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Hindi News ›   Punjab ›   Patiala News ›   Questions will Arise on Alliance between Captain Amarinder Singh and BJP in Punjab Assembly Elections

पंजाब विधानसभा चुनाव: साथ तो आ गए कैप्टन और भाजपा, गठबंधन के मकसद को स्वीकार करवाना होगा टेढ़ी खीर

Sat, 18 Dec 2021 03:20 PM IST
निवेदिता वर्मा रिंपी गुप्ता, अमर उजाला, पटियाला (पंजाब)
रिंपी गुप्ता, अमर उजाला, पटियाला (पंजाब) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sat, 18 Dec 2021 03:20 PM IST
सार

राजनीतिक माहिरों का मानना है कि साल भर दिल्ली के बार्डरों पर किसानों की हुई बेकद्री और इस आंदोलन में 700 से अधिक किसानों के शहीद होने का मुद्दा कैप्टन और भाजपा के गठबंधन पर भारी पड़ सकता है।

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Questions will Arise on Alliance between Captain Amarinder Singh and BJP in Punjab Assembly Elections
कैप्टन अमरिंदर सिंह और गजेंद्र सिंह शेखावत। - फोटो : twitter @capt_amarinder

विस्तार

कांग्रेस छोड़ने के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह पंजाब की राजनीति में एक नई पारी खेलने की तैयारी में जुटे हैं। इसके लिए कैप्टन भाजपा और टकसाली अकालियों के साथ गठबंधन की राह पर हैं, लेकिन इस गठबंधन के लिए पंजाब के लोगों में स्वीकार्यता की राह चुनौतियों भरी हो सकती है।

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पंजाब में किसानों का एक बड़ा वोट बैंक है। ऊपर से कैप्टन की नई पार्टी का फिलहाल कोई संगठनात्मक ढांचा नहीं है, जबकि चुनाव नजदीक है। उधर टकसाली अकालियों का भी संगरूर तक ही आधार माना जा रहा है। भले ही भाजपा राष्ट्रीय पार्टी है, लेकिन इसका भी केवल शहरों में ही आधार है। गांव में भाजपा कमजोर मानी जाती है। यही वजह है कि अकाली दल के साथ गठबंधन के वक्त भाजपा को ज्यादातर शहरी सीटों पर ही चुनाव लड़ाया जाता था। ऐसे में इस गठबंधन के लिए निचले स्तर तक वोटरों तक पहुंचना आसान नहीं होगा। 

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भाजपा साथ दोस्ती का औचित्य क्या है साबित करना होगा टेढ़ी खीर: प्रोफेसर बराड़

राजनीतिक मामलों के जानकार पंजाबी यूनिवर्सिटी के अर्थशास्त्र विभाग के प्रोफेसर जसविंदर सिंह बराड़ के मुताबिक कैप्टन के बतौर कांग्रेस के मुख्यमंत्री पिछले साढ़े चार साल के कामकाज से पंजाब के लोग खुश नहीं हैं। कैप्टन ने लोगों की आंकाक्षाओं व उनके साथ किए वादों को पूरा नहीं किया। ऊपर से कैप्टन का उस भाजपा के साथ गठबंधन करना, जिस पार्टी ने किसानों को खेती कानूनों के मुद्दे पर साल भर दिल्ली बार्डरों पर बैठने के लिए मजबूर किया। इस दौरान कई किसानों की मौत हुई। भले ही चुनाव से पहले मोदी सरकार ने खेती कानून वापस लेकर वोटरों को अपने हक में करने की कोशिश की हो, लेकिन फिर भी इस गठबंधन का लोगों के बीच पैठ बनाना टेढ़ी खीर साबित हो सकता है।  

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पंजाब के लिए बड़ी घोषणा करवा कर ले सकते हैं राजनीतिक लाभ 

प्रोफेसर बराड़ का कहना है कि अगर कैप्टन चुनाव से पहले पंजाब या फिर किसानों के लिए केंद्र सरकार से कोई बड़ी घोषणा करा दें, तो इसका फायदा चुनाव में गठबंधन को मिल सकता है। इसमें एमएसपी की कानूनी गारंटी दिलाना या फिर वाघा बॉर्डर खुलवाना अहम रह सकता है। क्योंकि वाघा बॉर्डर खुलने से पंजाब के किसानों को अपनी सब्जियां व फल आदि बेचने के लिए लाहौर जैसी एक बड़ी मंडी मिल सकती है।

कद्दावर नेता की कमी खलेगी-प्रोफेसर टिवाणा

जाने-माने अर्थशास्त्री व राजनीतिक विशेषज्ञ प्रोफेसर बलविंदर टिवाणा का कहना है कि कैप्टन को अभी तक किसी कद्दावर नेता का साथ नहीं मिला है। साथ ही कहा कि सभी पहलुओं को देखने से लगता है कि गठबंधन भले ही कुछ सीटों पर कांग्रेस को नुकसान पहुंचा दे, लेकिन इनके खुद की जीत की राह मुश्किल होगी। इसमें खेती कानून का मसला व कैप्टन की बतौर सीएम कारगुजारी मुख्य कारण रहेंगे।

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