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मोदी सरकार में आसान नहीं होगी शिअद की डगर
अनिल भारद्वाज/ अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 15 May 2014 11:42 PM IST
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एग्जिट पोल के नतीजों पर यकीन करें तो केंद्र में अगली सरकार एनडीए की बनने जा रही है। यह संकेत एनडीए के अहम घटक शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के लिए प्रसन्नता के साथ ही चुनौतीपूर्ण भी हैं।
पंजाब के बुनियादी मुद्दों सहित वित्तीय और औद्योगिक पैकेज के मसलों पर अब तक केंद्र सरकार पर निशाना साधते आए शिअद के लिए इनका हल पहली बड़ी चुनौती होगी।
इसके अलावा 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों को न्याय दिलाने से संबंधित वादों की कसौटी पर भी शिअद को खरा उतरना होगा।
प्रॉपर्टी टैक्स लागू करने के लिए केंद्र की नीतियों को जिम्मेदार ठहराते रहे अकाली-भाजपा नेताओं के लिए इसकी समाप्ति के लिए कदम उठाना एक बड़ा चैलेंज होगा।
इसलिए एनडीए सरकार बनने की सूरत में निश्चित रूप से शिअद के लिए इसका कार्यकाल चुनौतियों भरा होगा।
यह चुनौती न केवल केंद्र सरकार की मदद से पंजाब को आर्थिक संकट से बाहर निकालने की होगी, बल्कि लोकसभा
चुनाव प्रचार के दौरान जारी दल के घोषणापत्र में किए वादों को पूरा करने की भी होगी।
शिअद मैनिफेस्टो के मुख्य बिंदु पर एक नजर
- चंडीगढ़ व प्रदेश से बाहर रह गए पंजाबी बोलते इलाकों को पंजाब में शामिल करवाना
- रायपेरियन सिद्धांत के अनुसार ही नदी जल बंटवारा
- फेडरल ढांचे के तहत केंद्रीय टैक्सों में राज्य का हिस्सा 50 प्रतिशत करवाना
- 1984 के सिख विरोधी दंगों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के जज के अधीन जांच आयोग का गठन
- पीड़ितों को शीघ्र न्याय के लिए फास्ट ट्रैक अदालतों की स्थापना
- पंजाब के लिए विशेष औद्योगिक-आर्थिक पैकेज
- नई औद्योगिक इकाइयों के लिए सेंट्रल एक्साइज और इंकम टैक्स में 100 प्रतिशत माफी
- तीन लाख युवकों को नौकरी
- कृषि उत्पादों के लिए 50 प्रतिशत मुनाफे वाला न्यूनतम समर्थन मूल्य फार्मूला
- सभी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन और लाभप्रद मूल्य
- प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली क्षति की भरपाई के लिए फसली बीमा
- कृषि के लिए सस्ती ब्याज दरों पर ऋण की सुविधा
- रेत-बजरी की कमी को दूर करने के लिए केंद्रीय पर्यावरण कानूनों में संशोधन, ताकि रेत की खड्डों और क्रेशरों को तुरंत मंजूरी मिले
- अटारी-वाघा चेकपोस्ट के जरिए अंतरराष्ट्रीय व्यापार को मुंबई-कराची क्षेत्र के व्यापार के समान लाना
- फिरोजपुर एवं फाजिल्का के रास्ते पाकिस्तान और अन्य देशों से व्यापार
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पंजाब के बुनियादी मुद्दों सहित वित्तीय और औद्योगिक पैकेज के मसलों पर अब तक केंद्र सरकार पर निशाना साधते आए शिअद के लिए इनका हल पहली बड़ी चुनौती होगी।
इसके अलावा 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों को न्याय दिलाने से संबंधित वादों की कसौटी पर भी शिअद को खरा उतरना होगा।
प्रॉपर्टी टैक्स लागू करने के लिए केंद्र की नीतियों को जिम्मेदार ठहराते रहे अकाली-भाजपा नेताओं के लिए इसकी समाप्ति के लिए कदम उठाना एक बड़ा चैलेंज होगा।
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इसलिए एनडीए सरकार बनने की सूरत में निश्चित रूप से शिअद के लिए इसका कार्यकाल चुनौतियों भरा होगा।
यह चुनौती न केवल केंद्र सरकार की मदद से पंजाब को आर्थिक संकट से बाहर निकालने की होगी, बल्कि लोकसभा
चुनाव प्रचार के दौरान जारी दल के घोषणापत्र में किए वादों को पूरा करने की भी होगी।
शिअद मैनिफेस्टो के मुख्य बिंदु पर एक नजर
- चंडीगढ़ व प्रदेश से बाहर रह गए पंजाबी बोलते इलाकों को पंजाब में शामिल करवाना
- रायपेरियन सिद्धांत के अनुसार ही नदी जल बंटवारा
- फेडरल ढांचे के तहत केंद्रीय टैक्सों में राज्य का हिस्सा 50 प्रतिशत करवाना
- 1984 के सिख विरोधी दंगों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के जज के अधीन जांच आयोग का गठन
- पीड़ितों को शीघ्र न्याय के लिए फास्ट ट्रैक अदालतों की स्थापना
- पंजाब के लिए विशेष औद्योगिक-आर्थिक पैकेज
- नई औद्योगिक इकाइयों के लिए सेंट्रल एक्साइज और इंकम टैक्स में 100 प्रतिशत माफी
- तीन लाख युवकों को नौकरी
- कृषि उत्पादों के लिए 50 प्रतिशत मुनाफे वाला न्यूनतम समर्थन मूल्य फार्मूला
- सभी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन और लाभप्रद मूल्य
- प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली क्षति की भरपाई के लिए फसली बीमा
- कृषि के लिए सस्ती ब्याज दरों पर ऋण की सुविधा
- रेत-बजरी की कमी को दूर करने के लिए केंद्रीय पर्यावरण कानूनों में संशोधन, ताकि रेत की खड्डों और क्रेशरों को तुरंत मंजूरी मिले
- अटारी-वाघा चेकपोस्ट के जरिए अंतरराष्ट्रीय व्यापार को मुंबई-कराची क्षेत्र के व्यापार के समान लाना
- फिरोजपुर एवं फाजिल्का के रास्ते पाकिस्तान और अन्य देशों से व्यापार