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पठानकोट: पहाड़ी पर 2 किमी ऊपर कंटीली तार में फंसा तेंदुआ, वन्य जीव विभाग की टीम ने नौ घंटे की मशक्कत से सुरक्षित निकाला

Sun, 24 Oct 2021 01:08 AM IST
भूपेंद्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, पठानकोट
संवाद न्यूज एजेंसी, पठानकोट Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Sun, 24 Oct 2021 01:08 AM IST
सार

पठानकोट के दुरंगखड्ड गांव के पास पहाड़ी पर 2 किमी ऊपर कंटीली तार में तेंदुए का पैर फंस गया था। उसे वहां से सुरक्षित निकालने के लिए वन्य जीव विभाग की टीम को नौ घंटे की कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।

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Wildlife department team rescued leopard trapped in barbed wire in Pathankot
तेंदुए को पकड़कर पिंजरे में रखा। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

पठानकोट(पंजाब) के दुरंगखड्ड में वन्य जीव विभाग की टीम ने नौ घंटे की मशक्कत के बाद एक तेंदुए को काबू कर लिया है। बताया जा रहा है कि यह तेंदुआ सुबह 10 बजे गांव दुरंगखड्ड से 2 किलोमीटर ऊपर पहाड़ी पर कंटीली तार में फंसा था। जिसे वन्य जीव विभाग की टीम ने काबू किया। फिलहाल तेंदुए को धार के वन्य जीव विभाग कार्यालय में रखा गया है।

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सुबह फैसला किया जाएगा कि उसको कहां भेजा जाएगा। वन्य जीव विभाग के डिवीजनल फॉरेस्ट अफसर राजेश महाजन ने बताया कि उन्हें जानकारी मिली थी कि दुरंगखड्ड से 2 किलोमीटर ऊपर पहाड़ी पर एक तेंदुए की टांग कंटीली तार में फंसी है। उसी समय उन्होंने फिल्लौर और अमृतसर से टीम को बुलाया।
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डीएफओ ने बताया कि उक्त तेंदुआ स्वस्थ था। जिसके चलते उस पर ट्रेंक्युलाइजर के 2 फायर का कोई असर दिखाई नहीं दिया। जिसके चलते उसे पकड़ने में 9 घंटे का कड़ा अभियान चलाना पड़ा। सूत्रों ने बताया कि बचाव अभियान के दौरान तेंदुआ गहरी खड्ड में लटक गया था। वन्य जीव विभाग की टीम ने उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
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सूत्रों ने बताया कि कंटीली तार के कारण तेंदुआ घायल भी हो गया। जिसके चलते उसके प्राथमिक उपचार के लिए पशु पालन विभाग के अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे। इसके अलावा लोगों की भारी भीड़ को हटाने के लिए पुलिस प्रशासन की सहायता लेनी पड़ी। फिलहाल रात 10 बजे तक वन्य जीव विभाग की टीमों का बचाव अभियान जारी था। तेंदुए की सेहत पर अमृतसर और फिल्लौर की टीमों की नजर है। इस बचाव अभियान में रेंज अफसर जसवंत सिंह, जसविंदर सिंह फॉरेस्ट गार्ड, शिंगाराराम, सुखदेव राज, अभ्यास सैनी उपस्थित रहे।


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दस साल बाद दिखा तेंदुआ-डीएफओ
डीएफओ राजेश महाजन ने बताया कि इससे पहले 2011 में मामून में एक तेंदुए को काबू किया था। उसके बाद अब ऐसा हुआ है। डीएफओ के अनुसार उनकी सर्विस में यह सबसे कठिन ऑपरेशन था। तेंदुआ स्वस्थ था। जमीन से उसका निशाना नहीं लगाया जा सकता था। जिसके चलते टीम ने पेड़ पर चढ़कर तेंदुए पर निशाना लगाया। जिसके चलते उस पर बेहोशी की दवाओं का कोई असर नहीं हो रहा था। तेंदुए को ट्रेंक्यूलाइजर गन से 4 डॉट लगाए। सभी डॉट खत्म होने के बावजूद उस पर इसका कोई असर दिखाई नहीं दिया। जिसके बाद जान की परवाह किए बगैर पूरे स्टाफ ने पारंपरिक तरीका इस्तेमाल किया और तेंदुए को जाल लगाकर काबू किया। उसके बाद तेंदुए के पैर में फंसी तार को बामुश्किल काटा गया। डीएफओ ने बताया कि पहाड़ी इलाका और बारिश ने बचाव अभियान को खासा प्रभावित किया। उन्होंने बताया कि धार के वन्य जीव विभाग कार्यालय में तेंदुआ डॉक्टरों की निगरानी में है।

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