{"_id":"6ac5b8cc6fb9ecf9650293aa","slug":"stubble-burning-decreased-in-punjab-aqi-hits-102-asthma-and-heart-patients-face-difficulties-2026-10-07","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"पंजाब में कम जल रही पराली: फिर भी सांसों पर संकट क्यों? एक्यूआई 102 पहुंचा; दमा-दिल के रोगियों को दिक्कत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पंजाब में कम जल रही पराली: फिर भी सांसों पर संकट क्यों? एक्यूआई 102 पहुंचा; दमा-दिल के रोगियों को दिक्कत
Wed, 07 Oct 2026 08:45 AM IST
Nivedita
रिंपी गुप्ता, अमर उजाला, पटियाला
रिंपी गुप्ता, अमर उजाला, पटियाला
Published by: Nivedita
Updated Wed, 07 Oct 2026 08:45 AM IST
सार
पंजाब में पराली में आग लगने की घटनाओं में कमी आई है लेकिन वायु प्रदूषण बढ़ गया है। एक्यूआई 102 पर पहुंच गया है। 101 से 200 तक का एक्यूआई यलो कैटेगरी में आता है। डॉक्टरों के मुताबिक, यह एक्यूआई फेफड़ों, दमा और दिल के रोगों से पीड़ित मरीजों के लिए सांस में दिक्कत कर सकता है।
विज्ञापन
पंजाब में खराब हो रही हवा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पंजाब में खरीफ सीजन के दौरान खेतों में आग की घटनाओं में कमी आई है। इसके बावजूद सितंबर के दूसरे पखवाड़े से अक्तूबर के शुरुआती पांच दिनों तक राज्य की हवा पिछले साल से ज्यादा प्रदूषित रही। सैटेलाइट आंकड़ों के अनुसार, 15 सितंबर से 5 अक्तूबर तक पराली जलाने की घटनाएं 2025 के 95 से घटकर 2026 में 84 रह गईं। यह करीब 12 फीसदी की कमी दर्शाती है।
पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, 16 सितंबर से 30 सितंबर तक पंजाब का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 2025 में 77 था। यह 2026 में बढ़कर 89 हो गया, जो करीब 16 फीसदी की वृद्धि है। अक्तूबर के पहले पांच दिनों में भी स्थिति उलट रही। 2025 में इस अवधि का औसत एक्यूआई 90 था, जबकि 2026 में यह 102 पहुंच गया। यह करीब 14 फीसदी की बढ़ोतरी है।
विज्ञापन
पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, 16 सितंबर से 30 सितंबर तक पंजाब का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 2025 में 77 था। यह 2026 में बढ़कर 89 हो गया, जो करीब 16 फीसदी की वृद्धि है। अक्तूबर के पहले पांच दिनों में भी स्थिति उलट रही। 2025 में इस अवधि का औसत एक्यूआई 90 था, जबकि 2026 में यह 102 पहुंच गया। यह करीब 14 फीसदी की बढ़ोतरी है।
विज्ञापन
Trending Videos
शहरों में वायु गुणवत्ता की स्थिति
शहरवार आंकड़ों में मंडी गोबिंदगढ़ की स्थिति सबसे चिंताजनक रही। सितंबर में यहां औसत एक्यूआई 2025 के 109 से बढ़कर 2026 में 146 हो गया। अक्तूबर के पहले पांच दिनों में भी यह 130 से बढ़कर 152 दर्ज हुआ। जालंधर में सितंबर का औसत एक्यूआई 76 से बढ़कर 81 और अक्तूबर के पहले पांच दिनों में 72 से बढ़कर 121 पहुंच गया।
लुधियाना में सितंबर में औसत एक्यूआई 63 से बढ़कर 80 और अक्तूबर के पहले पांच दिनों में 93 से बढ़कर 102 रहा। पटियाला में सितंबर में औसत एक्यूआई 68 से घटकर 57 रहा, पर अक्तूबर के पहले पांच दिनों में यह 68 से बढ़कर 99 हो गया।
पराली जलाने की घटनाओं का जिलावार विश्लेषण
सैटेलाइट आंकड़ों के अनुसार, 15 सितंबर से 5 अक्तूबर के बीच कुल आग लगाने की घटनाएं 2025 के 95 के मुकाबले 2026 में 84 रहीं। सभी जिलों में कमी नहीं आई। अमृतसर में घटनाएं 55 से घटकर 49 हुईं और पटियाला में 10 से घटकर 2 रह गईं।
इसके विपरीत, तरनतारन में घटनाएं 11 से बढ़कर 18, फिरोजपुर में 1 से 5 और गुरदासपुर में शून्य से बढ़कर 3 हो गईं। 5 अक्तूबर 2026 को 5 सक्रिय घटनाएं दर्ज हुईं, जिनमें अमृतसर में 3 और तरनतारन में 2 थीं। अमृतसर और तरनतारन राज्य के हॉट स्पॉट बने हुए हैं, जहां करीब 80 फीसदी घटनाएं दर्ज हुईं।
प्रदूषण बढ़ने के अन्य कारण
पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि खेतों में आग लगाने की घटनाएं कम होने के बावजूद एक्यूआई का बढ़ना एक संकेत है। यह दर्शाता है कि हवा की गुणवत्ता को सिर्फ खेतों में आग प्रभावित नहीं करती है। मौसम भी एक महत्वपूर्ण कारक है। हवा की गति भी प्रदूषण के स्तर को प्रभावित करती है। स्थानीय उत्सर्जन और अन्य प्रदूषण स्रोत भी एक्यूआई को प्रभावित कर सकते हैं।
शहरवार आंकड़ों में मंडी गोबिंदगढ़ की स्थिति सबसे चिंताजनक रही। सितंबर में यहां औसत एक्यूआई 2025 के 109 से बढ़कर 2026 में 146 हो गया। अक्तूबर के पहले पांच दिनों में भी यह 130 से बढ़कर 152 दर्ज हुआ। जालंधर में सितंबर का औसत एक्यूआई 76 से बढ़कर 81 और अक्तूबर के पहले पांच दिनों में 72 से बढ़कर 121 पहुंच गया।
लुधियाना में सितंबर में औसत एक्यूआई 63 से बढ़कर 80 और अक्तूबर के पहले पांच दिनों में 93 से बढ़कर 102 रहा। पटियाला में सितंबर में औसत एक्यूआई 68 से घटकर 57 रहा, पर अक्तूबर के पहले पांच दिनों में यह 68 से बढ़कर 99 हो गया।
पराली जलाने की घटनाओं का जिलावार विश्लेषण
सैटेलाइट आंकड़ों के अनुसार, 15 सितंबर से 5 अक्तूबर के बीच कुल आग लगाने की घटनाएं 2025 के 95 के मुकाबले 2026 में 84 रहीं। सभी जिलों में कमी नहीं आई। अमृतसर में घटनाएं 55 से घटकर 49 हुईं और पटियाला में 10 से घटकर 2 रह गईं।
इसके विपरीत, तरनतारन में घटनाएं 11 से बढ़कर 18, फिरोजपुर में 1 से 5 और गुरदासपुर में शून्य से बढ़कर 3 हो गईं। 5 अक्तूबर 2026 को 5 सक्रिय घटनाएं दर्ज हुईं, जिनमें अमृतसर में 3 और तरनतारन में 2 थीं। अमृतसर और तरनतारन राज्य के हॉट स्पॉट बने हुए हैं, जहां करीब 80 फीसदी घटनाएं दर्ज हुईं।
प्रदूषण बढ़ने के अन्य कारण
पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि खेतों में आग लगाने की घटनाएं कम होने के बावजूद एक्यूआई का बढ़ना एक संकेत है। यह दर्शाता है कि हवा की गुणवत्ता को सिर्फ खेतों में आग प्रभावित नहीं करती है। मौसम भी एक महत्वपूर्ण कारक है। हवा की गति भी प्रदूषण के स्तर को प्रभावित करती है। स्थानीय उत्सर्जन और अन्य प्रदूषण स्रोत भी एक्यूआई को प्रभावित कर सकते हैं।