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Patiala News: पंजाब में 16 जगह जली पराली, अब तक 171 मामले आ चुके
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बठिंडा का एक्यूआई बढ़कर 144 पहुंचा, फेफड़े व अस्थमा के मरीजों को सांस लेने में हो सकती है तकलीफ
पराली जलाने के 83 मामलों के साथ अमृतसर टाप पर, तरनतारन में 24 व फिरोजपुर में 11 मामले हुए
अमर उजाला ब्यूरो
पटियाला। सरकार के दावों के बावजूद पंजाब में पराली जलना जारी है। बुधवार को 16 नए मामलों के साथ अब तक 171 मामले पराली जलाने के सामने आ चुके हैं। लगातार पराली जलने से एयर क्वालिटी इंडेक्स भी बढ़ता जा रहा है। बठिंडा का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 63 से बढ़कर 144 पहुंच गया। यह मध्यम श्रेणी में है, लेकिन डॉक्टरों के मुताबिक इस एक्यूआई में फेफड़ों, अस्थमा और दिल के रोगों से पीडित मरीजों को सांस लेने में तकलीफ हो सकती है। वहीं जालंधर का एक्यूआई 66, अमृतसर का 79, खन्ना का 86, लुधियाना का 80, मंडी गोबिंदगढ़ का 85 और पटियाला का 92 दर्ज किया गया।
कपूरथला में पांच जगह जली पराली
बुधवार को आए 16 नए मामलों में सबसे अधिक 5 जिला कपूरथला में हुए। जबकि अमृतसर में पराली जलाने के तीन मामले, जालंधर में 1, पटियाला में 1, संगरूर में 1 और तरनतारन में 4 मामले सामने आए। आंकड़ों के मुताबिक साल 2022 में आज के ही दिन पराली जलाने के 83 और साल 2023 में रिकार्ड तोड़ 119 मामले रिपोर्ट हुए थे। इससे साफ है कि पराली जलाने के मामलों में अब बीते दो सालों की तुलना में गिरावट दर्ज की जा रही है, लेकिन मामले लगातार सामने आ रहे हैं। 15 सितंबर से लेकर अब तक पंजाब में इस बार पराली जलाने के कुल मामले 171 हो गए हैं, जबकि पिछले साल इस समय तक कुल मामले 456 और साल 2022 में यह संख्या 275 थी।जिला अमृतसर पराली जलाने के मामले में लगातार आगे चल रहा है। यहां अब तक पराली जलाने के 83 मामले और फिरोजपुर में 11, गुरदासपुर में 9, जालंधर में 8, कपूरथला में 16, लुधियाना में 2, फतेहगढ़ साहिब में 1, फाजिल्का में भी 1, एसबीएस नगर में 1, पटियाला में 2, रूपनगर में 1, एसएएस नगर में 5, संगरूर में 6, तरनतारन में 24 व मालेरकोटला में 1 मामला हुआ है।
पराली से केवल 2 फीसदी प्रदूषण, किसानों को बनाया जा रहा खलनायक : पंधेर
किसान नेता सरवन सिंह पंधेर के मुताबिक पराली जलाने से केवल 2 फीसदी प्रदूषण होता है, लेकिन सरकारों की ओर से जानबूझ कर किसानों को पंजाब समेत दिल्ली में प्रदूषण फैलने को लेकर खलनायक बनाया जाता है। सारा साल सरकार को प्रदूषण की चिंता नहीं होती है, लेकिन जैसे ही पराली का सीजन होता है, किसानों को प्रदूषण फैलाने के लिए जिम्मेदार ठहराया जाने लगता है। बड़ी-बड़ी इंडस्ट्रीज को प्रदूषण फैलाने से रोका नहीं जाता है। सरकार को किसानों के साथ अन्याय करने की बजाय पराली के प्रबंधन का कोई ठोस हल करना चाहिए।
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पराली जलाने के 83 मामलों के साथ अमृतसर टाप पर, तरनतारन में 24 व फिरोजपुर में 11 मामले हुए
अमर उजाला ब्यूरो
पटियाला। सरकार के दावों के बावजूद पंजाब में पराली जलना जारी है। बुधवार को 16 नए मामलों के साथ अब तक 171 मामले पराली जलाने के सामने आ चुके हैं। लगातार पराली जलने से एयर क्वालिटी इंडेक्स भी बढ़ता जा रहा है। बठिंडा का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 63 से बढ़कर 144 पहुंच गया। यह मध्यम श्रेणी में है, लेकिन डॉक्टरों के मुताबिक इस एक्यूआई में फेफड़ों, अस्थमा और दिल के रोगों से पीडित मरीजों को सांस लेने में तकलीफ हो सकती है। वहीं जालंधर का एक्यूआई 66, अमृतसर का 79, खन्ना का 86, लुधियाना का 80, मंडी गोबिंदगढ़ का 85 और पटियाला का 92 दर्ज किया गया।
कपूरथला में पांच जगह जली पराली
बुधवार को आए 16 नए मामलों में सबसे अधिक 5 जिला कपूरथला में हुए। जबकि अमृतसर में पराली जलाने के तीन मामले, जालंधर में 1, पटियाला में 1, संगरूर में 1 और तरनतारन में 4 मामले सामने आए। आंकड़ों के मुताबिक साल 2022 में आज के ही दिन पराली जलाने के 83 और साल 2023 में रिकार्ड तोड़ 119 मामले रिपोर्ट हुए थे। इससे साफ है कि पराली जलाने के मामलों में अब बीते दो सालों की तुलना में गिरावट दर्ज की जा रही है, लेकिन मामले लगातार सामने आ रहे हैं। 15 सितंबर से लेकर अब तक पंजाब में इस बार पराली जलाने के कुल मामले 171 हो गए हैं, जबकि पिछले साल इस समय तक कुल मामले 456 और साल 2022 में यह संख्या 275 थी।जिला अमृतसर पराली जलाने के मामले में लगातार आगे चल रहा है। यहां अब तक पराली जलाने के 83 मामले और फिरोजपुर में 11, गुरदासपुर में 9, जालंधर में 8, कपूरथला में 16, लुधियाना में 2, फतेहगढ़ साहिब में 1, फाजिल्का में भी 1, एसबीएस नगर में 1, पटियाला में 2, रूपनगर में 1, एसएएस नगर में 5, संगरूर में 6, तरनतारन में 24 व मालेरकोटला में 1 मामला हुआ है।
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पराली से केवल 2 फीसदी प्रदूषण, किसानों को बनाया जा रहा खलनायक : पंधेर
किसान नेता सरवन सिंह पंधेर के मुताबिक पराली जलाने से केवल 2 फीसदी प्रदूषण होता है, लेकिन सरकारों की ओर से जानबूझ कर किसानों को पंजाब समेत दिल्ली में प्रदूषण फैलने को लेकर खलनायक बनाया जाता है। सारा साल सरकार को प्रदूषण की चिंता नहीं होती है, लेकिन जैसे ही पराली का सीजन होता है, किसानों को प्रदूषण फैलाने के लिए जिम्मेदार ठहराया जाने लगता है। बड़ी-बड़ी इंडस्ट्रीज को प्रदूषण फैलाने से रोका नहीं जाता है। सरकार को किसानों के साथ अन्याय करने की बजाय पराली के प्रबंधन का कोई ठोस हल करना चाहिए।
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