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...नहीं तो चंडीगढ़ कभी का पंजाब का हिस्सा होता

Tue, 20 Aug 2013 12:13 AM IST
चंडीगढ़/ब्यूरो
चंडीगढ़/ब्यूरो Updated Tue, 20 Aug 2013 12:13 AM IST
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then chandigarh part of the punjab state

अगर तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी और संत लौंगोवाल के बीच हुए समझौते को लागू किया जाता तो चंडीगढ़ को आज पंजाब का हिस्सा बने 28 साल हो चुके होते।

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लेकिन ये समझौता लागू कराने की मांग 28 वर्ष के बाद भी अधर में है।

इस समझौते को संसद ने भी सर्वसम्मति से मान्यता दी थी। समझौते पर दस्तखत करने के एक महीने से भी कम समय में अपनी जान देने वाले संत हरचंद सिंह लौंगोवाल की बरसी पर बार-बार श्रद्धांजलि दी जाती है लेकिन समझौता अभी तक लागू नहीं हो पाया।
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24 जुलाई 1985 को हुए समझौते के बाद 20 अगस्त 1985 को संत लौंगोवाल को गोलियों का शिकार होना पड़ा। इस मौके मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और मरहूम गुरचरन सिंह टोहड़ा भी समझौते के पक्ष में नहीं थे।
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कई सालों तक बादल लौंगोवाल की बरसी पर भी नहीं जाते रहे। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री सुरजीत सिंह बरनाला ने कहा कि उन्होंने संत लौंगोवाल को कहा था कि समझौते में जोखिम है तो संत ने कहा कोई बात नहीं मेरे कौन से बच्चे रोते हैं? यह कहकर बरनाला भी भावुक हो गए।


दूसरी ओर पंजाब विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के पूर्व प्रोफेसर गुरदर्शन सिंह ढ़िल्लों ने कहा कि समझौता से पंजाब का नुकसान हुआ है। यदि बातें तब भी लागू हो जाती तो इसका कोई लाभ नहीं होता।

समझौते के मुख्य बिंदू--
-26 जनवरी 1986- चंडीगढ़ पंजाब को सौंपना, बोली संबंधी सीमाओं को निर्धारित करने को आयोग का गठन होगा, हिन्दी बोलने वाले क्षेत्र हरियाणा को मिलेंगे। आयोग 31 दिसंबर 1985 तक अपनी रिपोर्ट देगा
- 1 जुलाई 1985 को जो पानी सभी राज्यों को मिलता है, मिलता रहेगा और अन्य पानी के लिए जस्टिस इराडी के नेतृत्व में ट्रिब्यूनल का गठन करना
- एस वाई एल नहर का निर्माण
- आनंदपुर साहिब प्रस्ताव पर विचार के लिए सरकारिया आयोग का गठन
- गुरुद्वारों के प्रबंध के लिए आल इंडिया गुरुद्वारा कानून बनेगा
-पंजाबी भाषा के विकास के लिए केंद्र करेगा प्रयास
- धर्म युद्ध मोर्चे में 1 अगस्त 1982 के बाद मरने वाले निर्दोष लोगों के परिजनों को मुआवजा देना।
- सेना में भरती का अकेला क्राइटेरिया मेरिट होगी।

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