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पंजाब में कमजोर मानसून: 2026 में 38 फीसदी कम बारिश, भूजल पर संकट
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जून से सितंबर तक 439.8 मिमी की सामान्य बारिश के मुकाबले सिर्फ 272.8 मिमी हुई
2000 के बाद तीसरा सबसे कम बारिश वाला साल रहा, 2012 में 262.2 मिमी व 2014 में 243.9 मिमी की बारिश हुई थी
रिंपी गुप्ता
पटियाला। इस बार मानसून की विदाई के साथ बारिश के आंकड़ों ने चिंता बढ़ा दी है। जून से सितंबर 2026 तक प्रदेश में सामान्य से 38 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई। यह 2000 के बाद तीसरा सबसे कम बारिश वाला साल रहा है।
इस अवधि में केवल 272.8 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि सामान्य आंकड़ा 439.8 मिलीमीटर है। इससे पहले 2014 में 50 फीसदी और 2012 में 47 फीसदी कम बारिश हुई थी। पिछले साल 2025 में 620.9 मिलीमीटर बारिश हुई थी, जो सामान्य से 41 फीसदी अधिक थी। इस साल यह आंकड़ा घटकर 272.8 मिलीमीटर रह गया है। सिर्फ एक साल में मानसूनी बारिश में भारी गिरावट आई है। 2024 में भी 317.3 मिलीमीटर बारिश हुई थी, जो सामान्य से 28 फीसदी कम थी। पंजाब ने लगातार दो साल कमजोर मानसून का सामना किया है।
भूजल पर बढ़ता दबाव
2026 में जून और सितंबर में सिर्फ 29.5-29.5 मिलीमीटर बारिश हुई। जुलाई में 119.3 मिमी और अगस्त में 94.5 मिमी बारिश दर्ज की गई। यह बारिश जून और सितंबर की भारी कमी की भरपाई नहीं कर पाई। पंजाब की खेती भूजल पर बहुत निर्भर है, जिससे सिंचाई के लिए दबाव बढ़ेगा। मानसून की कमजोरी से भूजल का प्राकृतिक रिचार्ज भी प्रभावित हुआ है।
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साल-- कितनी बारिश हुई-प्रतिशत
2026: 272.8 मिमी | 38% कम
2025: 620.9 मिमी | 41% ज्यादा
2024: 314.6 मिमी | 28% कम
2014: 243.9 मिमी | 50% कम
2012: 262.2 मिमी | 47% कम
मानसून के कमजोर रहने का असर सिर्फ बारिश के आंकड़ों तक सीमित नहीं है। खरीफ सीजन की फसलों, जलाशयों, नहरों और भूजल रिचार्ज पर इसका असर पड़ सकता है। पंजाब के लिए अब चुनौती बारिश के आंकड़े से आगे बढ़कर उपलब्ध पानी को बचाने और उसका प्रबंधन करने की रहेगी। पंजाब खेतीबाड़ी यूनिवर्सिटी लुधियाना से जलवायु परिवर्तन एवं कृषि मौसम विभाग से डा. पवनीत कौर किंगरा का कहना है कि इस बार का मानसून अल नीनो के प्रभाव तले था, जिससे पहले ही अनुमान था कि सामान्य से कम बारिश होगी। पंजाब तक पर्याप्त मानसूनी सिस्टम नहीं पहुंचे। बारिश लाने वाले लो प्रेशर सिस्टम और मानसूनी गतिविधियां इस बार पंजाब के बजाय अन्य हिस्सों में ज्यादा सक्रिय रहीं। जुलाई के मध्य तक पंजाब में बारिश सामान्य से 24 फीसदी कम दर्ज की गई थी। इसके बाद भी मानसून की गतिविधि लगातार कमजोर बनी रही। सितंबर में भी कमी पूरी नहीं हो सकी।
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2000 के बाद तीसरा सबसे कम बारिश वाला साल रहा, 2012 में 262.2 मिमी व 2014 में 243.9 मिमी की बारिश हुई थी
रिंपी गुप्ता
पटियाला। इस बार मानसून की विदाई के साथ बारिश के आंकड़ों ने चिंता बढ़ा दी है। जून से सितंबर 2026 तक प्रदेश में सामान्य से 38 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई। यह 2000 के बाद तीसरा सबसे कम बारिश वाला साल रहा है।
इस अवधि में केवल 272.8 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि सामान्य आंकड़ा 439.8 मिलीमीटर है। इससे पहले 2014 में 50 फीसदी और 2012 में 47 फीसदी कम बारिश हुई थी। पिछले साल 2025 में 620.9 मिलीमीटर बारिश हुई थी, जो सामान्य से 41 फीसदी अधिक थी। इस साल यह आंकड़ा घटकर 272.8 मिलीमीटर रह गया है। सिर्फ एक साल में मानसूनी बारिश में भारी गिरावट आई है। 2024 में भी 317.3 मिलीमीटर बारिश हुई थी, जो सामान्य से 28 फीसदी कम थी। पंजाब ने लगातार दो साल कमजोर मानसून का सामना किया है।
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भूजल पर बढ़ता दबाव
2026 में जून और सितंबर में सिर्फ 29.5-29.5 मिलीमीटर बारिश हुई। जुलाई में 119.3 मिमी और अगस्त में 94.5 मिमी बारिश दर्ज की गई। यह बारिश जून और सितंबर की भारी कमी की भरपाई नहीं कर पाई। पंजाब की खेती भूजल पर बहुत निर्भर है, जिससे सिंचाई के लिए दबाव बढ़ेगा। मानसून की कमजोरी से भूजल का प्राकृतिक रिचार्ज भी प्रभावित हुआ है।
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साल
2026: 272.8 मिमी | 38% कम
2025: 620.9 मिमी | 41% ज्यादा
2024: 314.6 मिमी | 28% कम
2014: 243.9 मिमी | 50% कम
2012: 262.2 मिमी | 47% कम
मानसून के कमजोर रहने का असर सिर्फ बारिश के आंकड़ों तक सीमित नहीं है। खरीफ सीजन की फसलों, जलाशयों, नहरों और भूजल रिचार्ज पर इसका असर पड़ सकता है। पंजाब के लिए अब चुनौती बारिश के आंकड़े से आगे बढ़कर उपलब्ध पानी को बचाने और उसका प्रबंधन करने की रहेगी। पंजाब खेतीबाड़ी यूनिवर्सिटी लुधियाना से जलवायु परिवर्तन एवं कृषि मौसम विभाग से डा. पवनीत कौर किंगरा का कहना है कि इस बार का मानसून अल नीनो के प्रभाव तले था, जिससे पहले ही अनुमान था कि सामान्य से कम बारिश होगी। पंजाब तक पर्याप्त मानसूनी सिस्टम नहीं पहुंचे। बारिश लाने वाले लो प्रेशर सिस्टम और मानसूनी गतिविधियां इस बार पंजाब के बजाय अन्य हिस्सों में ज्यादा सक्रिय रहीं। जुलाई के मध्य तक पंजाब में बारिश सामान्य से 24 फीसदी कम दर्ज की गई थी। इसके बाद भी मानसून की गतिविधि लगातार कमजोर बनी रही। सितंबर में भी कमी पूरी नहीं हो सकी।