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झरनेश्वर महादेव अजमेर: सांप्रदायिक सौहार्द का अनूठा उदाहरण है मंदिर, यहां हर धर्म का व्यक्ति करता है जलाभिषेक

Mon, 12 Aug 2024 07:52 PM IST
अर्पित याज्ञनिक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर Published by: अर्पित याज्ञनिक Updated Mon, 12 Aug 2024 07:52 PM IST
सार

अजमेर का मराठाकालीन झरनेश्वर महादेव मंदिर दरगाह के निकट 400 फीट पहाड़ी पर स्थित है। ये मंदिर गंगा-जमुनी तहजीब का प्रतीक माना जाता है। यहां जब कांवड़ यात्राएं और शिव भक्त गुजरते हैं, तब मुस्लिम समुदाय के लोग फूलों की बारिश करते हैं।

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Ajmer News: Maratha period Jharneshwar Mahadev temple is a unique example of communal harmony
मराठाकालीन झरनेश्वर महादेव मंदिर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजस्थान के अजमेर जिले को धार्मिक नगरी के नाम से जाना जाता है, क्योंकि अजमेर में गरीब नवाज की दरगाह के साथ कई ऐसे प्राचीन मंदिर हैं, जहां गंगा जमुनी तहजीब दिखाई देती है। वहीं, कई मंदिर हैं, जो सांप्रदायिक सौहार्द के उदाहरण हैं। ऐसा ही एक मंदिर है, गरीब नवाज की दरगाह के ऊपर पहाड़ी पर बना झरनेश्वर महादेव, जहां पूरे साल श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है।

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मराठा काल में लंबे समय तक मराठा शासकों के अधीन रहे अजमेर में महादेव मंदिरों की अलग ही महत्ता और मान्यता रही है। मराठा काल में यहां कई शिव मंदिरों का निर्माण हुआ। जिन पर दशकों से भक्त उमड़ते हैं। कहीं, शिवजी पहाड़ों पर विराजित हैं तो कहीं बगीचे में बिराजे हैं। शहर के महादेव मंदिरों मे सावन के महीने में श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है।
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मराठाकालीन है झरनेश्वर महादेव मंदिर
झरनेश्वर महादेव सेवा समिति के अध्यक्ष उत्तमचंद पंवार बताते है कि मराठा काल में अजमेर में एक साथ तीन स्थानों पर भगवान शिव को विराजमान करवाया गया। बाल स्वरूप अंदरकोट की पहाड़ी पर युवा स्वरूप को मदार गेट अब (शांतेश्वर महादेव मंदिर) तथा नया बाजार के शिव बाग में राठौड़ स्वरूप को स्थापित किया गया। इन तीनों ही मंदिरों का खास महत्व है। झरनेश्वर महादेव मंदिर में पूरे साल धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। यहां पहाड़ी से लगातार पानी गिरता है और झरना बहता है, इसलिए इसका नाम झरनेश्वर महादेव मंदिर पड़ गया।




सांप्रदायिक सौहार्द का है उदाहरण
झरनेश्वर महादेव सेवा समिति के अध्यक्ष उत्तमचंद पंवार बताते है कि यह मंदिर सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह के ऊपर पहाड़ी पर होने से इसे सांप्रदायिक सौहार्द की दृष्टि से देखा जाता है। सावन में जब दरगाह और अंदरकोट से कांवड़ यात्राएं और शिव भक्त गुजरते हैं, तब मुस्लिम समुदाय के लोग फूलों की बारिश करते हैं और कांवड़ यात्रा का स्वागत किया जाता है। 



400 फीट ऊंची पहाड़ी पर स्थित है मंदिर
400 फिट की ऊंचाई पर बने झरनेश्वर महादेव मंदिर के पहाड़ी रास्ते में श्रद्धालुओं के लिए अनेक सुविधाएं भी झरनेश्वर महादेव सेवा समिति की ओर से उपलब्ध करवाई गई हैं। पूर्व मे मंदिर का रास्ता कच्चा और खराब था, लेकिन अब मंदिर तक पहुंचने के लिए सीढ़ियां हैं। यहां भगवान शिव बाल स्वरूप में विराजमान हैं। मंदिर के प्रवेश में कोई जाति भेद नहीं है। हर धर्म का व्यक्ति शिवलिंग पर जलाभिषेक करता है।



सावन और शिवरात्रि पर उमड़ती है भीड़
समिति सचिव प्रकाश ओझा बताते हैं कि सावन में इस क्षेत्र में शिवभक्तों की खासी भीड़ रहती है। यही वजह है कि झरनेश्वर महादेव के मंदिर में पूरे सावन के महीने में सहस्त्र धाराएं और अनुष्ठान होते रहते हैं। मंदिर के मुख्य पुजारी महावीर शर्मा ने बताया कि सावन के सोमवार पर भगवान भोलेनाथ का विशेष शृंगार और महाआरती का भी आयोजन किया जाता है। अजमेर जिले का प्राचीन मंदिर होने के कारण महाशिवरात्रि पर इस मंदिर पर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। शिवरात्रि पर मंदिर में भगवान शिव को 11 हजार लीटर ठंडाई का भोग लगाकर श्रद्धालुओं में बांटा जाता है।

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