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पंजाब चुनाव: चन्नी ने भाजपा-अकाली पर डेरा सच्चा सौदा से समर्थन लेने का लगाया आरोप, जानें राज्य में राम रहीम का कितना असर
Sun, 20 Feb 2022 07:18 PM IST
हिमांशु मिश्रा
इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु मिश्रा
Updated Sun, 20 Feb 2022 07:18 PM IST
सार
पंजाब की 117 सीटों पर आज वोटिंग हुई। इस बीच, मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने भाजपा और अकाली दल पर बड़ा आरोप लगाया।
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मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और डेरा प्रमुख राम रहीम।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने वोटिंग के दौरान भारतीय जनता पार्टी और शिरोमणि अकाली दल पर बड़ा आरोप लगा दिया। चन्नी ने कहा कि भाजपा और अकाली दल का गठबंधन है। ये लोग मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं। दोनों पार्टियां साथ मिलकर डेरा सच्चा सौदा से समर्थन ले रही हैं। आम आदमी पार्टी पर भी धुरी में डेरा का समर्थन लेने का आरोप लगाया।
चन्नी ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री चन्नी ने ट्विटर पर लिखा, 'अकाली और भाजपा की साझेदारी अब खुलकर सामने आ चुकी है। ये दोनों डेरा सच्चा सौदा से समर्थन ले रहे हैं। उन्हें टीम बनाने दो। पंजाब के लोग टीम बनाकर अपने वोट से इन्हें सबक सिखाएंगे। बारात जिन्नी मर्जी वड्डी होव, पिंड तो घट ही हुंदी है।'
एक अन्य ट्वीट में चन्नी ने आम आदमी पार्टी से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार भगवंत मान सिंह पर भी निशाना साधा। चन्नी ने लिखा, भगवंत मान और आम आदमी पार्टी भी धुरी में डेरा का समर्थन ले रही है। सभी राजनीतिक दलों के षड़यंत्र के बावजूद रिपोर्ट ये मिल रही है कि पंजाब में पूर्ण बहुमत के साथ कांग्रेस सरकार बनाने जा रही है।
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पंजाब के कितने जिलों में डेरे का असर और कितना?
पंजाब की कुल 117 सीटों में से करीब 59 सीटों पर डेरे का प्रभाव माना जाता है। इनमें लुधियाना, पटियाला, फिरोजपुर, मोगा, फजिलका, अबोहर, फरीदकोट, मुक्तसर साहिब, बठिंडा, फतेहगढ़ साहिब, बरनाला, मनसा संगरूर जैसे जिले शामिल हैं। यहां के करीब 40 लाख वोटर्स पर डेरे का असर है। राजनीतिक विंग शुरू करने के बाद सबसे पहले साल 2007 में डेरे का प्रभाव चुनाव में देखने को मिला था।
2007 : पंजाब विधानसभा चुनाव 2007 में डेरा सच्चा सौदा ने अपने अनुयायियों को कांग्रेस पार्टी के लिए वोट करने का निर्देश दिया था। इसके चलते शिरोमणि अकाली दल के कई उम्मीदवारों को हार का सामना करना पड़ गया। उस वक्त अकाली दल को 48 और कांग्रेस को 44 सीटें मिलीं थीं। हालांकि, भाजपा की 19 सीटों की मदद से अकाली दल सरकार बनाने में कामयाब हो गई। इसके चलते डेरा और अकालियों के रिश्ते जरूर खराब हो गए।
2012 : कैप्टन अमरिंदर सिंह खुद डेरा सच्चा सौदा से समर्थन मांगने के लिए गुरमीत राम रहीम से मिले। लेकिन 2007 से सबक लेते हुए डेरे ने उस साल किसी भी राजनीतिक दल को खुलकर समर्थन नहीं दिया। उस वक्त डेरे ने कहा कि वह अलग-अलग सीटों पर प्रत्याशियों के अनुसार समर्थन करेंगे। इसका फायदा अकाली दल को मिला। तब अकाली दल के कई प्रत्याशियों को डेरा का साथ मिला और अकाली दल ने 56 सीटें जीतीं। भाजपा के 12 सीटों की बदौलत फिर से अकाली सरकार बनी।
2014: पंजाब विधानसभा चुनाव के दो साल बाद यानी 2014 के लोकसभा चुनावों में डेरा सच्चा सौदा ने अकाली दल और भाजपा को समर्थन दिया। हरियाणा विधानसभा के चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरमीत राम रहीम के प्रति सम्मान व्यक्त किया था। बाद में राम रहीम ने भी खुले मंच से प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ की।
