{"_id":"9b34ecb02778d85c9912496da377d046","slug":"peasant-leader-killed-in-nabha-jail","type":"story","status":"publish","title_hn":"नाभा जेल में किसान नेता की मौत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नाभा जेल में किसान नेता की मौत
अमर उजाला, पटियाला
Updated Fri, 27 Sep 2013 10:28 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पंजाब भर में सड़क रोको आंदोलन को रोकने के लिए गिरफ्तार किए किसानों में से एक किसान नेता भूरा सिंह (70) की नाभा की नई जेल में वीरवार रात मौत हो गई।
अपने साथी की मौत पर जेल में बंद बाकी किसानों ने हंगामा कर दिया और जेल प्रशासन में उसके इलाज में लापरवाही करने का आरोप लगाते हुए मरे किसान नेता की लाश को उठाने नहीं दिया। जवाब में जेल कर्मचारियों ने देर रात किसानों पर जमकर लाठियां भांजी। इससे दर्जन भर के करीब किसान घायल हो गए।
बाद में जेल प्रशासन ने रात को ही सभी किसानों को छोड़ दिया। घायल किसान सिविल अस्पताल में जाकर दाखिल हो गए। दिन भर माहौल खराब होने के डर के चलते नाभा पुलिस छाबनी में तबदील रहा। खबर लिखे जाने तक जेल में मरे किसान नेता का पोस्टमार्टम नहीं हो सका था। उसके वारिसों का इंतजार किया जा रहा था।
भारतीय किसान यूनियन एकता (डकौंदा) के ओहदेदार सतवंत सिंह वजीदपुर ने बताया कि अमृतसर में किसानों ने पावरकॉम की ओर से बिजली मीटरों को घरों से बाहर निकालने के विरोध में प्रदर्शन किया था। कई किसानों को गिरफ्तार करने के विरोध में भारतीय किसान यूनियन (एकता) जोगिंदर सिंह उगराहा ग्रुप समेत अन्य जत्थेबंदियों ने 20 सितंबर को पंजाब भर में सड़क रोको आंदोलन की काल दी थी।
विज्ञापन
18 और 19 सितंबर को ही पुलिस ने किसानों को घरों से उठा लिया जेलों में डाल दिया था। करीब 95 किसान नाभा-भवानीगढ़ रोड स्थित नई जेल में बंद थे। इनमें से किसान नेता भूरा सिंह निवासी कोट धरमू की वीरवार बाद दोपहर करीब तीन बजे तबीयत खराब हो गई। बताया जाता है कि उसे उल्टी के साथ दौरा पड़ा।
किसी अच्छे अस्पताल में भेजने के बजाय प्रशासन ने उसे जेल के अस्पताल में ही जरूरी चिकित्सा देकर शाम छह बजे दोबारा बैरक भेज दिया। उसकी तबीयत बिगड़ती जा रही थी। किसानों ने जेल प्रशासन से कई बार उसे अच्छे अस्पताल ले जाने को कहा, लेकिन जेल प्रशासन नहीं माना। वीरवार रात करीब साढ़े आठ बजे भूरा सिंह की बैरक में ही मौत हो गई।
किसान नेता सतवंत सिंह ने कहा कि जब किसानों ने भूरा सिंह की लाश न उठाने दी, तो जवाब में जेल कर्मचारियों ने किसानों पर लाठियां भांजी। इससे दो किसानों की बाजू टूट गई, जबकि 10 किसानों के चोटें भी लगीं। घायल किसानों को उनके साथियों ने सिविल अस्पताल नाभा में दाखिल कराया। घायलों में नछतर सिंह, कर्म सिंह, मेजर सिंह, मलकीत सिंह, महिंदर सिंह, जोगिंदर सिंह, इंद्रजीत सिंह, बंत सिंह, जरनैल सिंह, नाजर सिंह शामिल रहे।
आज सुबह इन सभी किसानों ने अस्पताल में ही धरना लगा दिया। किसानों के धरने के चलते अस्पताल के दो गेटों में से एक को बंद कर दिया गया। खबर लिखे जाने तक मरे किसान का पोस्टमार्टम नहीं हो पाया था। पोस्टमार्टम के लिए डाक्टरों के बोर्ड का गठन कर दिया गया था। मरे किसान का पोस्टमार्टम शनिवार सुबह उसके वारिसों की मौजूदगी में होगा।
पीड़ित परिवार को मिले दस लाख मुआवजा: भाकियू
भारतीय किसान यूनियन एकता (डकौंदा) समेत एसोएिशन फार डेमोक्रेटिक राइट्स पंजाब के ओहदेदारों डा. रणजीत सिंह घुम्मन, विधु शेखर भारद्वाज और किसान नेता सतवंत सिंह ने मांग की है कि दोषी जेल अधिकारियों के खिलाफ जांच बिठाई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। पीड़ित परिवार को 10 लाख का मुआवजा दिया जाए और परिवार के एक वारिस को सरकारी नौकरी दी जाए। साथ ही लाठीचार्ज में घायल किसानों में से प्रत्येक को 50-50 हजार हर्जाना दिया जाए।
मामले की होगी जुडीशियल जांच
