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पंजाब विधानसभा चुनाव: सियासी दावों पर महिलाओं की दो टूक-भीख नहीं, मिले सुरक्षा और शिक्षा का बराबर अधिकार 

Mon, 13 Dec 2021 03:45 PM IST
निवेदिता वर्मा रिंपी गुप्ता, अमर उजाला, पटियाला (पंजाब)
रिंपी गुप्ता, अमर उजाला, पटियाला (पंजाब) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Mon, 13 Dec 2021 03:45 PM IST
सार

महिलाएं चाहती हैं कि उन्हें सुरक्षा, समाज में बराबरी और शिक्षा का अधिकार मिले। जिससे वह खुद अपने पैरों पर खड़ी होकर अपने दम पर सब पा सकें। यह सब दे सकने वाला प्रत्याशी ही हमारा नेता बने।

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Punjab Assembly Elections: Women wants equal rights of security and education
पंजाब की महिला वोटर्स अपने लिए बराबरी का अधिकार चाहती हैं। - फोटो : फाइल

विस्तार

पंजाब विधानसभा चुनाव में कुछ ही समय रह गया है। ऐसे में राजनीतिक दलों की तरफ से वोटरों को लुभाने के लिए कई तरह के वादे किए जा रहे हैं। इनमें भी इस बार महिलाओं के लिए काफी वायदे किए गए हैं। लेकिन महिलाओं का कहना कुछ और ही है। महिलाओं को मुफ्त बस सफर की सुविधा या फिर हर महीने 1000 रुपये या 2000 रुपये महीने की भीख नहीं चाहिए। महिलाएं चाहती हैं कि उन्हें सुरक्षा, समाज में बराबरी और शिक्षा का अधिकार मिले। जिससे वह खुद अपने पैरों पर खड़ी होकर अपने दम पर सब पा सकें। यह सब दे सकने वाला प्रत्याशी ही हमारा नेता बने। 2022 के चुनावी रण में आप और शिअद के द्वारा महिलाओं को हर महीने दी जाने वाली 1000 और 2000 की आर्थिक मदद की घोषणाओं पर महिलाओं ने यह प्रतिक्रिया दी है। 

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नाभा सिविल अस्पताल की ईएनटी डॉ. राजवंत कौर ने कहा कि डाक्टर होने के बावजूद उन्हें लगता है कि खास तौर से कामकाज वाली जगहों पर या कहीं भी आते-जाते समय महिलाएं पूरी तरह से सुरक्षित नहीं हैं। इसलिए मतदान करने से पहले वह इस चीज को पूरे ध्यान में रखती हैं कि प्रत्याशी पढ़ा-लिखा व ईमानदार है। खास तौर से वह महिलाओं की समस्याओं को समझता हो और उनको शिक्षित करने की तरफ उसका रूझान हो। 
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महिला काव्य मंच पंजाब की अध्यक्ष डॉ. पूनम गुप्ता ने कहा कि महिलाओं में दम बहुत है, बस उनके पंखों को उड़ान देने की जरूरत है। यह उड़ान तभी आ सकेगी जब वह शिक्षित हो सकें और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हों। लेकिन दुर्भाग्य यह है कि कोई भी राजनीतिक दल महिलाओं की स्थिति में सुधार के लिए काम नहीं करता, बस केवल दावे ही करता है। उन्होंने कहा कि जो प्रत्याशी इन सबकी तरफ काम करने की वचनबद्धता दिखाएगा, उसी को वोट डाला जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं को 1000 या 2000 रुपये की भीख नहीं, अपने अधिकार मिलें।
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जीएन गर्ल्स कॉलेज पटियाला की प्रिंसिपल डॉ. मंजू वालिया ने कहा कि खास तौर से ग्रामीण इलाकों में महिलाएं आज भी सुरक्षित नहीं है। लड़कियों के लिए शिक्षा पूरी तरह से मुफ्त हो और उन्हें कहने को नहीं, बल्कि सही मायनों में लड़कों के बराबर समाज में अधिकार मिलें। महिलाओं के लिए काम करने वाला जमीन से जुड़े प्रत्याशी को ही वोट डालेंगी। 

समाज सेविका राजपाल कौर मस्त ने कहा कि महिलाओं को किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ने नहीं दिया जाता है। इसलिए वह वोट डालते समय इस बात को जरूर ध्यान में रखेंगी, कि कौन सी पार्टी अपने यहां महिलाओं को कितना प्रतिनिधित्व दे रही है। साथ ही प्रत्याशी का ईमानदार, साफ छवि वाला और सबसे अहम पढ़ा-लिखा होना जरूरी है। जिसके मन में महिलाओं प्रति मान-सम्मान हो।


स्कूल शिक्षिका वीना भारती गुप्ता ने कहा कि महिलाओं को मुफ्त में किसी सुविधा की जरूरत नहीं है। महिलाएं खुद में सक्षम हैं, जो कमा कर जीवन यापन कर सकती हैं। बस समाज में उन्हें शिक्षा व बराबरी का अधिकार मिले। महिलाओं के विकास के लिए काम करने वाले प्रत्याशी को ही वोट डालना पसंद करेंगी।
 

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