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जेके को एक लाख करोड़ तो पूर्व फौजियों से क्यों मोड़ा मुंह : कैप्टन
ब्यूरो/अमर उजाला, पटियाला
Updated Thu, 23 Jul 2015 10:27 PM IST
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पूर्व फौजियों को वन रैंक वन पेंशन देने के मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री
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कैप्टन अमरिंदर सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आड़े हाथों लिया है।
कैप्टन ने कहा है कि जब मोदी सरकार जम्मू-कश्मीर राज्य को एक लाख करोड़ रुपये का विशेष पैकेज दे सकती है, तो फिर क्या मजबूरी है पूर्व फौजियों के वन रैंक वन पेंशन के लिए 9100 करोड़ रुपये नहीं रख सकती है। मोदी सरकार की ओर से पूर्व फौजियों से मुंह क्यों मोड़ा जा रहा है।
यहां जारी बयान में कैप्टन ने मोदी सरकार की ओर से पूर्व फौजियों को वन रैंक वन पेंशन का फायदा दिए जाने को लेकर की जा रही देरी पर अफसोस जताया है। उन्होंने पीएम को कहा कि सरकार बने एक साल हो चुका है और यह मुद्दा लगातार लटकाया जा रहा है। यह देरी पूरी तरह से नकारने के बराबर है।
वे हैरान हैं कि भारत जैसे देश के लिए 9100 करोड़ रुपये असलियत में बहुत बड़ी रकम है और वह भी जब हमारे फौजियों से जुड़ा मामला है। कैप्टन ने कहा कि पूर्व फौजियों ने बहुत बुरे हालातों में बार्डरों की रक्षा करते हुए अपनी पूरी जिंदगी देश को दी है। कई ने अपनी सारी जिंदगी कश्मीर में निकाल दी और कइ ने देश को बचाने के लिए अपनी जान वार दीं। कैसे सरकार पूर्व फौजियों की मांगों को लेकर बेपरवाह हो सकती है।
कैप्टन ने कहा है कि जब मोदी सरकार जम्मू-कश्मीर राज्य को एक लाख करोड़ रुपये का विशेष पैकेज दे सकती है, तो फिर क्या मजबूरी है पूर्व फौजियों के वन रैंक वन पेंशन के लिए 9100 करोड़ रुपये नहीं रख सकती है। मोदी सरकार की ओर से पूर्व फौजियों से मुंह क्यों मोड़ा जा रहा है।
यहां जारी बयान में कैप्टन ने मोदी सरकार की ओर से पूर्व फौजियों को वन रैंक वन पेंशन का फायदा दिए जाने को लेकर की जा रही देरी पर अफसोस जताया है। उन्होंने पीएम को कहा कि सरकार बने एक साल हो चुका है और यह मुद्दा लगातार लटकाया जा रहा है। यह देरी पूरी तरह से नकारने के बराबर है।
वे हैरान हैं कि भारत जैसे देश के लिए 9100 करोड़ रुपये असलियत में बहुत बड़ी रकम है और वह भी जब हमारे फौजियों से जुड़ा मामला है। कैप्टन ने कहा कि पूर्व फौजियों ने बहुत बुरे हालातों में बार्डरों की रक्षा करते हुए अपनी पूरी जिंदगी देश को दी है। कई ने अपनी सारी जिंदगी कश्मीर में निकाल दी और कइ ने देश को बचाने के लिए अपनी जान वार दीं। कैसे सरकार पूर्व फौजियों की मांगों को लेकर बेपरवाह हो सकती है।