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गवाह ने नामजद पुलिस अफसर से खतरा बताया
ब्यूरो/अमर उजाला, पटियाला
Updated Wed, 27 Jan 2016 03:20 PM IST
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बहुचर्चित मोगा सैक्स स्कैंडल केस में सोमवार को सीबीआई के विशेष जज कंवलजीत सिंह बाजवा की अदालत में सुनवाई हुई। बतौर गवाह पेश हुए रमेश कुमार भल्ला ने अदालत में याचिका दायर करते हुए अपनी जान को खतरा बताते हुए सुरक्षा की मांग की।
अदालत ने इस याचिका पर आगे की कार्रवाई करने के आदेश देते हुए इसकी जांच के आदेश दिए। मामले में अगली सुनवाई 18 मार्च तय की गई। आज की सुनवाई में बचाव पक्ष के वकील सतनाम सिंह कलेर, सीबीआई के वकील समेत इस केस में नामजद सभी आरोपी पेश हुए, जबकि एक महिला को पेशी से छूट मिली थी।
गवाह ने सुरक्षा लेने के लिए याचिका दायर करते हुए कहा कि उसे इस केस में नामजद तत्कालीन डीएसपी रमन कुमार से खतरा है, क्योंकि वह उसको धमकियां देता है। जवाब में अदालत ने मामले की जांच के आदेश दे दिए।
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गौरतलब है कि पुलिस के आला अधिकारियों व एक राजनेता के बेटे की संलिप्तता वाला यह मोगा सैक्स स्कैंडल केस वर्ष 2007 में सामने आया था। जबकि केस में पीड़ित मोगा के धनाढ्य लोग थे, जिन्हें एक स्थानीय महिला की मदद से पुलिस के आला अधिकारियों की ओर से ब्लैकमेल किया जाता था।
महिला मोगा के अमीर व्यापारियों पर उसका शारीरिक तौर पर शोषण करने के आरोप लगाती थी और मामले में शामिल पुलिस अधिकारी इन शिकायतों को निपटाने के एवज में पीड़ित व्यापारियों से मोटी रकमें वसूलते थे।
यह सैक्स स्कैंडल उस समय सामने आया, जब कुछ पीड़ितों ने पुलिस के आला अफसरों के पास अपना दुखड़ा बयां किया। मोगा के कुछ सीनियर पुलिस अधिकारियों की संलिप्तता के कारण पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने इस केस को दिसंबर 2007 में सीबीआई को जांच के लिए सौंप दिया था।
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अदालत ने इस याचिका पर आगे की कार्रवाई करने के आदेश देते हुए इसकी जांच के आदेश दिए। मामले में अगली सुनवाई 18 मार्च तय की गई। आज की सुनवाई में बचाव पक्ष के वकील सतनाम सिंह कलेर, सीबीआई के वकील समेत इस केस में नामजद सभी आरोपी पेश हुए, जबकि एक महिला को पेशी से छूट मिली थी।
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गवाह ने सुरक्षा लेने के लिए याचिका दायर करते हुए कहा कि उसे इस केस में नामजद तत्कालीन डीएसपी रमन कुमार से खतरा है, क्योंकि वह उसको धमकियां देता है। जवाब में अदालत ने मामले की जांच के आदेश दे दिए।
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गौरतलब है कि पुलिस के आला अधिकारियों व एक राजनेता के बेटे की संलिप्तता वाला यह मोगा सैक्स स्कैंडल केस वर्ष 2007 में सामने आया था। जबकि केस में पीड़ित मोगा के धनाढ्य लोग थे, जिन्हें एक स्थानीय महिला की मदद से पुलिस के आला अधिकारियों की ओर से ब्लैकमेल किया जाता था।
महिला मोगा के अमीर व्यापारियों पर उसका शारीरिक तौर पर शोषण करने के आरोप लगाती थी और मामले में शामिल पुलिस अधिकारी इन शिकायतों को निपटाने के एवज में पीड़ित व्यापारियों से मोटी रकमें वसूलते थे।
यह सैक्स स्कैंडल उस समय सामने आया, जब कुछ पीड़ितों ने पुलिस के आला अफसरों के पास अपना दुखड़ा बयां किया। मोगा के कुछ सीनियर पुलिस अधिकारियों की संलिप्तता के कारण पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने इस केस को दिसंबर 2007 में सीबीआई को जांच के लिए सौंप दिया था।