में; बागियों ने बढ़ाई भाजपा-कांग्रेस की टेंशन

Sun, 06 Sep 2026 10:31 PM IST
अजमेर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर Published by: अजमेर ब्यूरो Updated Sun, 06 Sep 2026 10:31 PM IST
सार

अजमेर नगर निगम के 80 वार्डों में नाम वापसी के बाद 340 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। इनमें भाजपा के 79, कांग्रेस के 77 और 184 निर्दलीय प्रत्याशी हैं। कांग्रेस के 47 और भाजपा के 19 बागी निर्दलीय के रूप में डटे हुए हैं। चार वार्डों में नामांकन खारिज होने और प्रत्याशी नहीं उतारे जाने से मुकाबला खासा दिलचस्प हो गया है।
 

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After withdrawal of nominations, the election picture in Ajmer is clear, 340 candidates are in the fray
अजमेर नगर निगम

विस्तार

अजमेर नगर निगम चुनाव में नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही चुनावी तस्वीर साफ हो गई है। नाम वापसी के बाद अजमेर नगर निगम के 80 वार्डों में कुल 340 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। इनमें 79 भाजपा, 77 कांग्रेस और 184 निर्दलीय प्रत्याशी शामिल हैं। खास बात यह है कि दोनों प्रमुख दलों के बागी बड़ी संख्या में मैदान में डटे हुए हैं। कांग्रेस के 47 बागी और भाजपा के 19 बागी प्रत्याशी अब निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं।
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नाम वापसी के दौरान भाजपा और कांग्रेस ने अपने कई बागियों को मनाकर चुनाव मैदान से हटाने में सफलता हासिल की, लेकिन बड़ी संख्या में बागियों के डटे रहने से दोनों दलों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। कई वार्डों में बागी प्रत्याशी पार्टी के अधिकृत उम्मीदवारों के सामने सीधी चुनौती पेश कर रहे हैं।
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चार वार्डों में बदली चुनावी तस्वीर, कहीं पार्टी प्रत्याशी ही नहीं
अजमेर के वार्ड संख्या 3 और 4 में कांग्रेस ने अपना प्रत्याशी मैदान में नहीं उतारा है। वहीं, वार्ड 24 से भाजपा प्रत्याशी का नामांकन खारिज हो चुका है, जबकि वार्ड 41 में कांग्रेस प्रत्याशी का नामांकन जांच के दौरान खारिज हुआ। इन परिस्थितियों में चारों वार्डों का मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है।
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वार्ड 3 में भाजपा के सामने अपनी ही पार्टी की बागी
वार्ड 3 में भाजपा की अनामिका शर्मा का मुकाबला भाजपा की बागी संध्या काबरा से है। कांग्रेस ने यहां प्रत्याशी नहीं उतारा है और संध्या काबरा को कांग्रेस समर्थित माना जा रहा है। ऐसे में भाजपा उम्मीदवार के सामने अपने ही खेमे से निकली चुनौती है।

वार्ड 4 में पूर्व मेयर के परिवार की एंट्री, कांग्रेस का समर्थन चर्चा में

अजमेर की सबसे हॉट सीट माने जाने वाले वार्ड 4 में भाजपा की मोनिका जैन के सामने निर्दलीय हेमा गहलोत चुनाव मैदान में हैं। हेमा गहलोत के पति दो बार अजमेर के मेयर रह चुके हैं। डीएलबी से नोटिस मिलने के बाद उन्होंने भाजपा से इस्तीफा दिया था और अब उनकी पत्नी चुनाव मैदान में हैं। कांग्रेस ने इस वार्ड में अपना प्रत्याशी नहीं उतारा है। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में हेमा गहलोत को कांग्रेस के संभावित समर्थन की चर्चा भी है।

वार्ड 24 में भाजपा का प्रत्याशी बाहर, कांग्रेस की बागी के सामने खुला मैदान

वार्ड 24 में भाजपा प्रत्याशी का नामांकन खारिज होने के बाद मुकाबले का समीकरण पूरी तरह बदल गया है। यहां तीन बार की पार्षद और कांग्रेस की बागी रश्मि हिंगोरानी निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में हैं। भाजपा प्रत्याशी का पर्चा खारिज होने से इस वार्ड में कांग्रेस की बागी प्रत्याशी की स्थिति मजबूत होती नजर आ रही है।

वार्ड 41 में भाजपा के सामने बागी और कांग्रेस समर्थित निर्दलीय
वार्ड 41 में भी मुकाबला रोचक हो गया है। कांग्रेस प्रत्याशी का नामांकन खारिज होने के बाद कांग्रेस ने निर्दलीय दिनेश शर्मा को समर्थन दिया है। वहीं, भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी सुनील सिंह के सामने भाजपा की बागी नीतू मिश्रा भी चुनाव मैदान में डटी हुई हैं।

नीतू मिश्रा पूर्व पार्षद रह चुकी हैं। टिकट नहीं मिलने से उनके पति रंजन मिश्रा ने भी भाजपा से इस्तीफा देकर पार्टी के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया था। ऐसे में इस वार्ड में भाजपा प्रत्याशी के सामने एक ओर अपनी ही पार्टी की बागी प्रत्याशी है, तो दूसरी ओर कांग्रेस समर्थित निर्दलीय दिनेश शर्मा मुकाबले को त्रिकोणीय बना रहे हैं।

184 निर्दलीय प्रत्याशियों पर टिकी नजर, किसका वोट बैंक कटेगा?
नाम वापसी के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि 184 निर्दलीय प्रत्याशियों में से कितने भाजपा और कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध लगाएंगे। दोनों दलों के बागियों की बड़ी संख्या ने पार्टी प्रत्याशियों की चिंता बढ़ा दी है। खासकर उन वार्डों में मुकाबला कांटे का माना जा रहा है, जहां बागी प्रत्याशी मजबूत जनाधार और पुराने राजनीतिक अनुभव के साथ मैदान में हैं।


अब नाम वापसी का दौर खत्म हो चुका है और प्रत्याशियों की अंतिम तस्वीर सामने आ गई है। इसके साथ ही अजमेर नगर निगम चुनाव का असली रण शुरू हो गया है। आने वाले दिनों में प्रचार अभियान के साथ यह साफ होगा कि पार्टी का सिंबल भारी पड़ेगा या बागियों का व्यक्तिगत जनाधार।
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