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बढ़ती महंगाई को लेकर केंद्र सरकार को कोसा
ब्यूरो, अमर उजाला, पटियाला
Updated Wed, 07 Dec 2016 03:45 PM IST
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पटियाला में पीएसईबी इंप्लाइज फेडरेशन की रैली में हिस्सा लेते सदस्य।
- फोटो : अमर उजाला
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पटियाला में पंजाब के कोने-कोने से बिजली मुलाजिम जुटे और पीएसईबी इंप्लाइज फेडरेशन एटक के बैनर तले आयोजित भगवान सिंह अनखी की 25वीं बरसी समारोह में हिस्सा लिया और उन्हें श्रद्धांजलि भेंट की।
इस मौके पर एटक पंजाब के महासचिव निर्मल सिंह धालीवाल, प्रधान बंत सिंह बराड़ ने कहा कि साथी भगवान सिंह अनखी मरते समय तक मजदूरों और पिछड़े लोगों के हकों की रक्षा के लिए काम करते रहे। इस मौके पर उन्होंने बढ़ती महंगाई को लेकर केंद्र सरकार को जमकर कोसा। साथ ही कहा कि पंजाब में ला एंड आर्डर की स्थिति बदतर है। देश की सरहदें सुरक्षित नहीं हैं।
देश के जवान रोजाना शहीद किए जा रहे हैं। सरकारी तंत्र इन कार्रवाइयों पर कंट्रोल करने में पूरी तरह से असफल साबित हुआ है। नोटबंदी ने गरीब मजदूरों का रोजमर्रा का जीवन भी प्रभावित कर दिया है। उन्होंने गरीब मजदूरों को इसके खिलाफ एकजुट होकर आवाज बुलंद करने की अपील की।
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उन्होंने कहा कि पावरकाम मैनेजमेंट सरकार के हाथों की कठपुतली बनकर रह गई है। मुलाजिमों की गिनती लगातार कम हो रही है। खाली पड़े पदों पर नई भर्ती नहीं की जा रही है। ग्रिडों का रख-रखाव भी आउट सोर्सिंग कराने के हुक्म जारी किए जा रहे हैं।
कांट्रैक्ट पर काम करते कर्मी पक्के नहीं किए जा रहे हैं। पार्ट टाइम स्वीपरों को पक्का करने की जगह ठेकेदारों के हवाले किया जा रहा है। बिजली मुलाजिमों से अपील की कि सारे मिलकर पावरकाम को बचाने और हकों की प्राप्ति के लिए लामबंद होकर आवाज उठाएं।
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इस मौके पर एटक पंजाब के महासचिव निर्मल सिंह धालीवाल, प्रधान बंत सिंह बराड़ ने कहा कि साथी भगवान सिंह अनखी मरते समय तक मजदूरों और पिछड़े लोगों के हकों की रक्षा के लिए काम करते रहे। इस मौके पर उन्होंने बढ़ती महंगाई को लेकर केंद्र सरकार को जमकर कोसा। साथ ही कहा कि पंजाब में ला एंड आर्डर की स्थिति बदतर है। देश की सरहदें सुरक्षित नहीं हैं।
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देश के जवान रोजाना शहीद किए जा रहे हैं। सरकारी तंत्र इन कार्रवाइयों पर कंट्रोल करने में पूरी तरह से असफल साबित हुआ है। नोटबंदी ने गरीब मजदूरों का रोजमर्रा का जीवन भी प्रभावित कर दिया है। उन्होंने गरीब मजदूरों को इसके खिलाफ एकजुट होकर आवाज बुलंद करने की अपील की।
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उन्होंने कहा कि पावरकाम मैनेजमेंट सरकार के हाथों की कठपुतली बनकर रह गई है। मुलाजिमों की गिनती लगातार कम हो रही है। खाली पड़े पदों पर नई भर्ती नहीं की जा रही है। ग्रिडों का रख-रखाव भी आउट सोर्सिंग कराने के हुक्म जारी किए जा रहे हैं।
कांट्रैक्ट पर काम करते कर्मी पक्के नहीं किए जा रहे हैं। पार्ट टाइम स्वीपरों को पक्का करने की जगह ठेकेदारों के हवाले किया जा रहा है। बिजली मुलाजिमों से अपील की कि सारे मिलकर पावरकाम को बचाने और हकों की प्राप्ति के लिए लामबंद होकर आवाज उठाएं।