मामले में जुडीशियल जांच होगी। जेल सुपरिंटेंडेंट समेत डीएसपी (डी) मनजीत सिंह बराड़ ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने कहा कि पुलिस कस्टडी में मौत होने के मामले में जुडीशियल जांच ही होती है। वहीं, एडीजीपी (जेल) राजपाल मीना ने इस मामले की रिपोर्ट तलब कर ली है। जेल सुपरिंटेंडेंट ने इसकी पुष्टि की। साथ ही ह्यूमन राइट्स आयोग ने भी इस मामले में हस्तक्षेप किया है।
विज्ञापन
अपने साथी की मौत पर जेल में बंद बाकी किसानों ने हंगामा कर दिया और जेल प्रशासन में उसके इलाज में लापरवाही करने का आरोप लगाते हुए मरे किसान नेता की लाश को उठाने नहीं दिया। जवाब में जेल कर्मचारियों ने देर रात किसानों पर जमकर लाठियां भांजी। इससे दर्जन भर के करीब किसान घायल हो गए।
बाद में जेल प्रशासन ने रात को ही सभी किसानों को छोड़ दिया। घायल किसान सिविल अस्पताल में जाकर दाखिल हो गए। दिन भर माहौल खराब होने के डर के चलते नाभा पुलिस छाबनी में तबदील रहा। खबर लिखे जाने तक जेल में मरे किसान नेता का पोस्टमार्टम नहीं हो सका था। उसके वारिसों का इंतजार किया जा रहा था।
विज्ञापन
भारतीय किसान यूनियन एकता (डकौंदा) के ओहदेदार सतवंत सिंह वजीदपुर ने बताया कि अमृतसर में किसानों ने पावरकॉम की ओर से बिजली मीटरों को घरों से बाहर निकालने के विरोध में प्रदर्शन किया था। कई किसानों को गिरफ्तार करने के विरोध में भारतीय किसान यूनियन (एकता) जोगिंदर सिंह उगराहा ग्रुप समेत अन्य जत्थेबंदियों ने 20 सितंबर को पंजाब भर में सड़क रोको आंदोलन की काल दी थी।
विज्ञापन
18 और 19 सितंबर को ही पुलिस ने किसानों को घरों से उठा लिया जेलों में डाल दिया था। करीब 95 किसान नाभा-भवानीगढ़ रोड स्थित नई जेल में बंद थे। इनमें से किसान नेता भूरा सिंह निवासी कोट धरमू की वीरवार बाद दोपहर करीब तीन बजे तबीयत खराब हो गई। बताया जाता है कि उसे उल्टी के साथ दौरा पड़ा।
किसी अच्छे अस्पताल में भेजने के बजाय प्रशासन ने उसे जेल के अस्पताल में ही जरूरी चिकित्सा देकर शाम छह बजे दोबारा बैरक भेज दिया। उसकी तबीयत बिगड़ती जा रही थी। किसानों ने जेल प्रशासन से कई बार उसे अच्छे अस्पताल ले जाने को कहा, लेकिन जेल प्रशासन नहीं माना। वीरवार रात करीब साढ़े आठ बजे भूरा सिंह की बैरक में ही मौत हो गई।
किसान नेता सतवंत सिंह ने कहा कि जब किसानों ने भूरा सिंह की लाश न उठाने दी, तो जवाब में जेल कर्मचारियों ने किसानों पर लाठियां भांजी। इससे दो किसानों की बाजू टूट गई, जबकि 10 किसानों के चोटें भी लगीं। घायल किसानों को उनके साथियों ने सिविल अस्पताल नाभा में दाखिल कराया। घायलों में नछतर सिंह, कर्म सिंह, मेजर सिंह, मलकीत सिंह, महिंदर सिंह, जोगिंदर सिंह, इंद्रजीत सिंह, बंत सिंह, जरनैल सिंह, नाजर सिंह शामिल रहे।
आज सुबह इन सभी किसानों ने अस्पताल में ही धरना लगा दिया। किसानों के धरने के चलते अस्पताल के दो गेटों में से एक को बंद कर दिया गया। खबर लिखे जाने तक मरे किसान का पोस्टमार्टम नहीं हो पाया था। पोस्टमार्टम के लिए डाक्टरों के बोर्ड का गठन कर दिया गया था। मरे किसान का पोस्टमार्टम शनिवार सुबह उसके वारिसों की मौजूदगी में होगा।
पीड़ित परिवार को मिले दस लाख मुआवजा: भाकियू
भारतीय किसान यूनियन एकता (डकौंदा) समेत एसोएिशन फार डेमोक्रेटिक राइट्स पंजाब के ओहदेदारों डा. रणजीत सिंह घुम्मन, विधु शेखर भारद्वाज और किसान नेता सतवंत सिंह ने मांग की है कि दोषी जेल अधिकारियों के खिलाफ जांच बिठाई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। पीड़ित परिवार को 10 लाख का मुआवजा दिया जाए और परिवार के एक वारिस को सरकारी नौकरी दी जाए। साथ ही लाठीचार्ज में घायल किसानों में से प्रत्येक को 50-50 हजार हर्जाना दिया जाए।
मामले की होगी जुडीशियल जांच
मामले में जुडीशियल जांच होगी। जेल सुपरिंटेंडेंट समेत डीएसपी (डी) मनजीत सिंह बराड़ ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने कहा कि पुलिस कस्टडी में मौत होने के मामले में जुडीशियल जांच ही होती है। वहीं, एडीजीपी (जेल) राजपाल मीना ने इस मामले की रिपोर्ट तलब कर ली है। जेल सुपरिंटेंडेंट ने इसकी पुष्टि की। साथ ही ह्यूमन राइट्स आयोग ने भी इस मामले में हस्तक्षेप किया है।