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उच्च शिक्षा संस्थाओं को दिशा देने के लिए बने रेगुलेटरी संस्था
ब्यूरो, अमर उजाला, पटियाला
Updated Tue, 13 Sep 2016 03:07 PM IST
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पटियाला के प्रभात परवाना ट्रेड यूनियन सेंटर में आयोजित सेमिनार को संबोधित करती शख्यियतें।
- फोटो : अमर उजाला
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प्रभात परवाना ट्रेड यूनियन सेंटर में उच्च शिक्षण संस्थाओं में जम्हूरी ढांचे और जम्हूरी परंपराओं को मजबूत करने की जरूरत विषय पर सेमिनार आयोजित किया गया।
प्रिंसिपल तरसेम बाहिया ने कहा कि देश भर में शिक्षा का निजीकरण होने से शिक्षा का स्तर दिन-प्रतिदिन नीचे गिर रहा है। पंजाब में उच्च शिक्षा की संस्थाओं को दिशा देने और फीसों व पाठ्यक्रम को नियंत्रित करने के लिए कोई रेगुलेटरी संस्था नहीं है। शिक्षा की संस्थाओं में निजी पूंजी का निवेश बढ़ रहा है क्योंकि इस क्षेत्र में काफी मुनाफे की संभावनाएं हैं।
प्रोफेसर महिंदर सिंह ने कहा कि सरकारी कॉलेजों में अध्यापकों के आधे से ज्यादा पद खाली पड़े हैं। ठेके पर लगे गेस्ट फैकल्टी अध्यापकों को पीटीए फंड में से तनख्वाहें देना बहुत ही शर्मनाक व निंदनीय है।
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जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी दिल्ली से आए प्रोफेसर चमन लाल प्रभाकर ने कहा कि शिक्षा संस्थाओं में स्टूडेंट्स को विवेकशील व वैज्ञानिक नजरिया विकसित करने का मौका मिलता है। इन संस्थाओं की लोकतंत्रीय परंपराएं और लोकतंत्रीय ढांचों को खत्म करने की कोशिशें हो रही हैं। धर्म निरपेक्ष और प्रगतिशील ताकतों को हर संभव प्रयास करके इन संस्थाओं के जमहूरी सरूप को बचाना चाहिए।
रिटायर प्रिंसिपल चंद्र प्रकाश राही ने बुद्धिजीवियों व लेखकों से अपील की कि वह कलम की ताकत के साथ शिक्षण प्रबंध में आ रही गिरावट के बारे में लोगों को जागरूक करें। पूर्व इंकम टैक्स कमिश्नर बाबू सिंह रतन ने भी मौजूदा शिक्षण प्रबंध में आई गिरावट पर चिंता जताई।
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प्रिंसिपल तरसेम बाहिया ने कहा कि देश भर में शिक्षा का निजीकरण होने से शिक्षा का स्तर दिन-प्रतिदिन नीचे गिर रहा है। पंजाब में उच्च शिक्षा की संस्थाओं को दिशा देने और फीसों व पाठ्यक्रम को नियंत्रित करने के लिए कोई रेगुलेटरी संस्था नहीं है। शिक्षा की संस्थाओं में निजी पूंजी का निवेश बढ़ रहा है क्योंकि इस क्षेत्र में काफी मुनाफे की संभावनाएं हैं।
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प्रोफेसर महिंदर सिंह ने कहा कि सरकारी कॉलेजों में अध्यापकों के आधे से ज्यादा पद खाली पड़े हैं। ठेके पर लगे गेस्ट फैकल्टी अध्यापकों को पीटीए फंड में से तनख्वाहें देना बहुत ही शर्मनाक व निंदनीय है।
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जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी दिल्ली से आए प्रोफेसर चमन लाल प्रभाकर ने कहा कि शिक्षा संस्थाओं में स्टूडेंट्स को विवेकशील व वैज्ञानिक नजरिया विकसित करने का मौका मिलता है। इन संस्थाओं की लोकतंत्रीय परंपराएं और लोकतंत्रीय ढांचों को खत्म करने की कोशिशें हो रही हैं। धर्म निरपेक्ष और प्रगतिशील ताकतों को हर संभव प्रयास करके इन संस्थाओं के जमहूरी सरूप को बचाना चाहिए।
रिटायर प्रिंसिपल चंद्र प्रकाश राही ने बुद्धिजीवियों व लेखकों से अपील की कि वह कलम की ताकत के साथ शिक्षण प्रबंध में आ रही गिरावट के बारे में लोगों को जागरूक करें। पूर्व इंकम टैक्स कमिश्नर बाबू सिंह रतन ने भी मौजूदा शिक्षण प्रबंध में आई गिरावट पर चिंता जताई।