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शाही मकबरों को संभालेगी पंजाब सरकार
मालेरकोटला (संगरूर)
Updated Mon, 30 Dec 2013 10:53 PM IST
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दशमेश पिता के छोटे साहिबजादों को जिंदा दीवारों में चिनवाने के खिलाफ उस समय आवाज बुलंद करने वाले एकमात्र मुस्लिम नवाब शेर मोहम्मद खां के गिरते शाही मकबरे को संभालने का बीड़ा पंजाब सरकार ने उठाया है। रविवार देर शाम मालेरकोटला पहुंचे राज्य के वित्त मंत्री परमिंदर सिंह ढींढसा ने साफ किया है कि पंजाब सरकार देश के पुरातत्व विभाग के साथ इस मुद्दे पर आखिरी बैठक करने जा रही है। बैठक में अगर विभाग ने मकबरों को तुरंत संभालने की जिम्मेदारी नहीं ली तो सूबे की सरकार इन शाही मकबरों का रखरखाव करेगी।
मालूम हो कि मालेरकोटला के सरहंदी गेट में स्थित शाही मकबरों की हालत दिन-प्रतिदिन खराब होती जा रही है। नवाब शेर मोहम्मद खां ही नहीं बल्कि यहां सभी नवाबजादे दफन हैं। नवाब घराने की इस अंतिम निशानी को मिट्टी में मिलने से बचाने के लिए अकाली दल के पूर्व विधायक अनवार अहमद खान के बेटे नदीम अनवार खान की मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल से बैठकें हो चुकी हैं लेकिन इन शाही मकबरों की देखभाल के कदम नहीं उठाए गए।
रविवार को यहां के सर्वहितकारी विद्या मंदिर के वार्षिक महोत्सव में मुख्य मेहमान के रूप में पहुंचे वित्त मंत्री ढींढसा ने साफ किया है कि खुद मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल इन मकबरों की संभाल के लिए चिंतित हैं लेकिन इससे पहले केंद्र सरकार के पुरातत्व विभाग ने इन शाही मकबरों को संभालने का जिम्मा उठाया था। विभाग इस कार्य से क्यों पीछे हट गया। उन्होंने कहा कि अब मकबरों की हालत काफी खस्ता हो गई है, इसीलिए पंजाब सरकार पुरातत्व विभाग से अंतिम बैठक करके इन्हें संभालने के लिए खुद प्रयास करेगी।
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मालूम हो कि मालेरकोटला के सरहंदी गेट में स्थित शाही मकबरों की हालत दिन-प्रतिदिन खराब होती जा रही है। नवाब शेर मोहम्मद खां ही नहीं बल्कि यहां सभी नवाबजादे दफन हैं। नवाब घराने की इस अंतिम निशानी को मिट्टी में मिलने से बचाने के लिए अकाली दल के पूर्व विधायक अनवार अहमद खान के बेटे नदीम अनवार खान की मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल से बैठकें हो चुकी हैं लेकिन इन शाही मकबरों की देखभाल के कदम नहीं उठाए गए।
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रविवार को यहां के सर्वहितकारी विद्या मंदिर के वार्षिक महोत्सव में मुख्य मेहमान के रूप में पहुंचे वित्त मंत्री ढींढसा ने साफ किया है कि खुद मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल इन मकबरों की संभाल के लिए चिंतित हैं लेकिन इससे पहले केंद्र सरकार के पुरातत्व विभाग ने इन शाही मकबरों को संभालने का जिम्मा उठाया था। विभाग इस कार्य से क्यों पीछे हट गया। उन्होंने कहा कि अब मकबरों की हालत काफी खस्ता हो गई है, इसीलिए पंजाब सरकार पुरातत्व विभाग से अंतिम बैठक करके इन्हें संभालने के लिए खुद प्रयास करेगी।
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