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चुनावों से पहले सक्रिय हुए पार्टियों के जासूस, किसी को बिना पता चले जुटा रहे अहम जानकारियां
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बीकानेर
Updated Thu, 19 Jul 2018 02:02 PM IST
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अगर आप विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी के रूप में स्वयं को देखते हैं तो अपने सचेत रहें। आपके आसपास कई 'जासूस' घूम रहे हैं। जो आपके बारे में छोटी से छोटी जानकारियां एकत्र कर रहे हैं। न सिर्फ आपकी बल्कि आपके घनिष्ठ समर्थकों का बायोडाटा भी तैयार कर रहे हैं। इनका एकमात्र उद्देश्य यह पता लगाना है कि आप जिताऊ उम्मीदवार हैं या नहीं?
दरअसल, राजस्थान में विधानसभा चुनाव में अब कुछ महीने ही शेष रह गए हैं। ऐसे में राजनीतिक पार्टियों ने प्रत्याशियों के लिए सर्वे शुरू कर दिया है। राजस्थान के लगभग सभी जिलों में इन दिनों सर्वे टीम पहुंच रही है। स्वयं को पत्रकार बताते हुए यह लोग क्षेत्र के गणमान्य लोगों से मिल रहे हैं। संभावित प्रत्याशियों के बारे में पूरी जानकारी ले रहे हैं। उनके समर्थक कैसे हैं? कितने हैं? उनकी 'फेसवेल्यू' क्या है?
दोनों पार्टियां करा रही हैं सर्वे
दोनों राजनीतिक पार्टियां इन दिनों सर्वे करा रही हैं। हालांकि सर्वे का एक राउंड पहले ही पूरा हो चुका है। तब यह पता लगाया गया था कि कहां कौन जीत रहा है? अब उम्मीदवार के नाम से पता किया जा रहा है कि वो जीत सकता है या नहीं? जो लोग स्वयं को उम्मीदवार बताते हुए पिछले महीनों में सक्रिय हुए हैं, उनके नाम और मोबाइल नंबर के साथ तमाम तरह की रिपोर्ट इन सर्वेकर्ताओं के पास है।
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इसी महीने सौपेंगे रिपोर्ट
माना जा रहा है कि इसी महीने सर्वे पूरा हो जाएगा और पार्टी के राष्ट्रीय मुख्यालय को रिपोर्ट सौंप दी जाएगी। इस सर्वे के आधार पर ही अभी एक बार फिर यही लोग क्षेत्रों में फिर से जाएंगे। माना जा रहा है कि टिकट वितरण से पहले दो-तीन बार अलग-अलग तरह से यह पता लगाया जाएगा कि टिकट मांगने वाला कौनसा नेता जीत भी सकता है।
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दरअसल, राजस्थान में विधानसभा चुनाव में अब कुछ महीने ही शेष रह गए हैं। ऐसे में राजनीतिक पार्टियों ने प्रत्याशियों के लिए सर्वे शुरू कर दिया है। राजस्थान के लगभग सभी जिलों में इन दिनों सर्वे टीम पहुंच रही है। स्वयं को पत्रकार बताते हुए यह लोग क्षेत्र के गणमान्य लोगों से मिल रहे हैं। संभावित प्रत्याशियों के बारे में पूरी जानकारी ले रहे हैं। उनके समर्थक कैसे हैं? कितने हैं? उनकी 'फेसवेल्यू' क्या है?
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दोनों पार्टियां करा रही हैं सर्वे
दोनों राजनीतिक पार्टियां इन दिनों सर्वे करा रही हैं। हालांकि सर्वे का एक राउंड पहले ही पूरा हो चुका है। तब यह पता लगाया गया था कि कहां कौन जीत रहा है? अब उम्मीदवार के नाम से पता किया जा रहा है कि वो जीत सकता है या नहीं? जो लोग स्वयं को उम्मीदवार बताते हुए पिछले महीनों में सक्रिय हुए हैं, उनके नाम और मोबाइल नंबर के साथ तमाम तरह की रिपोर्ट इन सर्वेकर्ताओं के पास है।
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इसी महीने सौपेंगे रिपोर्ट
माना जा रहा है कि इसी महीने सर्वे पूरा हो जाएगा और पार्टी के राष्ट्रीय मुख्यालय को रिपोर्ट सौंप दी जाएगी। इस सर्वे के आधार पर ही अभी एक बार फिर यही लोग क्षेत्रों में फिर से जाएंगे। माना जा रहा है कि टिकट वितरण से पहले दो-तीन बार अलग-अलग तरह से यह पता लगाया जाएगा कि टिकट मांगने वाला कौनसा नेता जीत भी सकता है।
समीकरणों पर भी सवाल
बीजेपी, कांग्रेस
जिन क्षेत्रों में नए उम्मीदवार तैयार हुए हैं, वहां यह पता लगाया जा रहा है कि पुराने प्रत्याशी की क्या स्थिति रह सकती है। अगर वो बागी होकर मैदान में उतरता है तो पार्टी की क्या स्थिति रहेगी? जो नया प्रत्याशी है, उसका जनाधार है या नहीं? अगर है तो पुराने प्रत्याशी से बेहतर है या कमजोर?
कौनसी सीट पर हार तय है
यह भी पता किया जा रहा है कि किस सीट पर हार तय है? अगर ऐसी कोई सीट मिलती है तो वहां किसी मजबूत दावेदार का नाम भी जनता से ही पूछा जा रहा है ताकि कुछ हद तक पार्टी जोर आजमाइश कर सके।
सकारात्मक और नकारात्मक कारण
यह भी पता लगाया जा रहा है कि टिकट लेने वालों के कुछ सकारात्मक बिन्दू क्या है कि उसे क्यों उम्मीदवार बनाया जाए? वहीं नकारात्मक कारण क्या है कि उसे टिकट नहीं दिया जाए?
इनसे हो रहे हैं सवाल
सर्वे के लिए घूम रहे इन 'पार्टी जासूस' उस क्षेत्र के वरिष्ठ पत्रकारों के साथ सीधे संपर्क में रह रहे हैं। साथ ही संभावित दावेदारों से भी बात कर रहे हैं। उनके आसपास और सामान्य लोगों से बात हो रही है। क्षेत्र के सामाजिक क्षेत्र में प्रभावशाली लेकिन टिकट दावेदार ना हो, ऐसे व्यक्ति से भी बात हो रही है।
कौनसी सीट पर हार तय है
यह भी पता किया जा रहा है कि किस सीट पर हार तय है? अगर ऐसी कोई सीट मिलती है तो वहां किसी मजबूत दावेदार का नाम भी जनता से ही पूछा जा रहा है ताकि कुछ हद तक पार्टी जोर आजमाइश कर सके।
सकारात्मक और नकारात्मक कारण
यह भी पता लगाया जा रहा है कि टिकट लेने वालों के कुछ सकारात्मक बिन्दू क्या है कि उसे क्यों उम्मीदवार बनाया जाए? वहीं नकारात्मक कारण क्या है कि उसे टिकट नहीं दिया जाए?
इनसे हो रहे हैं सवाल
सर्वे के लिए घूम रहे इन 'पार्टी जासूस' उस क्षेत्र के वरिष्ठ पत्रकारों के साथ सीधे संपर्क में रह रहे हैं। साथ ही संभावित दावेदारों से भी बात कर रहे हैं। उनके आसपास और सामान्य लोगों से बात हो रही है। क्षेत्र के सामाजिक क्षेत्र में प्रभावशाली लेकिन टिकट दावेदार ना हो, ऐसे व्यक्ति से भी बात हो रही है।