2017 : पंजाब की राजनीति पर अच्छी पकड़ रखने वाले दीपक यादव बताते हैं कि 2017 में कई सीटों पर डेरा ने अकाली तो कई पर कांग्रेस का साथ दिया। कांग्रेस इसका फायदा उठाने में कामयाब रही और जीत हासिल कर ली।
2019 : लोकसभा चुनाव 2019 में भी डेरा सच्चा ने भाजपा को समर्थन दिया। इसके चलते हरियाणा और पंजाब दोनों जगह भाजपा ने कई सीटें जीतीं। पंजाब में अकाली दल ने भी काफी सीटें जीत लीं।
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चन्नी ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री चन्नी ने ट्विटर पर लिखा, 'अकाली और भाजपा की साझेदारी अब खुलकर सामने आ चुकी है। ये दोनों डेरा सच्चा सौदा से समर्थन ले रहे हैं। उन्हें टीम बनाने दो। पंजाब के लोग टीम बनाकर अपने वोट से इन्हें सबक सिखाएंगे। बारात जिन्नी मर्जी वड्डी होव, पिंड तो घट ही हुंदी है।'
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एक अन्य ट्वीट में चन्नी ने आम आदमी पार्टी से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार भगवंत मान सिंह पर भी निशाना साधा। चन्नी ने लिखा, भगवंत मान और आम आदमी पार्टी भी धुरी में डेरा का समर्थन ले रही है। सभी राजनीतिक दलों के षड़यंत्र के बावजूद रिपोर्ट ये मिल रही है कि पंजाब में पूर्ण बहुमत के साथ कांग्रेस सरकार बनाने जा रही है।
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पंजाब के कितने जिलों में डेरे का असर और कितना?
पंजाब की कुल 117 सीटों में से करीब 59 सीटों पर डेरे का प्रभाव माना जाता है। इनमें लुधियाना, पटियाला, फिरोजपुर, मोगा, फजिलका, अबोहर, फरीदकोट, मुक्तसर साहिब, बठिंडा, फतेहगढ़ साहिब, बरनाला, मनसा संगरूर जैसे जिले शामिल हैं। यहां के करीब 40 लाख वोटर्स पर डेरे का असर है। राजनीतिक विंग शुरू करने के बाद सबसे पहले साल 2007 में डेरे का प्रभाव चुनाव में देखने को मिला था।
2007 : पंजाब विधानसभा चुनाव 2007 में डेरा सच्चा सौदा ने अपने अनुयायियों को कांग्रेस पार्टी के लिए वोट करने का निर्देश दिया था। इसके चलते शिरोमणि अकाली दल के कई उम्मीदवारों को हार का सामना करना पड़ गया। उस वक्त अकाली दल को 48 और कांग्रेस को 44 सीटें मिलीं थीं। हालांकि, भाजपा की 19 सीटों की मदद से अकाली दल सरकार बनाने में कामयाब हो गई। इसके चलते डेरा और अकालियों के रिश्ते जरूर खराब हो गए।
2012 : कैप्टन अमरिंदर सिंह खुद डेरा सच्चा सौदा से समर्थन मांगने के लिए गुरमीत राम रहीम से मिले। लेकिन 2007 से सबक लेते हुए डेरे ने उस साल किसी भी राजनीतिक दल को खुलकर समर्थन नहीं दिया। उस वक्त डेरे ने कहा कि वह अलग-अलग सीटों पर प्रत्याशियों के अनुसार समर्थन करेंगे। इसका फायदा अकाली दल को मिला। तब अकाली दल के कई प्रत्याशियों को डेरा का साथ मिला और अकाली दल ने 56 सीटें जीतीं। भाजपा के 12 सीटों की बदौलत फिर से अकाली सरकार बनी।
2014: पंजाब विधानसभा चुनाव के दो साल बाद यानी 2014 के लोकसभा चुनावों में डेरा सच्चा सौदा ने अकाली दल और भाजपा को समर्थन दिया। हरियाणा विधानसभा के चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरमीत राम रहीम के प्रति सम्मान व्यक्त किया था। बाद में राम रहीम ने भी खुले मंच से प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ की।
2017 : पंजाब की राजनीति पर अच्छी पकड़ रखने वाले दीपक यादव बताते हैं कि 2017 में कई सीटों पर डेरा ने अकाली तो कई पर कांग्रेस का साथ दिया। कांग्रेस इसका फायदा उठाने में कामयाब रही और जीत हासिल कर ली।
2019 : लोकसभा चुनाव 2019 में भी डेरा सच्चा ने भाजपा को समर्थन दिया। इसके चलते हरियाणा और पंजाब दोनों जगह भाजपा ने कई सीटें जीतीं। पंजाब में अकाली दल ने भी काफी सीटें जीत लीं।