पांच करोड़ का जुर्माना: रोपड़ थर्मल प्लांट पर पीपीसीबी ने क्यों लगाया भारी जुर्माना?, कोयले की आपूर्ति भी रोकी
पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने रोपड़ स्थित गुरु गोबिंद सिंह सुपर थर्मल पावर प्लांट पर पांच करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। इसके साथ ही थर्मल प्लांट में कोयले की आपूर्ति पर भी रोक लगा दी गई है।
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रोपड़ स्थित गुरु गोबिंद सिंह सुपर थर्मल पावर प्लांट के खिलाफ पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 5 करोड़ का जुर्माना लगाया है। प्लांट को पर्यावरण नियमों के उल्लंघन का दोषी पाया गया है। इसके साथ ही संचालन की अनुमति भी रद कर दी गई है। बोर्ड ने प्लांट प्रबंधन को 15 दिनों के भीतर जुर्माना राशि जमा कराने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश सात जुलाई को पीपीसीबी चेयरमैन की अध्यक्षता में हुई सुनवाई के बाद जारी किया गया है। जब तक यह आदेश स्थगित नहीं किया जाता है, तब तक प्लांट को कोयले की नई आपूर्ति नहीं होगी, जिससे प्लांट में बिजली उत्पादन का काम आने वाले दिनों में प्रभावित हो सकता है। इस मामले में अब अगली सुनवाई अगस्त के दूसरे हफ्ते में होगी।
प्लांट के नजदीकी थल्ली गांव के किसान जगदीप सिंह ने जनवरी 2024 में शिकायत के जरिये आरोप लगाया गया था कि थर्मल प्लांट से उड़ने वाली राख आसपास के गांवों में लोगाें व खेतों में फसलों को नुकसान पहुंचा रही है। इस शिकायत के आधार पर मार्च 2025 में पीपीसीबी की जांच टीम ने प्लांट का दौरा किया और कई खामियां पाई गईं। जांच में राख के निपटारे में कमियों के साथ-साथ रिकाॅर्ड रखने में भी गड़बड़ी मिली। जांच में सामने आया कि प्लांट की 36 फीसदी राख का ही दोबारा से उपयोग किया जा रहा था। पक्के तटबंधों और उपचार प्रणालियों के अभाव के कारण सतलुज नदी में राख का घोल गिरता है। राख को प्लांट से ले जाने के समय उचित सावधानियां न बरते जाने सेस प्रदूषण फैलता है। सड़कों पर पानी के छिड़काव की व्यवस्था नहीं है।
840 मेगावाट है प्लांट की क्षमता
चार यूनिटों वाले रोपड़ प्लांट की वर्तमान क्षमता 840 मेगावाट है। पहले इस प्लांट के छह यूनिट थे, जिसके जरिये यह थर्मल 1260 मेगावाट की बिजली सप्लाई करता था। लेकिन बाद में दो यूनिट बंद कर दिए गए थे। लेकिन भविष्य में यहां दो नई 800 मेगावाट की सुपर क्रिटीकल यूनिट लगने जा रही हैं। इससे बिजली की कुल उत्पादन क्षमता 2440 मेगावाट हो जाएगी।
फैसल के खिलाफ अपील करेंग: चीफ इंजीनियर
थर्मल प्लांट के चीफ इंजीनियर हरीश कुमार शर्मा ने कहा कि वह प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के इस फैसले के खिलाफ अपील दायर करेंगे। उन्होंने बताया कि प्लांट के पास अभी 28 दिन का कोयला स्टोरेज है, जिस कारण फिलहाल कोई समस्या नहीं है। लेकिन यह समस्या बढ़ सकती है क्योंकि धान की बोआई के सीजन के कारण ज्यादा बिजली और पानी की जरूरत होती है। अगर थर्मल प्लांट को राहत न मिली तो पंजाब को बिजली संकट का सामना करना पड़ सकता है। गौरतलब है कि इस थर्मल प्लांट में 210 मेगावाट के चार यूनिट हैं जिससे 840 मेगावाट बिजली का उतपादन किया जा रहा है।