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कोरोना के साथ गर्मी का कहर: पंजाब के बठिंडा में 43 डिग्री पहुंचा तापमान, मुक्तसर में पानी को तरसे लोग
Thu, 29 Apr 2021 05:11 PM IST
निवेदिता वर्मा
संवाद न्यूज एजेंसी, बठिंडा/मुक्तसर (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, बठिंडा/मुक्तसर (पंजाब)
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Thu, 29 Apr 2021 05:11 PM IST
सार
रजबाहे के बाद अब जल घरों की डिग्गियों में भी पानी लगभग सूख चुका है। भीष्ण गर्मी में पानी की कमी से लोगों में हाहाकार मचा है। इस कारण लोग हैंडपंप के पानी पर निर्भर हो गए हैं।
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पंजाब में गरमी का कहर।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पंजाब में कोरोना के साथ अब गर्मी ने अपना कहर बरपाना शुरू कर दिया। गुरुवार को बठिंडा में न्यूनतम तापमान 23.4 एवं अधिकतम तापमान 43 डिग्री दर्ज किया गया। तापमान में एक दम से बढ़ोतरी होने से लोग बेहाल हो गए।
मौसम विभाग के अधिकारी सुरिंदरपाल सिंह ने बताया कि गुरुवार को अधिकतम तापमान 43 डिग्री दर्ज किया गया। इससे पहले बुधवार को अधिकतम तापमान 42.2 डिग्री दर्ज किया गया था। उन्होंने बताया कि अगले 24 घंटों के दौरान बारिश होने की संभावना है। अगर बारिश होती है तो तापमान में गिरावट आ सकती है।
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मौसम विभाग के अधिकारी सुरिंदरपाल सिंह ने बताया कि गुरुवार को अधिकतम तापमान 43 डिग्री दर्ज किया गया। इससे पहले बुधवार को अधिकतम तापमान 42.2 डिग्री दर्ज किया गया था। उन्होंने बताया कि अगले 24 घंटों के दौरान बारिश होने की संभावना है। अगर बारिश होती है तो तापमान में गिरावट आ सकती है।
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गहराया जलसंकट: रजबाहे के बाद जल घरों की डिग्गियां भी सूखी
नहरबंदी के चलते शहर में लोग पीने के पानी को तरस रहे हैं। रजबाहे के बाद अब जल घरों की डिग्गियों में भी पानी लगभग सूख चुका है। भीष्ण गर्मी में पानी की कमी से लोगों में हाहाकार मचा है। इस कारण लोग हैंडपंप के पानी पर निर्भर हो गए हैं।
मुक्तसर के मुख्य जल घर की डिग्गियों में पानी पहले ही खत्म हो चुका है। लोगों की समस्या को देखते हुए जल व सैनिटेशन विभाग की ओर से टिब्बी साहिब रोड स्थित जल घर की डिग्गी में बचे पानी को पांच टैंकरों की मदद से शहर के दूरदराज स्थित प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचाया जा रहा है। हालांकि ये टैंकर प्रतिदिन विभिन्न क्षेत्रों में 18 से 20 चक्कर लगाते हैं, मगर ज्यादा गर्मी के बीच यह पानी की सप्लाई भी नाममात्र साबित हो रही है। पानी की कमी पूरी करने के लिए लोग हैंड पंपों पर आश्रित हो गए हैं। मगर शहर के कई क्षेत्रों में जमीन के नीचे का पानी खारा होने के कारण यह न तो पीने लायक है न घरेलू प्रयोग में लाने योग्य। मगर मजबूरी में लोग हैंड पंपों का पानी इस्तेमाल कर रहे हैं।
जल व सैनिटेशन विभाग के एसडीओ जगमोहन सिंह का कहना है कि इरीगेशन विभाग की ओर से 4 मई को सरहिंद नहर में पानी की सप्लाई दी जाएगी। मुक्तसर माइनर में पानी आने के बाद पानी डिग्गियों में स्टोर किया जाएगा। इसके बाद शहर में पीने के पानी की सप्लाई यकीनी हो सकेगी। गौरतलब है कि नहर में पीने के पानी आने व पानी डिग्गियों में स्टोर होने में लंबा समय लगता है। इसलिए यह माना जा रहा है कि शहर में पानी की सप्लाई पहुंचने में 10 से 15 मई तक का समय लग सकता है, तब तक या तो लोगों को हैंड पंपों के पानी पर निर्भर रहना पड़ेगा या अपने स्तर पर पानी की कमी पूरी करने के लिए कोई और इंतजाम करना पड़ेगा।
मुक्तसर के मुख्य जल घर की डिग्गियों में पानी पहले ही खत्म हो चुका है। लोगों की समस्या को देखते हुए जल व सैनिटेशन विभाग की ओर से टिब्बी साहिब रोड स्थित जल घर की डिग्गी में बचे पानी को पांच टैंकरों की मदद से शहर के दूरदराज स्थित प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचाया जा रहा है। हालांकि ये टैंकर प्रतिदिन विभिन्न क्षेत्रों में 18 से 20 चक्कर लगाते हैं, मगर ज्यादा गर्मी के बीच यह पानी की सप्लाई भी नाममात्र साबित हो रही है। पानी की कमी पूरी करने के लिए लोग हैंड पंपों पर आश्रित हो गए हैं। मगर शहर के कई क्षेत्रों में जमीन के नीचे का पानी खारा होने के कारण यह न तो पीने लायक है न घरेलू प्रयोग में लाने योग्य। मगर मजबूरी में लोग हैंड पंपों का पानी इस्तेमाल कर रहे हैं।
जल व सैनिटेशन विभाग के एसडीओ जगमोहन सिंह का कहना है कि इरीगेशन विभाग की ओर से 4 मई को सरहिंद नहर में पानी की सप्लाई दी जाएगी। मुक्तसर माइनर में पानी आने के बाद पानी डिग्गियों में स्टोर किया जाएगा। इसके बाद शहर में पीने के पानी की सप्लाई यकीनी हो सकेगी। गौरतलब है कि नहर में पीने के पानी आने व पानी डिग्गियों में स्टोर होने में लंबा समय लगता है। इसलिए यह माना जा रहा है कि शहर में पानी की सप्लाई पहुंचने में 10 से 15 मई तक का समय लग सकता है, तब तक या तो लोगों को हैंड पंपों के पानी पर निर्भर रहना पड़ेगा या अपने स्तर पर पानी की कमी पूरी करने के लिए कोई और इंतजाम करना पड़ेगा।
रजबाहे के बाद अब जल घरों की डिग्गियों में भी पानी लगभग सूख चुका है। भीष्ण गर्मी में पानी की कमी से लोगों में हाहाकार मचा है। इस कारण लोग हैंडपंप के पानी पर निर्भर हो गए हैं।