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युवराज के चौकों-छक्कों पर दोबारा नहीं लगेगा ‘कैंसर का ग्रहण’

Sat, 02 Mar 2013 10:35 PM IST
चंडीगढ़/आशीष तिवारी
चंडीगढ़/आशीष तिवारी Updated Sat, 02 Mar 2013 10:35 PM IST
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yuvraj singh will not face cancer again

क्रिकेटर युवराज सिंह के चाहने वालों के लिए अच्छी खबर है। उनके चौकों-छक्कों पर कम से कम अब कैंसर की वजह से दोबारा ग्रहण नहीं लगेगा। जिस ‘लंग्स सेमिनोमा’ कैंसर से युवराज के कैरियर में ब्रेक लग गया था, वह अब उनसे मीलों दूर जा चुका है।

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अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित जिस ‘मेमोरियल स्लॉन केटरिंग सेंटर’ में युवराज सिंह का इलाज हुआ था, वहां के  कैंसर विशेषज्ञ प्रोफेसर जोसेफ जी. ज्यूरिख ने ‘अमर उजाला’ को बताया कि सेमिनोमा के मरीजों को समय पर इलाज मिल जाने से उन्हें यह बीमारी भविष्य में नहीं होती।
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चंडीगढ़ के पीजीआई में चल रही न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग की इंटरनेशनल कांग्रेस में हिस्सा लेने पहुंचे अमेरिका के कैंसर रोग विशेषज्ञ प्रो. जोसेफ ने बताया कि लंग्स सेमिनोमा बीमारी में समय पर मिली कीमोथेरेपी से मरीज को नई जिंदगी मिलती है।
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उन्होंने युवराज का नाम लिए बगैर कहा कि इस बीमारी को रोकने का सबसे बेहतर इलाज इस वक्त कीमोथेरेपी ही है। अगर किसी मरीज ने समय पर इसका इलाज ले लिया तो उसको दोबारा बीमारी होने की संभावना न के बराबर होती है।

सोसाइटी ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन ऑफ इंडिया के प्रेसीडेंट और कैंसर के इलाज में देश के बड़े नाम प्रो. पीके प्रधान ने बताया कि युवराज का लंग्स सेमिनोमा पहले चरण में था। चूंकि ये बीमारी जर्मसेल से फैलती है, उसे समय रहते फैलने नहीं दिया गया और कीमोथेरेपी से खत्म कर दिया गया। ऐसे में युवराज सिंह की क्रिकेट के कैरियर की पारी में फिलहाल कोई ब्रेक नहीं लगने वाला है।

उनका मानना है कि इलाज के बाद युवराज अब लंबी पारी खेल सकते हैं। प्रो. प्रधान के मुताबिक शुरुआती चरण में अगर कीमोथेरेपी से कैंसर सेल्स पूरी तरह से खत्म हो जाएं तो वह दोबारा पनप नहीं पाती हैं।

क्या होता है सेमिनोमा ट्यूमर
यह जर्म सेल ट्यूमर होते हैं। टेस्टीज में इस ट्यूमर के पाए जाने की संभावना सबसे ज्यादा होती है। सिगरेट, शराब या किसी भी तरह के शारीरिक संक्रमण से ये ट्यूमर लंग्स में हो जाते हैं, जो बाद में गंभीर बीमारी के रूप में सामने आते हैं।


ये होते हैं बीमारी के लक्षण

पेट के ऊपरी हिस्से और छाती के बायीं ओर दर्द होना। इसके अलावा अचानक बगैर पेट की तकलीफ के उल्टी महसूस होना। विशेषज्ञों के मुताबिक इस बीमारी में शुरुआती लक्षणों में उल्टी के दौरान खून भी आ सकता है।

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