फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Punjab ›   Rs five hundred million scam in railway

रेलकर्मियों की बीमा धनराशि में पचास करोड़ का घोटाला

Wed, 16 Oct 2013 10:56 PM IST
अमर उजाला, फिरोजपुर
अमर उजाला, फिरोजपुर Updated Wed, 16 Oct 2013 10:56 PM IST
विज्ञापन
Rs five hundred million scam in railway
नार्दर्न जोन रेलवे इंप्लाइज कोऑपरेटिव थ्रिपट एंड क्रेडिट सोसाइटी लिमिटेड में रेलकर्मियों के बीमा राशि में कथित तौर पर करीब पचास करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है।
विज्ञापन


तकरीबन 1800 मृतक रेलकर्मियों के परिजनों को बीमा की राशि भी नहीं मिली है। यह सब उक्त सोसाइटी के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की मिलीभगत से हुआ है। बीमा राशि में घोटाले की खबर फैलते ही नार्दर्न रेलवे के कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है।
विज्ञापन


रेल डिवीजन फिरोजपुर के उच्चपदस्थ सूत्रों का कहना है कि सोसाइटी में रेलकर्मियों की बीमा पॉलिसी 02 दिसंबर, 1998 में बोर्ड ऑफ डायरेक्टर की बैठक में लिए फैसले के बाद ली गई थी। इसमें फैसला हुआ कि सभी रेलकर्मियों की ग्रुप बीमा पॉलिसी होगी परंतु ऐसा नहीं हुआ। उक्त सोसाइटी के कुछेक वरिष्ठ अधिकारियों की मिलीभगत के चलते 18 साल से 42 साल तक के रेलकर्मियों का व्यक्तिगत और 43 साल से 58 साल के रेलकर्मियों का ग्रुप बीमा किया गया। दोनों के खाते अलग-अलग दिल्ली स्थित ब्रांचों में खोले गए ताकि किसी को पता न चल सके।
विज्ञापन
विज्ञापन


बताया जा रहा है कि मौजूदा समय में उक्त सोसाइटी के करीब 72 हजार सदस्य हैं। एक रेलकर्मी ने आयकर में रिबेट लेने के लिए बीमा कंपनी को पत्र लिखकर पॉलिसी नंबर मांगा। तब पता चला कि 2002 में ग्रुप बीमा वाली पॉलिसी लैप्स हो गई, जबकि सोसाइटी के अधिकारी रेलकर्मियों के वेतन से प्रतिमाह पचास रुपये काटते रहे। व्यक्तिगत बीमा पॉलिसी चलती रही क्योंकि इसमें अधिकारियों को एजेंटों से मोटी कमीशन मिल रही थी, एजेंट भी उनके रिश्तेदार ही थे। बताया जा रहा है कि व्यक्तिगत बीमा पॉलिसी में एजेंट को एक करोड़ बीस लाख रुपये की कमीशन बनी थी।  

ऐसे हुआ घोटाला उजागर
सोसाइटी मेंबर व रेलकर्मी नवीन कुमार पीर ने सूचना के अधिकार के तहत अपनी पॉलिसी संबंधी जानकारी मांगी। ग्रुप बीमा की पॉलिसी केजी मार्ग ब्रांच में हुई थी लेकिन उसे जानकारी के लिए बजीरपुर ब्रांच भेज दिया। वहां से पता चला कि रेलकर्मियों की पॉलिसी दो हुई हैं। एक व्यक्तिगत और दूसरी ग्रुप। व्यक्तिगत में सोसाइटी के कई वरिष्ठ अधिकारियों को अपने रिश्तेदारों के माध्यम मोटी कमीशन मिल रही है। व्यक्तिगत पॉलिसी अवैध है और इसमें जितने भी रेलकर्मियों की पॉलिसी हुई है उनमें सभी कर्मियों के जाली हस्ताक्षर हैं। इस संबंधी किसी रेलकर्मी को पता ही नहीं।

बीमा कंपनी के नियम
बीमा कंपनी का नियम है कि जिस व्यक्ति की व्यक्तिगत बीमा पॉलिसी होती है, उसे एक सर्टिफिकेट जारी किया जाता है, जो कि उक्त सोसाइटी द्वारा की गई पॉलिसी में नहीं जारी हुए। दूसरा हर साल पॉलिसी रिन्यू होती है।

रेलकर्मियों के छह साल के पैसे किए खुर्दबुर्द
सोसाइटी अधिकारियों द्वारा बीमा कंपनी को पैसे जमा नहीं करवाए जाने के चलते 2002 में ग्रुप बीमा पॉलिसी लैप्स हो गई जबकि सोसाइटी के अधिकारी रेलकर्मियों से उनकी तनख्वाह से हर माह पचास रुपये की कटौती करते रहे। यह सिलसिला लगभग छह साल तक चला। ग्रुप पॉलिसी में लगभग 22000 रेलकर्मी थे। एक माह की धनराशि ग्यारह लाख बनती है, एक साल की लगभग एक करोड़ 32 लाख और छह साल की लगभग आठ करोड़ रुपये बनते हैं।


बैठक में लिए गए थे फैसले
रेलकर्मियों का बीमा करने से पूर्व बोर्ड ऑफ डायरेक्टर की बैठक में फैसला लिया गया था कि कर्मियों का ग्रुप बीमा होगा। उनके वेतन से पचास रुपये प्रतिमाह कटेंगे। कोई एजेंट नहीं होगा। नार्दर्न रेलवे के लखनऊ व मुरादाबाद डिवीजन छोड़कर दिल्ली में अजमेरी गेट, तुगलाबाद व गाजियाबाद, अंबाला डिवीजन में अंबाला व पटियाला, फिरोजपुर डिवीजन में फिरोजपुर, अमृतसर, पठानकोट व लुधियाना व जगाधरी वर्कशाप समेत  लगभग उक्त सोसाइटी की एक दर्जन ब्रांचें हैं।



विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed