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सरकार की नीतियों के विरोध में हड़ताल
अमर उजाला पटियाला
Updated Mon, 07 Oct 2013 11:31 PM IST
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पटियाला। नेशनल रुरल हेल्थ मिशन (एनआरएचएम) के अधीन ठेके पर काम कर रहे सैकड़ों मुलाजिम सोमवार को सरकार की नीतियों के खिलाफ दो दिवसीय कलम छोड़ हड़ताल पर चले गए।
इस दौरान मुलाजिमों ने सिविल सर्जन कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने सरकार से ठेका बेस पर काम कर रहे मुलाजिमों को रेगुलर करने की मांग की गई।
एनआरएचएम इंप्लाइज यूनियन के आह्वान पर जिला पटियाला में मिशन के तहत ठेके पर काम कर रहे सभी मुलाजिम जिनमें एएनएम, स्टाफ नर्स, आयुष, कलेरिक्ल स्टाफ शामिल है। सोमवार को सिविल सर्जन कार्यालय पर एकत्रित हुए और हड़ताल पर चले गए।
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इस दौरान सारे जिले में इमरजेंसी सेवाएं मुकम्मल बंद रहीं और उक्त कर्मचारियों ने सारा दिन कामकाज बंद रखा।
यूनियन के ओहदेदार रघबीर सिंह ने कहा कि सरकार मिशन अधीन भरती मुलाजिमों के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। इसके चलते उन्हें अपना संघर्ष तेज करना पड़ रहा है।
दो दिन हड़ताल के बाद 10 अक्तूबर को यूनियन की ओर से जिला स्तर पर रैली निकाली जाएगी। उन्होंने सरकार से मांग की कि मिशन अधीन काम करते मुलाजिमों की सेवाओं को रेगुलर किया जाए।
आशा वर्करों का भत्ता बढ़ाकर तीन हजार रुपये प्रति महीना और आशा फेसीलीटेटरों का मान भत्ता बढ़ाकर छह हजार रुपये प्रति माह किया जाए। मुलाजिम नेता डॉ. भेदर सिंह भुल्लर ने कहा कि चाहे वह लोग सेहत विभाग में काम करते हैं, लेकिन उन्हें कोई भी मेडिकल लीव नहीं दी जाती है।
एक तरफ तो विभाग की ओर से प्रचार किया जा रहा है कि नवजात शिशु को पहले छह माह हर दो घंटे बाद मां का दूध पिलाना जरूरी है, लेकिन दूसरी तरफ मिशन अधीन ठेके पर काम कर रही महिलाओं को केवल तीन महीने ही प्रसूता छुट्टी दी जाती है।
प्रदर्शन में अमित जैन, मोनिका शर्मा, हेमा रावल, मनप्रीत कौर, लवलिंदर सिंह, त्रिपता रानी, विवेक भगत, मीना कोहली आदि मौजूद रहे।
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इस दौरान मुलाजिमों ने सिविल सर्जन कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने सरकार से ठेका बेस पर काम कर रहे मुलाजिमों को रेगुलर करने की मांग की गई।
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एनआरएचएम इंप्लाइज यूनियन के आह्वान पर जिला पटियाला में मिशन के तहत ठेके पर काम कर रहे सभी मुलाजिम जिनमें एएनएम, स्टाफ नर्स, आयुष, कलेरिक्ल स्टाफ शामिल है। सोमवार को सिविल सर्जन कार्यालय पर एकत्रित हुए और हड़ताल पर चले गए।
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इस दौरान सारे जिले में इमरजेंसी सेवाएं मुकम्मल बंद रहीं और उक्त कर्मचारियों ने सारा दिन कामकाज बंद रखा।
यूनियन के ओहदेदार रघबीर सिंह ने कहा कि सरकार मिशन अधीन भरती मुलाजिमों के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। इसके चलते उन्हें अपना संघर्ष तेज करना पड़ रहा है।
दो दिन हड़ताल के बाद 10 अक्तूबर को यूनियन की ओर से जिला स्तर पर रैली निकाली जाएगी। उन्होंने सरकार से मांग की कि मिशन अधीन काम करते मुलाजिमों की सेवाओं को रेगुलर किया जाए।
आशा वर्करों का भत्ता बढ़ाकर तीन हजार रुपये प्रति महीना और आशा फेसीलीटेटरों का मान भत्ता बढ़ाकर छह हजार रुपये प्रति माह किया जाए। मुलाजिम नेता डॉ. भेदर सिंह भुल्लर ने कहा कि चाहे वह लोग सेहत विभाग में काम करते हैं, लेकिन उन्हें कोई भी मेडिकल लीव नहीं दी जाती है।
एक तरफ तो विभाग की ओर से प्रचार किया जा रहा है कि नवजात शिशु को पहले छह माह हर दो घंटे बाद मां का दूध पिलाना जरूरी है, लेकिन दूसरी तरफ मिशन अधीन ठेके पर काम कर रही महिलाओं को केवल तीन महीने ही प्रसूता छुट्टी दी जाती है।
प्रदर्शन में अमित जैन, मोनिका शर्मा, हेमा रावल, मनप्रीत कौर, लवलिंदर सिंह, त्रिपता रानी, विवेक भगत, मीना कोहली आदि मौजूद रहे।